मुनिश्री तरूण सागर जी महाराज के अनमोल विचार | Muni Shri Tarun Sagar Ji Maharaj Quotes

Tarun Sagar Ji Maharaj Quotes in Hindi

Muni Shri Tarun Sagar Ji Maharaj Quotes in Hindi – तरुण सागर जी महाराज एक दिगम्बर मुनि थे. इनकी कही बातें दवा के समान कड़वी तो जरूर है पर यह जीवन दायिनी का काम करती हैं. इस पोस्ट में इनके दिए अनमोल विचारों को जरूर पढ़े.

Best Quotes of Jain Munishri Tarun Sagar Ji Maharaj Quotes | जैन मुनिश्री तरुण सागर जी महाराज की सुविचार

वैसा मजाक किसी के साथ मत कीजिये जैसा मजाक आप सह नहीं सकते!

जिन्दा रहने के लिए भोजन जरूरी है. भोजन से भी ज्यादा पानी जरूरी हैं, पानी से भी ज्यादा वायु जरूरी है और वायु से भी ज्यादा आयु जरूरी है मगर मरने के लिए कुछ भी जरूरी नहीं हैं. आदमी यों ही बैठेबैठे मर सकता हैं. आदमी केवल दिमाग की नस फटने और दिल की धड़कन रूकने से नहीं मरता बल्कि उस दिन भी मर जाता है जिस दिन उसकी उम्मीदें और सपने मर जाते हैं; उसका विश्वास मर जाता है. इस तरह आदमी मरने से पहले भी मर जाता हैं और फिर मरा हुआ आदमी दुबारा थोड़े न मरता हैं.

संघर्ष के बिना मिली सफलता को संभालना बड़ा मुश्किल होता हैं!

पैर से अपाहिज एक भिखारी सदा प्रसन्न और खुश रहता था. किसी ने पूछा अरे भाई ! तुम भिखारी हो, लंगड़े भी हो, तुम्हारे पास कुछ भी नहीं हैं, फिर भी तुम इतने खुश रहते हो. क्या बात हैं? वह बोला : बाबूजी! भगवान् का शुक्र है कि मैं अँधा नहों हूँ. भले ही मैं चल नहीं सकता, पर देख तो सकता हूँ. मुझे जो नहीं मिला – मैं उसके लिए प्रभु से कभी कोई शिकायत नहीं करता बल्कि जो मिला है, उसके लिए धन्यवाद जरूर देता हूँ. यहीं है दुःख में से सुख खोजने की कला.

अमीर होने के बाद भी यदि लालच और पैसों का मोह है, तो उससे बड़ा गरीब और कोई नहीं हो सकता है। प्रत्येक व्यक्ति ‘लाभ’ की कामना करता है, लेकिन उसका विपरीत शब्द अर्थात ‘भला’ करने से दूर भागता है!

शादी के समय सिर्फ यही एक संकल्प लेना चाहिए कि मैं आग बनूँ तो तू पानी बन जाना और तू अंगार बनेगी तो मैं जलधार बन जाऊँगा.

सच्ची नींद और सच्चा स्वाद चाहिए तो पसीना बहाना मत भूलिए, बिना पसीना की कमाई पाप की कमाई हैं.

सम्राट सिंकदर के भी पूरे 100 नहीं हुए तो फिर तुम किस खेत की मूली हो? तुम तो मूली भी बहुत ‘मामूली’ हो.
– एक व्यक्ति ने पूछा : मुनिश्री ! आपका एड्रेस? मैंने कहा : भाई! जिसकी ‘ड्रेस’ ही नहीं उसका ‘एड्रेस’ कहाँ से होगा. दिगम्बर जैन मुनि “विदाउट-ड्रेस” और “विदाउट-एड्रेस” होता हैं. संत-मुनि का अपना कोई घर नहीं होता है. वह तो भक्तों के दिलों में वास करता है. यह कितना बड़ा आश्चर्य है कि जिनका अपना कोई ‘पता’ नहीं है, वही लोगों को उनकी जिन्दगी की असली मंजिल का ‘पता’ बताते हैं.

उस अर्थी से अपनी मृत्यु का बोध ले लेना, क्योंकि दूसरों की मौत तुम्हारे लिए एक चुनौती है. अर्थी उठने से पहले जीवन का अर्थ समझ लेना, वरना बड़ा अनर्थ हो जाएगा. वैसे गधे को कभी नहीं लगता कि उसका जीवन व्यर्थ हैं.

जीवन एक युद्धक्षेत्र है. तुम सब योद्धा हो. यहाँ हर किसी को जीवन से लड़ना होता है. जीवन में मुसीबतें भी आती हैं. उनसे लड़ना सीखो. मुसीबतों के सामने झुकने और घुटने टेकने से काम नहीं चलेगा. जीवन में आई चुनौतियां भी एक चुनाव हैं.

क्रोध इंसान का सबसे बड़ा दुश्मन है. क्रोध एक बार दिमाग पर हावी हो गया तो दीवाला निकालकर ही दम लेता है. क्रोध जहाँ है, वहाँ दीवाली कैसी? वहाँ तो दीवाला ही होगा.