Politics Shayari | राजनीति पर बेहतरीन शायरी

Politics Shayari Hindi

Politics Shayari in Hindi ) – यदि आपको कोई राजनीतिक या पॉलिटिक्स से सम्बंधित भाषण देना हो, या ट्विटर पर राजनीति पर चर्चा करनी हो, या फेसबुक पेज पर बढ़िया राजनीतिक शायरी लिखनी हो, तो आप इस तरह की शायरी इस पोस्ट में पा सकते हैं.

हर युग में राजनीति बहुत ही दिलचस्प रहा हैं. समाज को नियंत्रित करने और समाज के संतुलित विकास में ईमानदार राजनीतिज्ञयों का महत्वपूर्ण योगदान रहा हैं. प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से हर व्यक्ति राजनीति से जुड़ा हुआ हैं इसलिए देश के विकास और समृद्धि के लिए जाति-पाति, धर्म, स्वार्थ-लालच से ऊपर उठकर एक ईमानदार नेता का चुनाव करना चाहिए. इस पोस्ट में युवा नेता शायरी ( Yuva Neta Shayari ), राजनीतिक शेरो शायरी ( Rajneetik Shero Shayari ), सियासत और शायरी ( Siyasat aur Shayari ), छात्र राजनीति पर शायरी ( Chhatr Rajniti Par Shayari ), राजनीतिक व्यंग शायरी ( Rajneeti Vyang Shayari ), अच्छे नेता पर शायरी ( Achchhe Neta Par Shayari ), पॉलिटिक्स शायरी ( Politics Shayari ) आदि दिए हुए हैं. इस पोस्ट को पूरा जरूर पढ़े.

राजनीति शायरी | Rajneeti Shayari in Hindi

चोर, बेईमान और भ्रष्ट नेताओं की क्यों करते हो बात,
लोकतंत्र की ताकत है जनता में, दिखला दो इनकी औकात.


नेता की बातों में सच्चाई का अभाव होता है,
झूठ बोलना तो इनका स्वभाव होता हैं.


नेता भी क्या खूब ठगते हैं,
ये तो 5 साल बाद ही दिखते हैं.


मैं अपनी आँख पर चशमाँ चढ़ा कर देखता हूँ
हुनर ज़ितना हैं सारा आजमा कर देखता हूँ
नजर उतना ही आता हैं की ज़ितना वो दिखाता है
मैं छोटा हू मगर हर बार कद अपना बढ़ा कर देखता हूँ


लोकतंत्र जब अपने असली रंग में आता हैं,
तो नेताओं की औकात का पता चल जाता हैं.


तुम से पहले वो जो इक शख़्स यहाँ तख़्त-नशीं था,
उस को भी अपने ख़ुदा होने पे इतना ही यक़ीं था.


राजा बोला रात है
राणी बोली रात है
मंत्री बोला रात है
संत्री बोला रात है
यह सुबह सुबह की बात है


सभी एक जैसा ही लिखते हैं, बस मतलब बदल जाते हैं,
सरकारे वैसे ही चलती हैं, बस वजीर-ए-आजम बदल जाते हैं.


गंदी राजनीति का यह भी एक परिणाम हैं,
बीस रूपये एक बोतल पानी का दाम हैं.


मुझको तमीज की सीख देने वाले,
मैंने तेरे मुँह में कई जुबान देखा है,
और तू इतना दिखावा भी ना कर अपनी झूठी ईमानदारी का
मैंने कुछ कहने से पहले अपने गिरेबां में देखा है.


सियासत की रंगत में ना डूबो इतना,
कि वीरों की शहादत भी नजर ना आए,
जरा सा याद कर लो अपने वायदे जुबान को,
गर तुम्हे अपनी जुबां का कहा याद आए.


राजनीति में अब युवाओं को भी आना चाहिए,
देश को ईमानदारी का आईना दिखाना चाहिए.
युवा नेता शायरी


न मस्जिद को जानते हैं,
न शिवालो को जानते हैं,
जो भूखे पेट हैं,
वो सिर्फ निवालों को जानते हैं.


क्या खोया, क्या पाया जग में,
मिलते और बिछुड़ते मग में,
मुझे किसी से नही शिकायत
यद्यपि छला गया पग-पग में.


सवाल जहर का नहीं था, वो तो मैं पी गया,
तकलीफ लोगों को तब हुई, जब मैं फिर भी जी गया.


जहाँ सच हैं, वहाँ पर हम खड़े हैं,
इसी खातिर आँखों में गड़े हैं.


नजर वाले को हिन्दू और मुसलमान दिखता हैं,
मैं अन्धा हूँ साहब, मुझे तो हर शख्स में इंसान दिखता हैं.


मूल जानना बड़ा कठिन हैं नदियों का, वीरो का,
धनुष छोड़कर और गोत्र क्या होता हैं रणधीरो का,
पाते हैं सम्मान तपोबल से भूतल पर शूर,
“जाति-जाति” का शोर मचाते केवल कायर, क्रूर.


हमारी रहनुमाओ में भला इतना गुमां कैसे,
हमारे जागने से, नींद में उनकी खलल कैसे.


इस नदी की धार में ठंडी हवा तो आती हैं,
नाव जर्जर ही सही, लहरों से टकराती तो हैं.


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