शिवलिंग की पूजा घर में क्यों नहीं करनी चाहिए ?

Why Shivling is not worshiped at home in hindi ? – इस आर्टिकल को “हिन्दू रीति-रिवाजों का शास्त्रीय एवं वैज्ञानिक आधार” नामक किताब से लिया गया है. इसके लेखक डॉ. सच्चिदानंद शुक्ल है. आशा करता हूँ आपको यह लेख जरूर पसंद आएगा।

शिवलिंग की पूजा घर में क्यों नहीं करनी चाहिए

समस्त व्यक्ति अपने-अपने आराध्य को अपने घर के पूजास्थल में स्थान देकर प्रसन्नता का अनुभव करते है. प्रतिदिन उनकी पूजा-अर्चना करके स्वयं को भाग्यशाली मानते हैं और विचार करते हैं कि घर में उन्हें स्थान देने से आने वाली संभावित समस्याएँ समाप्त होंगी। यह सही है किन्तु देवाधिदेव भोले भण्डारी भगवान् शिव के लिंग व चित्र की पूजा घर के पूजास्थल में वर्जित मानी गई है. सामान्य पूजा से शीघ्र प्रसन्न हो जाने वाले देव शिवजी की पूजा का विधान घर के पूजास्थल में न होना आश्चर्य की बात है.

इसके प्रमुख कारण क्या है और वे कितने सही हो सकते हैं. पहला और प्रमुख कारण यह हैकि भगवान् शिव को श्मशान का वासी माना जाता है. किन्तु इसके अतिरिक्त कुछ अन्य कारण भी हैं, जिन पर विचार किया जाना अत्यंत आवश्यक है. भगवान् शिव की प्रमुख तीन अवस्थाएँ देखने में आती है. उनकी प्रथम अवस्था “समाधि” की है. जब वे समाधि में होते हैं, तो लम्बे समय तक इसी अवस्था में बने रहते है. दूसरी अवस्था पत्नी के वियोग में दुखी एवं विक्षिप्त व्यक्ति जैसी है. तीसरी अवस्था में वे विध्वंस का तांडव करते दिखाई देते है. इन तीनों अवस्थाओं को पारिवारिक वातावरण और व्यवस्था के लिए ठीक नहीं माना जा सकता है. तीन अवस्थाओं को पारिवारिक वातावरण और व्यवस्था के लिए ठीक नहीं माना जा सकता हैं. तीन अवस्थाओं के अतिरिक्त ऊपर लिखा कारण भी पूजा करने से रोकता है कि वे श्मशान के वासी हैं.

इसके अतिरिक्त एक और कारण भी है, जिससे घर में शिव-पूजा को मना किया गया है. शिवगणों में भूत-प्रेत आदि होते है. जहाँ शिव की पूजा होगी, वहाँ स्वाभाविक रूप से उनके गणों उपस्थिति भी अवश्य होगी। अगर आपको शिवजी की पूजा-अर्चना अपने निवास के पूजास्थल में करनी है, तो शिव-परिवार की पूजा की जा सकती हैं. घर में की गई पूजा का फल भगवान् शिव तभी देते है, जब वे अपने परिवार के साथ होते हैं. शिव अपने परिवार में ही वे सौम्य अवस्था में दिखाई देते हैं. अधिकांश शिवालयों में प्रायः शिवलिंग के साथ-साथ गणेश जी, माता पार्वती तथा कार्तिकेय की भी पूजा की जाती है ताकि शिव की उन तीन अवस्थाओं से बचा जा सके, जो कि शुभ फलदायक नहीं होती है. शिवालयों में भी जब उनकी स्वतंत्र रूप से पूजा आदि नहीं की जा सकती, तो फिर घर के सामान्य पूजा-स्थल में शिव-पूजा कैसे की जाये।

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भगवान् शिव की तीनों अवस्थाओं को उपर्युक्त परिप्रेक्ष्य में समझना होगा, तभी स्पष्ट हो पाएगा कि घर के पूजास्थल में उनकी पूजा करना क्यों निषिद्ध किया गया है.

