पेड़ पर कविता | Save Tree Poem in Hindi

Save Tree Poem Kavita Poetry in Hindi – इस आर्टिकल में पेड़ बचाओं एक छोटी सी सुंदर कविता दी गई है जरूर पढ़े.

दिनों दिन बीमारी और पर्यावरण प्रदूषण बढ़ता जा रहा है इसलिए यह जरूरी है कि हर व्यक्ति हर साल कम से कम एक पेड़ जरूर लगाएं। पेड़ ही इंसान और सभी जीवों के जीवन का आधार है. पेड़ को कटने से नहीं बचा पाएंगे तो शायद इंसान अपना भविष्य भी नहीं बचा पायेगें। पेड़ हमे छांव देते है इन्हें घाव मत दीजिये।

Save Tree Poem in Hindi

धरती की बस यही पुकार,
पेड़ लगाओ बारम्बार।

आओ मिलकर कसम खाएं,
अपनी धरती हरित बनाएं।

- Advertisement -

धरती पर हरियाली हो,
जीवन में खुशहाली हो.

पेड़ पौधों को पानी दे
जीवन में खुशहाली दे.

जीवन सुखी बनाए हम,
आओ पेड़ लगाए हम.


Tree Poem in Hindi

गुलशन मरूस्थल हो चला,
है शुष्क ये सारा गगन
निश्चिन्त दोषन कर रहा
है मनुज अपने में मगन

ना आज की चिंता सताती
ना ही भविष्य का ज्ञान है
विज्ञान की डोरी पर दौड़े
फिर भी प्रकृति से अंजान है

प्रकृति के सब्र का बाँध भी
कब तक अडिग रह पाएगा
हे मूढ़ मानव कब तक तुम्हें
ये बूढ़ा तरूवर बचाएगा

है खड़े तन कर ये तरूवर
रोष दिनकर का संभाले
प्रोष में ये धरा है व्याकुल
हे मनुज तरूवर बचा लो.
अतुल कुमार सिंह


पेड़ पर कविता

गर बोल सकते पेड़
तो पहले बोलते नहीं
पहले रोते

हंस सकते पेड़
तो पहले सुनाते अपना दुःख

तुम्हें क्या लगता है कि
पेड़ों को चलना नहीं आता?
गलतफहमी है तुम्हारी!

वो जानते हैं चलना
लेकिन वह नहीं भाग जाना चाहते
तुम्हें अकेला छोड़कर
वो जानते हैं छोड़कर चले जाने का दुःख

उन्होनें देखीं है,
कितनी सारी पीढ़ियाँ
जाते हुए!
उन्हें पता है कि किसी के चले जाने पर
मनुष्य करता है विलाप
ग़लतफ़हमियाँ उन्हें भी होती है!
मुदित श्रीवास्तव


Save Tree Poetry in Hindi

कितने अच्छे पेड़ हमारे
घनी छांह हमको देते हैं
ऊँचे होते सुंदर लगते
हरा भरा मन कर देते हैं
शाख हिला कर हमें बुलाते
नित्य निमंत्रण देते रहते
चिड़ियाँ गाती फुदक-फुदक कर
उनको खेल खिलाते रहते
पहले फूल खिलाते जी भर
फल भी हमको दे देते
खट्टे मीठे और रसीले
सभी स्वाद के हैं वे होते
फल पक जाते ही झुक जाते
विनम्रता का पाठ पढ़ाते
वर्षा लाते ठीक समय पर
प्रयावरण पवित्र बनाते
इन्हें काटना नहीं कभी भी
ये तो सबके प्यारे हैं
झूलों की शोभा बन जाते
गीत सुनाने वाले हैं।
सरोजिनी कुलश्रेष्ठ


अपना फर्ज निभाता पेड़ – बाल कविता

दादाजी-दादाजी बोलो,
पेड़ लगा जो आंगन में।
इतना बड़ा हुआ दादाजी,
बोलो तो कितने दिन में?

मुझको यह सच-सच बतलाओ,
किसने इसे लगाया था।
हरे आम का खट्टा-खट्टा,
फल इसमें कब आया था?

मात्र बरस दस पहले मैंने,
बेटा इसे लगाया था।
हुआ बरस छह का था जब ये,
तब पहला फल आया था।

बीज लगाया था जिस दिन से,
खाद दिया, जल रोज दिया।
पनपा खुली हवा में पौधा,
मिली धूप तो रूप खिला।

तना गया बढ़ता दिन पर दिन,
डाली पर फुनगे फूटे।
हवा चली जब सर-सर-सर सर,
गान पत्तियों के गूँजे.

पहला फूल खिला डाली पर,
विटप बहुत मुस्काया था।
जब बदली मुस्कान हंसी में,
तब पहला फल आया था।

तब से अब तक हम सबने ही,
ढेर-ढेर फल खाये हैं।
जब से ही यह खड़ा बेचारा,
अविरल शीश झुकाये है।

इसे नहीं अभिमान ज़रा भी,
कुछ भी नहीं मंगाता है,
बस देते रहने का हरदम,
अपना फर्ज निभाता है।
प्रभुदयाल श्रीवास्तव


Tree Poem in Hindi

इधर कविताओं में कम पड़ते जा रहे है पेड़
कम होती जा रही पेडों पर लिखी कविताएँ

पेडों को दु:ख है कि
उस कवि ने भी कभी अपनी कविताओं में
उसका जिक्र नहीं किया
जो हर रोज़ उसकी छाया में बैठ
लिखता रहा देश-दुनिया पर अपनी कविताएँ

पेडों को दु:ख है कि
उस हाथ ने काटे उसके हाथ
जिस हाथ ने कभी कोई पेड़ नहीं लगाए
और मारे उसने उसके सिर पर पत्थर
जिसको अक़्सर अपनी बाँहों में झूलाता
देता रहा अपनी मिठास

दु:खी हैं पेड़ कि
उस हाथ ने किए उसके हाथ ज़ख़्मी
जिसके ज़ख़्मी हाथों पर मरहम का लेप बन
सोखता रहा वह उसकी पीड़ा

पेड़ दुखी है कि
उनका दु:ख कहीं दर्ज नहीं होता
और न ही अख़बारों में आदमी की तरह
छपती हैं उसकी हत्या की खबरें !

दु:खी है पेड़ कि
सब दिन सबका दु;ख बाँटने के बावजूद
आज उसका दु:ख कोई नहीं बाँटता !

यहाँ तक कि उसकी छाया में बैठकर
वर्षों पंचायती करने वालों ने भी
कभी उनकी पंचायती नहीं की !
अशोक सिंह


Ped Par Kavita

एक ऐसे समय में
जब पेड़ आदमी नहीं हो सकते
और न ही आदमी पेड़

पेड़ आदमी से पूछना चाहते हैं
विनम्रता से एक बात कि —
अगर उसकी जगह आदमी होता
और आदमी की जगह वह
तो आज उस पर क्या बीत रही होती ?

कहो न ! चुप क्यों हो ?
क्या बीत रही होती तुम पर
अगर आदमी के बजाय तुम पेड़ होते ?
अशोक सिंह


Poem on Tree in Hindi

पेड़ लगाओ, पेड़ लगाओ
हरा भरा जीवन बनाओ
छाया ये हमको देते है
फल ये हमको देते है
गर्मी की धूप से हमे बचाते है
प्रदूषण को कोशो दूर हटाते है
हम भी पेड़ लगाएंगे
संसार को हरा-भरा बनाएंगे।


इसे भी पढ़े –

Latest Articles