दुष्यंत कुमार के शायरी | Dushyant Kumar Shayari in Hindi

Dushyant Kumar

Dushyant Kumar Shayari in Hindi, Motivational Shayari in Hindi – इस पोस्ट में दुष्यंत कुमार की बेहतरीन शायरी दी गयी हैं. इन शायरी को जरूर पढ़े. यह शायरी दुष्यंत कुमार के गजलों और कविताओं के दो लाइन हैं. Dushyant Kumar की ये शायरी आपके दिल छू लेंगे.

Dushyant Kumar Shayari in Hindi | दुष्यंत कुमार की बेहतरीन शायरी

कैसे मंजर सामने आने लगे हैं,
गाते-गाते लोग चिल्लाने लगे हैं.


इस नदी की धार में ठंडी हवा आती तो हैं,
नाव जर्जर ही सही, लहरों से टकराती तो हैं.


परिंदे अब भी पर तोले हुए हैं,
हवा में सनसनी घोले हुए हैं.


फिर धीरे-धीरे यहाँ का मौसम बदलने लगा है,
वातावरण सो रहा था अब आँख मलने लगा है.


कहाँ तो तय था चिरागाँ हरेक घर के लिए,
कहाँ चिराग़ मयस्सर नहीं शहर के लिए.


ये सारा जिस्म झुककर बोझ से दुहरा हुआ होगा,
मैं सजदे में नहीं था, आपको धोखा हुआ होगा.


हो गई है पीर पर्वत -सी पिघलनी चाहिए,
इस हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए.


आज सड़को पर लिखे हैं सैकड़ो नारे न देख,
घर अँधेरा देख तू , आकाश के तारे न देख.


मरना लगा रहेगा यहाँ जी तो लीजिये,
ऐसा भी क्या परहेज, जरा-सी तो लीजिये.


मत कहो, आकाश में कुहरा घना हैं,
यह किसी की व्यक्तिगत आलोचना हैं.


अगर ख़ुदा न करे सच ये ख़्वाब हो जाए,
तेरी सहर में मेरा आफ़ताब हो जाए.


ये सच है कि पाँवों ने बहुत कष्ट उठाए,
पर पाँव किसी तरह राहों पे तो आए.


ये धुएँ का एक घेरा कि मैं जिसमें रह रहा हूँ,
मुझे किस कदर नया है, मैं जो दर्द सह रहा हूँ.


वो आदमी नहीं है मुकम्मल बयान है,
माथे पे उसके चोट का गहरा निशान हैं.


एक गुड़ियाँ की कई कठपुतलियों में जान है,
आज शायर, ये तमाशा देखकर हैरान है.


तुम्हारे पाँवों के नीचे कोई जमीन नहीं,
कमाल ये है कि फिर भी तुम्हे यकीन नहीं.


अब किसी को भी नजर आता नहीं कोई दरार,
घर की हर दीवार पर चिपके है इतने इश्तहार .


अफ़वाह है या सच है ये कोई नहीं बोला,
मैंने भी सुना है अब जाएगा तेरा डोला.


जाने किस-किस का ख्याल आया है,
इस समन्दर में उबाल आया है.


ये जुबां हमसे सी नहीं जाती,
जिन्दगी है कि जी नहीं जाती.


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