संविधान दिवस पर कविता | Constitution Day Poem in Hindi

संविधान दिवस पर कविता | Constitution Day Poem in Hindi – संविधान दिवस प्रति वर्ष 26 नवम्बर को मनाया जाता है. इसे क़ानून दिवस के नाम से भी जाना जाता है. इस आर्टिकल में बेहतरीन संविधान दिवस पर कविता जरूर पढ़े.

डॉ. भीम राव अम्बेडकर को भारतीय संविधान का निर्माता कहा जाता है. लेकिन इसे बनाने और भी कई लोग को महत्वपूर्ण योगदान रहा. भारतीय संविधान लिखने वाली सभा में 299 सदस्य थे. इसके अध्यक्ष डॉ. राजेन्द्र प्रसाद थे. संविधान को पूर्ण रूप से तैयार करने में 2 वर्ष, 11 महीने और 18 दिन लगे थे.

संविधान को इस तरह से बनाया गया है कि अमीरी और गरीबी की खाई को मिटाया जा सके. गरीबों को न्याय मिल सके. बिना किसी भेदभाव के सब साथ-साथ विकास कर सके. संविधान की कमियों का और संविधान के रखवालों के लालच का फायदा उठाकर कई लोग इसका गलत इस्तेमाल भी करते है. क़ानून और नियम बदलते रहते है जिससे उन कमियों और खामियों को दूर किया जाता है. सबके साथ न्याय हो. ये सुनिश्चित किया जाता है.

पढ़े-लिखे लोग ही संवैधानिक पदों पर होते है. अधिकारी बनते है. जिन्हें भारत का संविधान बहुत ताकत देता है. शिक्षित लोगो की जिम्मेदारी है कि वे गरीबों की उन्नति, न्याय और सुरक्षा को सुनिश्चित करें. आज भी कई बार सुनने में आता है कि सत्ता में बैठे लोग क़ानून का प्रयोग अपने फायदें के लिए करते है.

संविधान दिवस पर कविता | Constitution Day Poem in Hindi

Samvidhan Divas Par Kavita
Samvidhan Divas Par Kavita | संविधान दिवस पर कविता | Constitution Day Poem in Hindi
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संविधान ही इस देश को चलाता है,
संविधान ही बुराई को डराता है,
संविधान सबको समान अधिकार देता है,
संविधान सबको समान प्यार देता है.

संविधान को दिन-रात
मेहनत करके बनाया गया है,
कोई कमी ना रह जाएँ
इस तरह से सजाया गया है.

क़ानून हमेशा न्याय की बात करता है,
अन्याय को जड़ से खत्म करता है,
जब क़ानून के रखवाले बेईमान होते है,
तब गुनहगार बड़ी चैन से सोते है.

क़ानून समय-समय पर बदलता रहता है,
इंसान ही इंसान को छलता रहता है,
गुनहगारों के लिए शामत है,
क़ानून आज भी गरीबों की ताकत है.

क़ानून को जो हाथ में लेता है,
उसे हथकड़ी लग जाती है,
जो क़ानून से खेलता है,
वो जेल में रोटी तोड़ता है.

पढ़े-लिखे लोग ही क़ानून को कमजोर बनाते है,
पैसे के जोर से सच के आवाज को दबाते है,
बुराई का बादल कुछ समय में छट जाता है,
जब कोई मसीहा सूरज बनकर आता है.

संविधान ही इस देश को चलाता है,
संविधान ही बुराई को डराता है,
संविधान सबको समान अधिकार देता है,
संविधान सबको समान प्यार देता है.


Poem on Constitution Day in Hindi

अगर गुनहगार किसी राजनेता के घर से है या किसी अमीर आदमी के घर से है तो गरीबों को न्याय पाने के लिए अपना सब कुछ दाव पर लगाना पड़ता है. कई बार न्याय नही मिलता है. कई बार पैसे के लालच में गरीब अन्याय सह लेता है. अगर बड़ी हिम्मत करके कानूनी लड़ाई लड़ता है तो कई वर्षों बाद उसे न्याय मिलता है. इसी दर्द को इस कविता में दर्शाया गया है. आशा करता हूँ कि आपको यह कविता पसंद आएगी.

मोबाइल पर व्यस्त हर बंदा है,
आज के दौर में क़ानून अँधा है,
राजनीति का खेल बड़ा ही गंदा है,
पर कोई क्या करें यही धंधा है.
गरीब पूरे जीवन अन्याय सहेगा,
अपने जुबान से कुछ नही कहेगा,
जिसके पास खाने के पैसे न हो
वो कोर्ट में केस कैसे लड़ेगा.
पुलिस भी बिक जाती है,
वकील भी बिक जाता है,
जज भी बिक जात है,
कानून भी बिक जाता है,
गरीब की औकात कहाँ
जो इन्हें खरीद पाता है.
न्याय की चाह में
गरीब मरते है,
गरीबों के साथ न्याय
ईश्वर करते है.


Samvidhan Divas Par Kavita

गरीबों को न्याय दिलाएगा कौन,
उनके अधिकार को बताएगा कौन,
अपराधियों को डराएगा कौन,
संविधान को बचाएगा कौन.

जो ईमानदार है वही न्याय दिलाएगा,
गरीबों के अधिकार को वही बतायेगा,
वही अपराधियों को डराएगा
वही संविधान को बचाएगा.

इस तरह से शुरू यह अध्याय होता है,
गरीबों के साथ ज्यादातर अन्याय होता है,
ईमान अपने नजरों में गिर जाएँ
संविधान चंद रूपयों में बिक जाएँ
तब गरीबों को न्याय कौन दिलाएगा,
कौन मसीहा इनकी किस्मत बदल पायेगा.

जब गरीबों को इन्साफ कोई नही दिला पायेगा,
तब उन्हें इन्साफ दिलाने स्वयं खुदा आएगा.
उसके कहर से कौन बच पायेगा,
उसकी कृपा से मुरझाया हुआ फूल भी खिल जाएगा.


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