प्रथम – समाधि अवस्था

भगवान् शिव की प्रथम अवस्था को ‘समाधि’ की अवस्था के रूप में देखा जाता है. समाधि के लिए कोलाहलरहित, शांत और निर्जन स्थल का होना आवश्यक है. समाधि की अवस्था में व्यक्ति बाहरी जगत से कटता चला जाता है और अपने भीतर की ओर यात्रा करने लगता है. समाधिस्थ देव की समाधि स्वयं टूटे, तब कोई समस्या नहीं है, किन्तु किसिस कारण विशेष से समाधि टूटे अथवा तोड़ी जाए तो समाधिस्थ देव को क्रोध का आना स्वाभाविक है. क्रोध की स्थिति में वह कितना अनिष्ट एवं विध्वंस कर सकताहै , इसके बारे में अनुमान लगाना कठिन है. जब भगवान शिव की समाधि को तोड़ने का प्रयास कामदेव एवं उनकी पत्नी ने किया, तो समाधि टूटने पर भगवान् शिव ने क्रोध में आकर कामदेव को भस्म कर डाला था. पारिवारिक वातावरण समाधि के योग्य नहीं होता है. यहाँ प्रतिदिन किसी न किसी प्रकार का आयोजन-प्रयोजन होता रहता है, जहाँ कोलाहल जैसी स्थिति उत्पन्न हो जाती है. भगवान् शिव के बारे में विश्वास किया जाता है कि वे जहाँ समाधिस्थ होते है, वह स्थान ही समाधि स्थल हो जाता है. किसी परिवार की कल्पना समाधिस्थल के रूप में की जाए तो कैसी तस्वीर बनती है, इसकी कल्पना करना भी आसान नहीं है. यह प्रभाव प्रत्यक्ष रूप से प्राप्त होगा, ऐसा नहीं है, किन्तु अप्रत्यक्ष रूप से और अप्रत्याशित स्थितियों में समस्याएँ एवं कष्ट उतपन्न होंगे, वे अवश्य भयंकर पीड़ा देने वाले होंगे।

दूसरी अवस्था – पत्नी वियोग

भगवान् शिव की दूसरी अवस्था पर भी विचार करें। यह अवस्था पत्नी-वियोग से उत्पन्न दुःख की विक्षिप्तावस्था कही जा सकती है. वे अपनी प्रथम पत्नी सती के आधे जले मृतशरीर को कंधे पर रख कर अर्द्धविक्षिप्त अवस्था में अनेक वर्षों तक जंगलों एवं पर्वतों पर भटकते रहे. इस प्रकार की मनःस्थिति वाले शिव की घर में पूजा-अर्चना करने से घर का वातावरण भी प्रभावित होता है. विक्षिप्त अवस्था में एक व्यक्ति कुछ भी कर सकता है. ऐसा ही भय भगवान् शिव से भी रहता है. इस कारण से भी घर के पूजास्थल में भगवान् शिव की पूजा को निषिद्ध माना गया है ताकि परिवार पर किसी प्रकार की विपत्ति ना आये.

तीसरी अवस्था – विध्वंसक

भगवान् शिव की तीसरी अवस्था साक्षात विध्वंस करने वाली है, वे विध्वंस के देव भी माने जाते है. जब वे ताण्डव नृत्य करते हुए विध्वंस प्रारम्भ करते है, तो उन्हें रोक पाना किसी के लिए भी सम्भव नहीं होता है. इस अवस्था को भी ध्यान में रखते हुए घर के पूजास्थल में उनकी पूजा करने का विधान नहीं है. इसके अलावा उनके गणों का भी ध्यान कर लें. प्रत्येक गृहस्थ भूत-प्रेत तथा ऊपरी बाधाओं से सबसे अधिक भयभीत रहता है. इनका नाम सुनते ही शरीर में भय व्याप्त हो जाता है. भूत-प्रेत शिव के गण है, जो हमेशा उनके साथ-साथ ही रहते है. चूँकि शिव का निवास श्मशान स्थल को माना गया है, इसलिए वहाँ भूत-प्रेत की उपस्थिति से आम गृहस्थ को समस्या नहीं आती है, किन्तु अगर भगवान शिव की आप अपने घर के पूजास्थल में पूजा कर रहे है, तो इन भूत-प्रेतों को कैसे अपने से दूर रख पाएंगे।

भगवान् शिव के रौद्र स्वरूप का चित्र भी घर में नहीं लगाएं और ना ही इनके इस स्वरूप की कल्पना करें। उपर्युक्त वर्णित तीन विशिष्ट अवस्थाओं को अगर छोड़ दिया जाये, तो भगवान् शिव सभी का कल्याण करने वाले तथा दुःख-संकट दूर करने वाले देव है.

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