बेरुखी शायरी | Berukhi Shayari

Berukhi Shayari

Berukhi Shayari in Hindi ( Ignore Shayari in Hindi ) – प्रेम जब कोई किसी को नजरअंदाज करता हैं या बेरूखी दिखलाता हैं तो बहुत ही बुरा लगता हैं, तब व्यक्ति हारा हुआ महसूस करता हैं और दिल की तकलीफें तमाम होती हैं. इस पोस्ट में बेहतरीन Berukhi Shayari और Ignore Shayari दिए हुए हैं. इस पोस्ट को जरूर पढ़े.

बेस्ट बेरूखी शायरी | Best Berukhi Shayri | Best Ignore Shayri

बेवक्त बेवजह बेसबब सी बेरूखी तेरी,
फिर भी बेइम्तहा तुझे चाहने की बेबसी मेरी.
Berukhi Shayari 2 Lines


पहले सी बात न थी, इश्क अब फीका था,
अभी-अभी उन्होंने नजरअंदाजी का हुनर सीखा था.


सुकून-ए-दिल को नसीब तेरी बेरुखी ही सही,
हमारे दरमियाँ कुछ तो रहेगा चाहे फ़ासला ही सही.
Berukhi Shayari 2 Lines in Hindi


काश तुझे मेरी जरूरत हो मेरी तरह,
और मैं तुझे नज़रअंदाज करूँ तेरी तरह.


तुम्हारी बेरूखी के बाद खुद से भी बेरूखी सी हो गई,
मैं जिन्दगी से और जिन्दगी मुझसे अजनबी सी हो गई


आदत हमारी कुछ इस तरह हो गई,
उनकी बेरूखी से भी मुहब्बत हो गई.


बहुत दर्द होता है जब आपको वो इंसान इग्नोर करें,
जिसके लिए आप पूरी दुनिया को इग्नोर करते हैं.


हम यूँ अपनी जिंदगी से मिले,
अजनबी जैसे अजनबी से मिले,
हर वफ़ा एक जुर्म हो गया,
हर दोस्त कुछ ऐसी बेरुखी से मिले.
Dost Ki Berukhi Shayari


मतलब क्या हुआ बेरूखी का,
है कौन मुजरिम तेरी इस ख़ुशी का,
उम्मीद थी जिस से प्यार की ऐ खुदा,
बुझ गया वो चिराग कभी का.
Apno Ki Berukhi Shayari


दिल तोड़कर हमारा तुमको राहत भी ना मिलेगी,
हमारे जैसी तुमको चाहत भी न मिलेगी,
यूँ इतनी बेरुखी ना दिखलाइये हमपर
हम अगर रूठे तो हमारी आहट भी ना मिलेगी.


प्यार उनका हमसे भुलाया ना गया,
उनके बाद कभी हमसे मुस्कुराया ना गया,
उनकी तो बेरुखी में भी वो ऐडा थी ज़ालिम,
की बेवफ़ा का इलज़ाम भी उनपे लगाया ना गया.
Itni Berukhi Shayari


काश वह समझते इस दिल की तड़प को,
तो यूँ रुसवा ना किया होता,
उनकी ये बेरूखी भी मंजूर थी हमें,
बस एक बार हमें समझ लिया होता.


तेरी दुनिया में मुझे एक पल दे दे,
मेरी बेरुखी ज़िन्दगी का गुज़रा हुआ कल दे दे,
वो वक्त जो गुज़ारा था साथ तेरे,
अब उन्हें भूल पाऊं ऐसा कोई हल दे दे.


कभी ऐसी भी बेरूखी देखी है हमने,
कि लोग आप से तुम तक
और तुम से जान तक
फिर जान से अनजान तक हो जाते हैं.


कब तक रह पाओगे आखिर यूँ दूर हम से,
मिलना पड़ेगा आखिर कभी जरूर हम से,
नजरें चुराने वाले ये बेरूखी है कैसी,
कह दो अगर हुआ है कोई कसूर हम से.


उसकी बेरूखी ने छीन ली मेरी शरारतें,
लोग समझते है सुधर गया हूँ मैं.


देख कर बेरूखी उनकी इस कदर आज,
ना जाने क्यों आँखें हमारी नम हो गई,
दरवाजें तो पहले ही बंद हो गये थे उनके,
मगर अब तो खिड़कियाँ भी बंद हो गई.


तेरी बेरूखी को भी रूतबा दिया हमने,
प्यार का हर फ़र्ज अदा किया हमने,
मत सोच कि हम भूल गयें है तुझे,
आज भी खुदा से पहले तुझे याद किया हमने.


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