Inferiority Quotes in Hindi | हीनता पर अनमोल विचार

Inferiority Inferior Quotes in Hindi

Inferiority Inferior Quotes in Hindi – हीनता की भावना असफ़लता का कारण बनती हैं इसलिए अपने मन में, अपने हृदय में कभी भी हीन भावना न रखे. हार-जीत, सुख-दुःख, सफलता-असफ़लता आदि एक सिक्के के दो पहलू हैं यह दोनों पहलू हर किसी के जीवन में आते हैं. जीवन की भावना रखो और नजर लक्ष्य पर रखों.

Inferiority Quotes in Hindi | हीनता पर बेहतरीन विचार

दीनता-हीनता का प्रदर्शन किसी मनुष्य के समक्ष मत करो, वहां से सिवाय उपहास के कुछ न पाओगे, यदि दीन-हीन बनना है तो ईश्वर के समक्ष बनों जो सबका दाता है. – शब्द प्रकाश

हीनता का अनुभव करना ही पाप है. – अज्ञात

हीन भावना मन में आने की वजह ज्ञान की कमी होती हैं. – दुनियाहैगोल

किसी से मेहरबानी मांगना अपनी आज़ादी बेचना है. – महात्मा गांधी

क्या तुम लगड़े हो जो दूसरों का आसरा ताक रहे हो? – अरस्तु

विश्व की समस्त शक्तियां हमारी हैं. हमने अपने हाथ अपनी आँखों पर रख लिए है और चिल्लाते है कि सब ओर अंधेरा है. जान लो कि हमारे चारों ओर अँधेरा नहीं हैं. अपने हाथ अलग करो, तुम्हें प्रकाश दिखाई देगा, जो पहले भी था. अँधेरा कभी नहीं था. कमजोरी कभी नहीं थी. हीनता कभी नहीं थी. हम सब मूर्ख हैं जो चिल्लाते हैं कि हम दीन-हीन हैं, कमजोर हैं, अपवित्र हैं. – महर्षि अरविन्द

खैरात के हलवे से मेहनत की सूखी रोटी मीठी होती हैं. – शेख सादी

वीर बनों, हीन भावना से बड़ी सफ़लता नहीं प्राप्त की जा सकती हैं. – दुनियाहैगोल

हीनता हिंसा से भी हीन होती हैं. – मैथिलीशरण गुप्त

जो पुरूष निरुत्साह, दीन और शोकाकुल रहता है, उसके सब काम बिगड़ जाते है और वह अनेक विपत्तियों में फंस जाता हैं. – वाल्मीकि रामायण

मनुष्य को कोई ऐसा काम नहीं करना चाहिए, जिससे वह स्वयं को छोटा और हीन समझने लगे. – संत ज्ञानेश्वर

किसी के कृपाभाजन होने से ईर्ष्या का पात्र होना अधिक अच्छा है. – अज्ञात

अगर कोई आदमी अपने को कीड़ा बना ले तो पद दलित होने पर उसे शिकायत का हक़ नही हैं. – केंट

मनुष्य तभी तक सर्वोत्तम, सर्वगुण सम्पन्न और सर्वपूज्य बना रहता है, जब तक वह दुसरे से सामना नहीं करता. – ब्रह्मपुराण

कीड़ों को रौंदने और शहंशाह के आगे गिड़गिड़ाने से घृणा कर. – शेख सादी

जब इंसान खुद को पहचान लेता है, अपनी शक्तियों को पहचान लेता हैं और जब वह अपने अंदर के ईश्वर को जान लेता हैं तो वह दीन-हीन भावना से कभी नहीं ग्रसित होता हैं. – अज्ञात

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