चुनाव शायरी | Political Shayari | Chunav Shayari

Election Shayari

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चुनाव शायरी | Chunav Shayari | Election Shayari

‘सरहदों पर बहुत तनाव है क्या,
कुछ पता तो करो चुनाव है क्या,
और खौफ बिखरा है दोनों समतो में,
तीसरी समत का दबाव है क्या’.
डॉ. राहत इंदोरी


राजनीति का रंग भी बड़ा अजीब होता हैं,
वही दुश्मन बनता है जो सबसे करीब होता हैं.


जरूरी नही है कि चोरों का एक ही हो घराना,
दर्द और राजनीति का रिश्ता है पुराना.


राजनीति की मार ने नेताओं को क्या-क्या सिखा दिया,
बड़े-बड़े वीर नेता को जनता के क़दमों पर झुका दिया.


राजनीति भी रंग-रंगीली हैं,
कुछ ने तो बाप की ज़ागीर समझ ली हैं.


किसी पेड़ के कटने का किस्सा न होता,
अगर कुल्हाड़ी के पीछे लकड़ी का हिस्सा न होगा.


राजनीती में साम-दाम-दंड-भेद सब अपनाया जाता हैं,
जरूरत पड़े तो दुश्मन को भी दोस्त बनाया जाता हैं.


बदल जाओ वक्त के साथ या फिर वक्त बदलना सीखो,
मजबूरियों को मत कोसो हर हाल में चलना सीखो.


मेरी बातों से जो जाहिर हैं छिपायें कैसे,
तेरी मरजी के मुताबिक़ नजर आएं कैसे.


जिन्दा रहे चाहे जान जाएँ,
वोट उसी को दो जो काम आएँ.