World Forest Day in Hindi – 21 March विश्व वानिकी दिवस

World Forestry Day in Hindi

World Forest Day in Hindi ( विश्व वानिकी दिवस – 21 मार्च ) – वनों के महत्व को समझाने और लोगों को जागरूक बनाने के लिए विश्व वानिकी दिवस ( World Forestry Day ) मनाया जाता हैं ताकि जंगलों को कटने से रोका जा सके और लोगो को बताया जा सके कि यदि वन – पेड़-पौधे नहीं बचेंगे तो पर्यावरण में असंतुलन आ जाएगा जिससे प्राकृतिक आपदा आने की सम्भावना बढ़ जाती हैं.

जब तक पेड़-पौधे और वन हैं,
तब तक ही धरती पर जीवन हैं.

विश्व वानिकी दिवस का इतिहास | World Forest Day History in Hindi

सन् 1971 में पहला विश्व वानिकी दिवस मनाया गया. भारत में वन महोत्सव जुलाई सन् 1950 ई. से ही मनाया जा रहा है. इसकी शुरूआत तत्कालीन गृहमंत्री कुलपति कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी ने किया था. भारत में वनों की इतनी अंधाधुंध कटाई हुई हैं कि लगभग 22% भूमि पर ही वनों और जंगलों का अस्तित्व हैं.

विश्व वानिकी दिवस का उद्देश्य | Purpose of World Forestry Day in Hindi

विश्व वानिकी दिवस मनाने का मुख्य उद्देश्य यह है कि सभी देश की सरकारें कड़े से कड़ा क़ानून बनाएं ताकि वनों और जगलों की कटाई पर रोक लग सके. सभी देशों में तरक्की के नाम पर पेड़ों, वनों और जगलों की खूब कटाई हुई हैं, इसलिए यह जरूरी हैं कि जन-जन को जागरूक बनाया जाय और सभी देश के सभी लोग वृक्षारोपण में अपना योगदान दें.

वर्तमान समय की बात करें तो प्रदूषण एक सबसे बड़ी समस्या हैं. इसका प्रमुख कारण वनों और जगलों की अंधाधुंध कटाई हैं जिसके कारण ग्लोबल वार्मिंग, जल प्रदूषण, वायु प्रदूषण, प्राकृतिक आपदा, मौसम में बदलाव आदि प्रमुख समस्याएं हुई हैं इसलिए यह जरूरी हैं कि जन-जन जागरूक हो और पेड़-पौधों को लगायें.

भारत में छत्तीसगढ़ राज्य में सबसे ज्यादा वन-सम्पदा हैं. भारत सरकार द्वारा सन् 1952 ई. में निर्धारित “राष्ट्रीय वन नीति” के तहत देश के 33.3% क्षेत्र पर वन होने चाहिए. मकानों के निर्माण, वनों को खेती के काम में लाना, लकड़ियों और लकड़ी के सामान की बढ़ती मांगों के कारण वनों की अंधाधुंध और अवैध कटाई के कारण ही वन नष्ट हुए हैं. अब सभी लोग शिक्षित और जागरूक हैं तो यह हम सबकी जिम्मेदारी बनती हैं कि जंगलों और वनों को संरक्षण प्रदान करें और सरकार की मदद करें ताकि जंगलों की अवैध कटाई पर रोक लग सके. भारत के प्रसिद्ध पर्यावरणविद के. एम. मुंशी ने कहा था कि “वृक्षों का अर्थ है जल, जल का अर्थ है रोटी और रोटी ही जीवन हैं.

वनों से लाभ | Benefits from Forests

हर शिक्षित और जागरूक व्यक्ति को यह जानना जरूरी हैं कि वनों से क्या-क्या लाभ होते हैं ताकि वो इन्हें सुरक्षित रखने में अपना योगदान दे सके.

  • पेड़ कार्बनडाई ऑक्साइड को अवशोषित करते हैं और ऑक्सीजन को छोड़ते हैं जो ऑक्सीजन की वजह से ही इस पृथ्वी पर जीवन सम्भव हैं. पेड़ हैं तो मानव हैं.
  • वन और जंगल, जंगली जीवों को संरक्षण, भोजन प्रदान करते हैं वनों की अधिक कटाई की वजह से कई जानवरों की प्रजाति लुप्त हो रही हैं.
  • पेड़ों से फल, फूल, लकड़ी, सेलोफेन, प्लास्टिक, रेयान, नायलॉन, रबड़, मसाले और औषधि आदि प्राप्त होते हैं.
  • पेड़ की जड़े मिट्टी को जकड़ी रखती हैं जिसके कारण भारी बरसात में मृदा अपरदन (मिट्टी का कटाव) और बाढ़ को भी रोकती हैं.
  • वन और जंगल प्रकाश के परावर्तन को घटाते हैं, ध्वनि को नियंत्रित करते है.
  • वन और जंगल पर्यावरण को संतुलित बनाये रखने में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं.

वनों के काटने से हानि

  • आजकल बंद डब्बों में हवा (ऑक्सीजन) बिकने लगी हैं इसका मुख्य कारण “वायु प्रदूषण” हैं. जो हमें मुफ्त में मिल रहा था. अब आने वाले समय में उसके लिए पैसे देने पड़ेंगे तब शायद लोगो को समझ में आएगा कि पेड़-पौधों, वनों और जगलों की सुरक्षा कितनी जरूरी हैं. आजकल हर बड़ा शहर वायुप्रदूषण से पीड़ित हैं.
  • ग्लोबल वार्मिंग का एक प्रमुख कारण पेड़ों, वनों और जगलों की अंधाधुंध कटाई भी हैं.
  • वनों और जंगलों की कटाई की वजह से मौसम में बड़ा बदलाव आया हैं जिसकी वजह से जिस मौसम में बरसात होना चाहिए उस मौसम में नहीं होता हैं.
  • जिन राज्यों में वन और जंगल होते हैं वहाँ वर्षा अधिक होती है इसलिए ऐसे जगहों पर सूखे की समस्या नहीं होती हैं. धरती का जल स्तर दिनों-दिन नीचे जा रहा हैं जिसके कारण पीने वाले जल की समस्या भी आ रही हैं. सूखे की समस्या, धरती के जल स्तर के नीचे जाने की समस्या आदि वृक्षों और वनों के कटाई के कारण ही हुआ हैं.
  • वृक्षों और वनों को काटने से और भी कई हानियाँ होती हैं.

पेड़-पौधे, वनों और जगलों का हमारे जीवन में बड़ा महत्व हैं इसलिए हर व्यक्ति का यह कर्तव्य बनता हैं कि इसकी सुरक्षा और संरक्षण में अपनी अहम भूमिका निभाएं. आने वाली पीढ़ियों को जागरूक बनाएं. सरकार पेड़ों, वनों और जगलों की कटाई पर कड़ा से कड़ा क़ानून बनाये. इसके महत्व को बच्चों के शिक्षा पाठ्यक्रम में शामिल किया जाय.

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