चरण छूने के फायदें | प्रणाम करने के फायदें

Benefits of Touching Feet of Elders in Hindi – व्यक्ति अपने जीवन में बहुत से ऐसे कार्य करता है जिसके बारें में कुछ नहीं जानता है या तो बहुत कम जानता है. चरण छूकर प्रणाम करना एक भारतीय परम्परा है. बहुत लोग चरण छूकर प्रणाम करना पसंद करते है तो बहुत लोग नहीं पसंद करते है. कुछ लोग ऐसे भी होते है अगर उनका पैर छू लो तो वो गुस्सा हो जाते है. बहुत लोग इसे रूढ़िवादी परम्परा मानते है.

मेरा स्वयं का मत है कि पैर छूने या प्रणाम करने से कई लाभ मिलते है. अगर आप सकारात्मक दृष्टि कोण रखेंगे तो आपको अच्छाई नजर आएगी। अगर आप नकारात्मक दृष्टिकोण रखेंगे तो आपको बुराई नजर आएगी। दुनिया के हर सजीव, निर्जीव और विचार में कुछ अच्छाई तो कुछ बुराई जरूर मिलेगी। सिर्फ और सिर्फ आपका अपना दृष्टिकोण महत्वपूर्ण होता है. आपके विचार और दृष्टिकोण ही आपको सफल और असफल बनाते है. फिलहाल इन बातों को छोड़ते है. अगर आप पैर छूने और प्रणाम करने के संस्कार और परम्परा को मानते है तो इसके फायदें के बारें में जरूर पढ़े.

चरण छूने के फायदें

उम्र में छोटा व्यक्ति उम्र में बड़े व्यक्ति को प्रणाम करता है. रिश्तें में जो बड़ा होता है उसे प्रणाम किया जाता है. ज्ञान में जो बड़ा होता है उसे प्रणाम किया जाता है. जो गुरू होता है उसे प्रणाम किया जाता है. कई बार स्वार्थ वश लोग प्रणाम करते है. कई बार निःस्वार्थ भाव से प्रणाम करते है. और भी कई प्रकार के प्रणाम होते है लेकिन पैर छूकर प्रणाम करने का परिणाम लाभ ही होता है. आइये इन लाभों को जानने का प्रयास करते है –

  1. जब आप किसी का चरण छूकर प्रणाम करते है तो आप उस व्यक्ति को सम्मान देते है. फिर वह व्यक्ति आपको उसके बदले में आशीर्वाद के रूप में सम्मान देता है. वह कहता है “खुश रहो” या “ईश्वर आपकी मनोकामना पूर्ण करे“. इसका अर्थ यह हुआ कि आप दोनों के बीच में सकारात्मक ऊर्जा का आदान-प्रदान हुआ. इसका प्रत्यक्ष रूप से कोई प्रभाव नहीं दिखता है लेकिन अप्रत्यक्ष रूप से इसका लाभ मिलता है.
  2. आप किसी के चरण छूकर तभी प्रणाम करते है जब उस व्यक्ति के प्रति आपके मन में प्रेम, सम्मान, स्नेह की भावना होती है. ऐसी भावनाएं हृदय में सकारात्मक विचार उतपन्न करती है जो आपको ऊर्जावान बनाती है.
  3. चरण छूकर प्रणाम करने से जीवन में विनम्रता आती है. हृदय से अहंकार की भावना का नाश हो जाता है.
  4. जिस प्रकार आप “हेलो” और “गुड मॉर्निंग” बोलकर अपने बात की शुरूआत करते है. ठीक उसी प्रकार भारतीय संस्कृति में में “चरण छूकर” या “प्रणाम” करके बात या मुलाक़ात की शुरूआत करते है. चरण छूकर प्रणाम करना एक मौन संवाद है, जो बहुत कम बोलकर बहुत कुछ कह देता है.
  5. चरण छू कर प्रणाम करने में हर व्यक्ति को झुकना पड़ता है. इस झुकाव में एक प्रकार का व्यायाम भी है. इसमें आपके शरीर का रक्त प्रवाह आपके सिर की तरफ होता है. यह स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होता है.
  6. मैंने अपने घर में सुना है कि 24 घंटे में एक बार हमारी जिभ्वा पर सरस्वती विराजमान होती है. उस वक़्त इंसान की कही बातें सत्य हो जाती है. इसलिए अपने बारें में या किसी के बारें में कुछ बुरा न सोचे और न कहे. जब किसी बड़े का चरण छू कर प्रणाम करते है और वो आशीर्वाद देते है. हो सकता है उस वक़्त उनके जिभ्वा पर सरस्वती माँ का वास हो. उनकी बात सत्य हो जाए. इसलिए बड़ो को, विद्वान को, सज्जन व्यक्ति को जरूर प्रणाम करें.
  7. भारतीय शास्त्रों में कहा गया है कि प्रतिदिन माँ-बाप और गुरू के पैर छू कर आशीर्वाद लेने से आयु, विद्या, यश और बल में वृद्धि होती है.
  8. कुछ लोग तर्क देते है कि अच्छे व्यक्ति का चरण स्पर्श करना चाहिए और बुरे व्यक्ति का नहीं. सर्वप्रथम अच्छे और बुरे व्यक्ति की पहचान करना मुश्किल है. दूसरी बात सबमें कुछ अच्छाई और कुछ बुराई होती है. इसलिए ऐसी नकारात्मक बातों को मत सोचिये. अगर कोई बुरा व्यक्ति भी है और उससे आपने कुछ सीखा है या वो आपका रिश्तेदार है तो जरूर प्रणाम करें. क्योंकि हर इंसान में ईश्वर का अंश छिपा होता है. उस ईश्वर कर प्रणाम करिए. सकारात्मक विचार रखकर प्रणाम करेंगे तो यकीन मानिए उसके परिणाम सकारात्मक ही आयेंगे.
  9. जो आप अपने जीवन में करते है वही आपके बच्चे वही सीखते है. अगर आप अपने पिता के चरण छू कर आशीर्वाद लेंगे तो जब आपका बेटा बड़ा होगा तो वह आपके चरण छू कर आपसे आशीर्वाद लेगा। मेरी समझ से यह एक अच्छा संस्कार है जो हर भारतीय युवा में होना चाहिए। पुत्र के हृदय में पिता के प्रति सम्मान की भावना होना अच्छी बात है.

कब चरण नही छूने चाहिए?

जब किसी के घर में उसके किसी परिवार की मृत्यु हो जाये तो वह परिवार शोक में होता है, दुःख में होता है. ऐसे समय में उस परिवार के किसी सदस्य का चरण छूकर प्रणाम नहीं किया जाता है. क्योंकि उस समय उस परिवार के सभी सदस्य के मनोभाव में दुःख और शोक होता है. ऐसे वक़्त में मौन रहना और शांति बनाये रखना ही उत्तम होता है.

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मान लीजिये उस शोक सभा में आपके गुरू पहुँच गये तो उनके भी पैर को नही छूना चाहिए क्योंकि सभी के मनोभाव में दुःख और शोक होगा। किसी के मनोभाव में कम होगा तो किसी के मनोभाव में ज्यादा होगा।

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