रक्षा बंधन – रोचक जानकारी

Raksha Bandhan Rochak Jaankari – समाज और परिवार की एकबद्धता (एकसूत्रता) को बनाये रखने में “रक्षा बंधन” अहम भूमिका निभाता हैं. इसमें बहन रक्षा सूत्र बाधकर भाई के लम्बे उम्र की कामना करती हैं वही पर भाई भी अपनी बहन को हर मुसीबत से बचाने का वचन देता हैं.

रक्षा बंधन – रोचक जानकारी (Raksha Bandhan Rochak Jaankari)

  1. हर साल श्रावण मास की पूर्णिमा को हिन्दू त्यौहार रक्षा बंधन को मनाया जाता हैं इसमें रक्षा बंधन (रक्षा सूत्र) बाधकर लम्बी उम्र या सफ़ल जीवन की कामना की जाती हैं. यह रक्षा सूत्र स्त्री (बहन) और गुरू (ब्राह्मण) के द्वारा मुख्यतः बाधा जाता हैं.
  2. जब राजा बलि ने भगवान् विष्णु की घोर तपस्या करके उन्हें अपने सामने दिन-रात रहने का वरदान ले लिया तब माँ लक्ष्मी ने राजा बलि को रक्षा सूत्र बाधकर अपने पति भगवान् विष्णु जी को अपने साथ लायी थी. वह दिन श्रावण मास के पूर्णिमा का दिन था.
  3. भारत में पेड़ो को भी “रक्षा सूत्र” बाधकर उनके लम्बी उम्र की कामना की जाती है और पेड़ो को न काटने के लिए भी जागरूक किया जाता हैं.
  4. प्राचीन काल में, भारत में जब कोई छात्र “स्नातक” की पढ़ाई पूरी कर लेता था तो उनके गुरू उनको “रक्षा सूत्र” बाधते थे और छात्र की लम्बी उम्र और सफ़ल जीवन की कामना करते थे.
  5. राजपूत जब लड़ाई पर जाते थे तब महिलाएँ उनको माथे पर कुमकुम का तिलक और हाथ में रेशमी धागा बाधती थी ताकि उन्हें युद्ध में विजय मिले.
  6. महाभारत में कई ऐसी कथाएँ है जिनका सम्बन्ध राखी से हैं. कृष्ण और द्रोपदी के बारे में एक कथा हैं – भगवान् कृष्ण ने जब सुदर्शन चक्र से शिशुपाल का वध किया था तभी उनके तर्जनी ऊँगली कट गयी थी और खून निकलने लगा तब द्रोपदी ने उस समय अपनी साड़ी फाड़कर उनकी ऊँगली पर पट्टी बाँध दिया था. यह घटना श्रावण मास की पूर्णिमा को हुआ था. भगवान् कृष्ण ने इस उपकार का बदला द्रोपदी चीरहरण के समय द्रोपदी का चीर बढ़ा कर किया था.
  7. सिनेमा जगत के लिए भी राखी लोकप्रिय विषय रहा हैं और इस पर कई फिल्मे भी बनाई जा चुकी है. “राखी” नाम से दो बार फ़िल्म बनी, पहली बार 1949 में और दूसरी बार 1962 में बनी. 1972 में “राखी और हथकड़ी” फ़िल्म बनी और 1976 में “राखी और राइफल” और “रक्षा बंधन” नामक फ़िल्म बनी.
  8. जब सिकंदर और पुरूवास के बीच युद्ध होने वाला था तब सिकंदर की पत्नी ने पुरूवास को राखी बाधी थी और बदले में सिकंदर को न मारने का वचन लिया था. युद्ध के दौरान पुरूवास ने राखी और दिए हुए वचन का सम्मान करते हुए, सिकंदर को जीवन दान दिया था.
  9. श्री रवीन्द्रनाथ ठाकुर ने “बंग-भंग” का विरोध करते समय “रक्षा बंधन” त्यौहार को बंगाल निवासियों के भाईचारे और एकता का प्रतीक बना कर इसका राजनीतिक उपयोग किया था.
  10. भारत में रक्षा बंधन पर कई साहित्यिक ग्रन्थ भी लिखे गये हैं जिनमे “हरिकृष्ण प्रेमी” का ऐतिहासिक नाटक “रक्षाबंधन” जिसका 1991में 18वां संस्करण प्रकाशित हो चुका हैं.