श्री गणेश जी पर बेहतरीन हिंदी कवितायें | Ganesh Poem in Hindi

Ganesh Poem in Hindi

Ganesh Poem in Hindi ( Short Poem on Ganesh Chaturthi in Hindi ) – इस पोस्ट में भगवान श्री गणेश पर बेहतरीन कवितायें दी गयी हैं. इन्हें जरूर पढ़े. भगवान श्री गणेश को हम कई नामो से जानते है जैसेकि गजानन एकदंत, कपिल, गजकर्णक, लंबोदर, विकट, विघ्न-नाश,विनायक, धूम्रकेतु, गणाध्यक्ष और भी अन्य कई नामो से जानते हैं. शिवजी और पार्वती के पुत्र श्री गणेश जी पर कुछ बेहतरीन कवितायेँ.

गणेश जी पर हिंदी कविता | Hindi Kavita on Ganesh

हे प्रभु गणेशा, ओ प्रभु गणेशा,
रहना आप साथ मेरे हमेशा,

जब मैं हो जाऊ उदास,
मेरे हृदय में करके वास,
जगा देना मेरा विश्वास,
आप मेरे आस-पास हो
इसका है मुझको अहसास.

हे प्रभु गणेशा, ओ प्रभु गणेशा,
रहना आप साथ मेरे हमेशा,

नाश करना हमारे अभिमान का,
देना दान हमें आप ज्ञान का,
काम ऐसा करें बढ़े मान माँ-बाप का,
खुश रहूँ और जीवन हो सम्मान का.

हे प्रभु गणेशा, ओ प्रभु गणेशा,
रहना आप साथ मेरे हमेशा,

दूसरों की सेवा का व्रत मैं पाल लूँ,
आपकी कृपा से ये जिंदगी सम्भाल लूँ,
आपकी भक्ति की आदत मैं डाल लूँ,
जिन माँ-बाप ने बचपन में सम्भाला मुझे
इतनी ताकत देना कि मैं उनकों सम्भाल लूँ.

हे प्रभु गणेशा, ओ प्रभु गणेशा,
रहना आप साथ मेरे हमेशा,

– दुनियाहैगोल


गणपति उत्सव | Hindi Poem on Lord Ganesh

कितना रूप राग रंग
कुसुमित जीवन उमंग!
अर्ध्य सभ्य भी जग में
मिलती है प्रति पग में!

श्री गणपति का उत्सव,
नारी नर का मधुरव!
श्रद्धा विश्वास का
आशा उल्लास का
दृश्य एक अभिनव!
युवक नव युवती सुघर
नयनों से रहे निखर
हाव भाव सुरुचि चाव
स्वाभिमान अपनाव
संयम संभ्रम के कर!
कुसमय! विप्लव का डर!
आवे यदि जो अवसर
तो कोई हो तत्पर
कह सकेगा वचन प्रीत,
‘मारो मत मृत्यु भीत,
पशु हैं रहते लड़कर!
मानव जीवन पुनीत,
मृत्यु नहीं हार जीत,
रहना सब को भू पर!’
कह सकेगा साहस भर
देह का नहीं यह रण,
मन का यह संघर्षण!
‘आओ, स्थितियों से लड़ें
साथ साथ आगे बढ़ें
भेद मिटेंगे निश्वय
एक्य की होगी जय!
‘जीवन का यह विकास,
आ रहे मनुज पास!
उठता उर से रव है,–
एक हम मानव हैं
भिन्न हम दानव हैं!’

– सुमित्रानंदन पंत


प्रार्थना : वर दो गणेशजी… | Poem on Lord Ganesha in Hindi

– अर्चना श्रीवास्तव ‘अर्चन’

वर दो, वर दो, वर दो गणेशजी।
हर लो हमारे, प्रभु सारे दु:ख क्लेशजी।।

धर्म के नाम पर, जंग छिड़ी हैं यहां।
हिन्द बंट जाए, यही चाहता है ये जहां।।

आपस के झगड़ों में, डूबे न देश जी।
वर दो, वर दो, वर दो गणेशजी…।।

दूर होते जा रहे हैं लोग संस्कृति से।
करते हैं खिलवाड़, ये रोज प्रकृति से।

दो बुद्धि गंदा न करें, ये परिवेशजी।
वर दो, वर दो, वर दो गणेशजी…।।

हम हैं तुम्हारे सेवक प्रभो! सर्वदा से ही।
हमको बचा लो प्रभु, घोर विपदा से जी।

अनुग्रह करें, भक्तों पर तो विशेषजी।
वर दो, वर दो, वर दो गणेशजी…।।

हिन्द मेरा बस सदा आबाद ही रहे।
गीता का संदेश कथा रामायण की कहे।।

दिन-रात करे, उन्नति ये मेरा देश जी।
वर दो, वर दो, वर दो गणेशजी…।। साभार – देवपुत्र