नारी पर कोट्स | Quotes on Women

Women Quotes in Hindi

Quotes on Women in Hindi ( Women Quotes in Hindi ) – वर्तमान समय में एक परिवार, समाज और देश के प्रगति में नारी का सराहनीय योगदान हैं इसलिए पूरी दुनिया नारी सशक्तिकरण का विगुल बजा रही हैं. नये-नये क्षेत्रो में स्त्री के प्रतिभा की पहचान हो रही है. आज के समय में ऐसा कोई क्षेत्र नही हैं जहाँ उच्च स्थान पर नारी न कार्यरत हो. नारी के सम्मान और शिक्षा के लिए हर व्यक्ति को अपना सहयोग करना चाहिए ताकि एक सभ्य समाज का निर्माण हो सके.

अरूणिमा सिन्हा की मोटिवेशनल स्टोरी (Arunima Sinha Motivational Story) हर एक व्यक्ति को ख़ासकर लड़कियों को अरूणिमा सिन्हा के जीवन से सीख लेनी चाहिए और जीवन में बड़े लक्ष्य और बड़ी चुनौती को स्वीकार करना चाहिए.

नारी पर अनमोल वचन | Women Quotes in Hindi

जहाँ स्त्री का सम्मान होता हैं वहाँ देवता वास करते हैं और वही पर ही सुख-समृद्धि होती हैं.

जो अपने घर आता है, उसे मेहमान समझा जाता है, अतः स्त्री भी मेहमान हैं. – प्रेमचंद

शिक्षित स्त्री पर ही राष्ट्र की उन्नति निर्भर होती हैं.

स्त्रियाँ पुरूषों से अधिक बुद्धिमान होती हैं, क्योंकि वे पुरूष से कम जानती हैं, किन्तु उससे अधिक समझती हैं. – जेम्स स्टीफेंस

जिस परिवार, समाज और देश में औरत का सम्मान नही होता हैं, उस परिवार, समाज और देश का पतन निश्चित हैं.

स्त्रियों की स्थिति में सुधार न होने तक विश्व के कल्याण की कोई कल्पना नहीं हो सकती. किसी पंक्षी का एक पंख के सहारे उड़ना बिलकुल असम्भव हैं. – अज्ञात

नारी के बिना पुरूष का बचपन असहाय है, युवास्था सुख रहित हैं और बुढ़ापा सांत्वना देने वाले सच्चे और वफ़ादार साथी से रहित हैं. – जौन

नारी सदैव अजेय रही हैं. – महादेवी वर्मा

कुछ लोग कहते हैं औरत का कोई घर नही होता हैं लेकिन मेरा यह अनुभव हैं कि औरत के बिना कोई घर, घर नही होता हैं.

पवित्र नारी सृष्टिकर्ता की सर्वोत्तम कृति होती है; वह सृष्टि के सम्पूर्ण सौन्दर्य को आत्मसात किये रहती हैं. – रवीन्द्रनाथ ठाकुर

नारी का सम्मान एक सभ्य परिवार, समाज और देश की पहचान हैं.

स्त्रियों का सौन्दर्य उनका पतिव्रत धर्म हैं. – चाणक्य

ईश्वर के बाद हम सबसे अधिक ऋणी स्त्री के हैं, पहले तो स्वयं अपने जीवन के लिए और फिर इस जीवन को जीने योग्य बनाने के लिए. – बोवी

नारी का सम्मान करना, माँ का सम्मान करना हैं. माँ का सम्मान करना, भगवान् का सम्मान करना हैं. जो व्यक्ति सच्चे दिल से भगवान् का सम्मान करता हैं, वही आनन्द से भरा हुआ जीवन जीता हैं.

नारी की करूणा अंतर्जगत का उच्चतम विकास है जिसके बल पर समस्त सदाचार ठहरे हुए हैं. – जयशंकर प्रसाद

औरत कोई खिलौना नही होती, घर वाले तो प्यार से ही गुड़ियां कहते हैं.

नारियाँ इसलिए अधिकार चाहती हैं कि उनका सदुपयोग करें और पुरूषों को उनका दुरूपयोग करने से रोकें. – प्रेमचंद

प्रत्येक देश के दो पंख होते हैं एक स्त्री और दूसरा पुरुष…देश की उन्नति एक पंख से उड़ान भरने पर नही हो सकती हैं.

प्रेम किस प्रकार किया जाता हैं, इसे केवल नारियाँ ही जानती हैं. – मोपासा

स्त्री पुरूष से उतनी ही श्रेष्ठ है, जितना प्रकाश अँधेरे से. मनुष्य के लिए क्षमा, त्याग और अहिंसा जीवन के उच्चतम आदर्श हैं. नारी इस आदर्श को प्राप्त कर चुकी हैं. पुरूष धर्म, अध्यात्म और ऋषियों का आश्रय लेकर उस लक्ष्य पर पहुँचने के लिए सदियों से जोर मार रहा हैं; पर सफल नहीं हो सका. उसका सारा आध्यात्म और योग एक तरफ और नारियों का त्याग एक तरफ. – प्रेमचंद

नारी शक्ति को कम समझना, पुरुष प्रधान समाज की विकृति मानसिकता हैं.

सहनशीलता से जीवन की विषम यात्रा को सरल और सुखद बनाना नारी का कार्य हैं. – ग्रियर्सन

घर की स्त्री साक्षात् लक्ष्मी का रूप होती हैं उनका अपमान करना कक्ष्मी का अपमान करना होता हैं. इससे घर में धन का अभाव होता हैं.

नारी की चरम सार्थकता मातृत्व में हैं. – शरतचन्द्र

समाज की वास्तविक वास्तुकार महिलाएँ हैं.

नारी को अबला कहना उसका अपमान करना हैं. – महात्मा गांधी

एक स्त्री को शिक्षित करने का अर्थ हैं एक पीढ़ी को शिक्षित करना.

विश्व में कोई वस्तु इतनी मनोहर नहीं, जितना कि सुशील और सुंदर नारी. – हंट

जिस घर में स्त्री दुखी होती है उस घर में नकारात्मक उर्जा का संचार होता हैं और दुखो से घिरा रहता हैं.

यदि कहीं कठोर अत्याचार और दुर्व्यहार के बदले में भी स्नेह और प्रेम हो सकता है, तो वह स्त्रियों में हो सकता हैं. – शरतचन्द्र

स्त्री का सम्मान न करना छोटी सोच का सूचक हैं.

नारी शन्ति की प्रतिमा हैं, इसे उच्च पद से नीचे गिराना केवल जंगलीपन है. – रफोडियस

“स्त्री” ईश्वर की उत्तम रचना हैं.

स्त्री पृथ्वी की भांति धैर्यवान है, शांतिसम्पन्न है, सहिष्णु हैं. – प्रेमचंद

जो आदर्श नारी हो सकती है, वही आदर्श पत्नी भी हो सकती है. औरत के हाथ में बड़ी बरक्कत होती हैं. – प्रेमचंद

पत्नी द्वारा युद्ध पर जाते हुए योद्धा को कवच पहनाना, गये जमाने का कोई विचित्र फैशन मात्र नहीं था. यह बात शाश्वत सत्यों में से एक हैं कि स्त्री के स्पर्श के बिना आत्मदृढ़ता का कवच हृदय को मजबूत नहीं बना सकता और केवल स्त्री के प्रेरणा के अभाव में योद्धाओं का पराक्रम धुल में मिल जाता हैं. – रस्किन

नारी का मोह शरीर छूने के पहले विवेक को छू लेता हैं. – कालिदास

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