लखनऊ शायरी स्टेटस कोट्स | Lucknow Shayari Status Quotes

Lucknow Shayari

Lucknow Shayari Status Quotes Poem Images in Hindi – लखनऊ जिसे नवाबों का शहर कहा जाता है. यह उत्तर प्रदेश की राजधानी हैं. पूरे विश्व में इसे अदब और तहजीब के लिए जाना जाता हैं. उत्तर प्रदेश का यह महानगर बड़े ही तेजी से विकास कर रहा हैं. यहां के अधिकांश लोग हिंदी बोलते हैं. यहां के हिंदी में लखनवी अंदाज विश्वप्रसिद्ध हैं.

लखनऊ प्राचीन कौशल राज्य का हिस्सा था। यह भगवान राम की विरासत थी जिसे उन्होंने अपने भाई लक्ष्मण को समर्पित कर दिया था. जिसके कारण यह लक्ष्मणपुर या लखनपुर के नाम से जाना गया. समय बीतने के साथ नाम में बदलाव आया और इसका नाम लखनऊ हो गया। यहां से अयोध्या की दूरी मात्र 80 मील है।

आप जब रेल यात्रा करके लखनऊ आएंगे. तो आपको लखनऊ में चारबाग रेलवे स्टेशन के प्रवेश द्वारा पर यह लाइन लिखा मिल जाएगा। जोकि यात्रियों के स्वागत के लिए लिखा हुआ हैं.

अगर आप तहज़ीब और नज़ाकत से इत्तेफ़ाक़ रखते हैं,
बेशक मुस्कुराइए की आप लखनऊ में हैं.

लखनऊ शायरी | Lucknow Shayari

लखनऊ अब बड़ा शहर हो गया हैं,
यहाँ का तहजीब और अदब खो गया हैं.


बड़ी मुश्किल से आते हैं समझ में लखनऊ वाले
दिलों में फ़ासले लब पर मगर आदाब रहता है
मुनव्वर राना


बड़े तहजीब से उस लखनऊ की
लड़की ने मेरा दिल तोड़ा था,
उसे भी यकीन नहीं हुआ
जब मैंने उसे छोड़ा था.


Lucknow Nawab Shayari Hindi

लखनऊ की तहजीब बड़ी ही पुरानी है,
बड़ी अजीब यहाँ के नबाबों की कहानी है.


बड़े अजीब इस शहर के झमेले हैं,
भीड़ तो दिखती है पर सब अकेले हैं.


कशिश-ए-लखनऊ अरे तौबा
फिर वही हम वही अमीनाबाद
यगाना चंगेज़ी


Lucknow Status in Hindi

बढती हुई जनसँख्या
कटते हुये पेंड़
है सडकों पर पडे हुये
कूड़े- करकट के ढ़ेर
घुलता नहीं क्या
तेरी धमनियों में
गंदगी का जहर
कुछ तो बता लखनऊ शहर ?
रवीन्द्र प्रभात


ठगा हुआ विद्यार्थी
पढ़ाई के नाम पर यहाँ व्यवसाय चलता हैं,
अब लखनऊ मुझे अच्छा नहीं लगता है.


Shayari on Lucknow Food

पूरी दुनिया में मशहूर हैं,
लखनऊ के नबाब और क़बाब।


बिरयानी की तरह सरकारी बजट खाना
और पान की तरह चबाना है
यह अहले लखनऊ है कुल्लू मनाली की बर्फ़ नहीं
जो गुड़ के साथ खाना है.
दयानन्द पाण्डेय


दिल्ली छुटी थी पहले अब लखनऊ भी छोड़ें
दो शहर थे ये अपने दोनों तबाह निकले
मिर्ज़ा हादी रुस्वा


Lucknow Quotes in Hindi

हसीन ख़्वाबों के पन्ने मोड़ आया हूँ,
खुशियों की किताब लखनऊ छोड़ आया हूँ.


आज कल हर कोई मुझसे रूठने लगा है,
हर किसी का साथ मुझसे छूटने लगा है,
बेदर्दों की दुनिया में लोगो को मनाते-मनाते
अब तो मेरा पत्थर दिल भी टूटने लगा है.


जब लखनऊ था,
तो खुशियां थी,
नाराजगी थी
थोड़ा गम था.
हसीन शामें थी
दोस्तों का साथ था
रोज पार्टी थी
जबकि जेब में पैसा कम था.


दिल करता है तेरी मोहब्बत में
कुछ ऐसा काम कर दूँ,
मेरी जान तुम कहो तो
पूरा लखनऊ तुम्हारे नाम कर दूँ.


लखनऊ की शाम निराली है,
यहाँ पकाते पुलाव ख्याली है,
सबका जेब तो खाली है
पर हर शख्स यहाँ का नवाबी है.


लखनऊ पर शायरी

नए मिज़ाज के शहरों में जी नहीं लगता
पुराने वक़्तों का फिर से मैं लखनऊ हो जाऊँ
मुनव्वर राना


फिजाओं में आज फिर से खूबसूरती दिखने लगी हैं,
शायद शाम-ए-लखनऊ का आग़ाज़ हो गया है.


बेताबी में हर तरह से बर्बाद रहा
दिल अपना ग़म-ए-दहर से आबाद रहा
फिरता रहा हर शहर में मारा मारा
ऐ लखनऊ तू मुझ को मगर याद रहा
बाक़र मेहदी


ज़मीन-ए-पाक हमारे जिगर का टुकड़ा है
हमें अज़ीज़ है देहली ओ लखनऊ की तरह
तुम्हारे लहजे में मेरी नवा का लहजा है
तुम्हारा दिल है हसीं मेरी आरज़ू की तरह
अली सरदार जाफ़री


लखनऊ नवाब शायरी हिंदी

तुझपर नहीं होता है क्या
प्रदूषणों का असर
मौन है क्यों
कुछ तो बता लखनऊ शहर?
रवीन्द्र प्रभात


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