साध्वी ऋतंभरा के अनमोल विचार | Sadhvi Ritambhara Quotes in Hindi

Sadhvi Ritambhara Quotes in Hindi

Didi Ma – Sadhvi Ritambhara Quotes in Hindi – इस पोस्ट में दीदी माँ – साध्वी ऋतंभरा जी के अनमोल विचार दिए हुए हैं. इन बहुमूल्य विचारों को Sadhvi Ritambhara के ट्विटर अकाउंट से लिया गया हैं. इन विचारों से आपके जीवन को एक नया आयाम मिल सकता हैं. इन विचारों को जरूर पढ़े.

दीदी माँ – साध्वी ऋतंभरा के अनमोल विचार | Didi Ma – Sadhvi Ritambhara Quotes

कल्पनाओं में सबसे पवित्र कल्पना तो ईश्वर का विचार हैं, हम जितना ईश्वर का विचार करते हैं. मन के साथ हमारें संघर्ष उतने ही कम होते हैं. – साध्वी ऋतंभरा

बच्चा संस्कारी होता है अपनी माँ को देखकर. माँ ही बच्चें के लिए वह केंद्र बिंदु होती हैं, जिसके चारो ओर वह घूमता हैं.– Sadhvi Ritambhara

श्वासों की पूँजी जिनके हाथों में है उन्होंने जीवन की धन्यता को जाना हैं.– दीदी माँ : साध्वी ऋतंभरा

दृढ़ता का घनीभूत प्रवाह अपने सामने आने वाली तमाम चुनौतियों को तिनकों की तरह उड़ाता चला जाता हैं.– Didi Ma : Sadhvi Ritambhara

चढ़ता है तूफ़ान, तो कभी उतरता है… मानव तू परिवर्तन से काहे को डरता हैं.

जिसके हृदय में ये जाग गया कि मुझे परम सत्य को जानना है, मुझे अपने ही अंतर में उतरकर सत्य की खोज करना हैं, उसका जीवन धन्य हैं.– साध्वी ऋतंभरा

ध्यान साधना की गहराई धरा को बदलने की शक्ति रखती हैं.– Sadhvi Ritambhara

संत का मिलन निश्चित रूप से जीवन में परमानन्द का प्रसाद हो जाता हैं. – दीदी माँ : साध्वी ऋतंभरा

नन्हें बच्चों को संस्कारों और प्यार से सिंचित करना – यानि वर्तमान को हाथ में लेना ताकि भविष्य सुंदर हो. – Didi Ma : Sadhvi Ritambhara

जो बटोरा जाता है वो विषाद होता हैं और जो बाँटा जाता है वो प्रसाद होता हैं.

संसार के सारे नाते ख़ूबसूरत हो जाते हैं जब हम सबसे पहला नाता अपने ईश्वर के साथ जोड़ते हैं, सद्गुरू के साथ जोड़ते हैं. – साध्वी ऋतंभरा

परमात्मा को अगर जानना हो तो प्यार के गहरे सागर में डुबकी लगानी होगी. – Sadhvi Ritambhara

कंकड़ बनने पर भी मन में निराशा नहीं आने देना चाहिए क्योंकि मन्दिर के शिखर भले ही न बने नींव का पत्थर तो बन ही सकते हैं. – दीदी माँ : साध्वी ऋतंभरा

सब जिसमें हैं, सब जिससे हैं, जो सब है और जो सब ओर है, जो सबमें हैं. उन सर्वात्मा को प्रणाम करते हैं. – Didi Ma : Sadhvi Ritambhara

छोटी छोटी चीजों का गुलाम आदमी परम प्राप्ति कर नहीं सकता, इसलिए पहले मन से मुक्त होइए.

हमारे शास्त्रों का यही सार रहा है कि शक्ति ही जीवन है, दुर्बलता ही मृत्यु हैं. – साध्वी ऋतंभरा

मनुष्य अभिमान त्याग कर ही सबका प्रिय होता हैं, क्रोध त्याग कर पछतावा नहीं होता, काम त्याग कर अर्थवान होता हैं, लोभ त्याग कर सुखी होता हैं. – Sadhvi Ritambhara

हे देव, अपने तेजस और तपस से हमें परिपूर्त कीजिये ताकि हम आपका ये प्रकाश वहाँ ले जा सकें जहाँ अभी भी अज्ञान और अशिक्षा का अँधियारा हैं. – दीदी माँ : साध्वी ऋतंभरा

किसी भी प्रलोभन, स्वार्थ, समृद्धि, उन्नति को प्राप्त करने के लिए अपने संस्कारों का गला घोंट कर विवेक का दंश नहीं सहना हैं. – Didi Ma : Sadhvi Ritambhara

हौसला हार के तू हार की कीमत न घटा, धर के मझदार से पतवार की कीमत न घटा, अपनी मजबूरियों से अश्क बहाने वाले, दर्द से ऊब कर तू प्यार की कीमत न घटा.

अगर हमें अपने जीवन की बुराई एक बार दिखाई भर दे जाए और हम उसे स्वीकार कर लें तो फिर वो टिक नहीं सकती. – साध्वी ऋतंभरा

किस परम्परा का कितना पालन करना है कितना छोड़ना है, इसे जानने के लिए बहिर्मुखी नहीं अन्तर्मुखी होना हैं. – Sadhvi Ritambhara

मनुष्य अपना बल और विश्वास भगवान को सौंप देता है तो उनमें से महाशक्ति का जन्म होता हैं. – दीदी माँ : साध्वी ऋतंभरा

शक्ति ही शन्ति का आधार हैं. – Didi Ma : Sadhvi Ritambhara

यदि जानना है अपने को जानो, यदि मानना है प्रभु को मानो.

साधना केवल आत्मकल्याण ही नहीं करती बल्कि वह साधक को अनुकरणीय भी बना देती हैं.– साध्वी ऋतंभरा

सद् विचारों के साथ सन्मार्ग पर चलते हुए हम ऐसे सत्कर्म अवश्य करें कि हमारे जीवन ‘उल्लास’ और मृत्यु ‘उत्सव’ बन जाएँ.– Sadhvi Ritambhara

बच्चे तुलसी के पौधे के समान होते हैं, जिन्हें संस्कारों के गंगा जल से सींचा जाना चाहिए. – दीदी माँ : साध्वी ऋतंभरा

थोड़ी देर का आनन्द तो आप कहीं भी ले सकते हो, किन्तु सच्चा आनन्द तो गुरू चरणों में ही मिलता हैं. – Didi Ma : Sadhvi Ritambhara

माला मनका छोड़ के अब तो घर घर अलख जगाओ, चन्दन कुमकुम तज मस्तक पर रज भारत की लगाओ.

जो गुरू के हाथों मिटने और बनने को तैयार है, वहीं शिष्य होता हैं. – साध्वी ऋतंभरा

ध्यान योग का महत्वपूर्ण अंग है जो तन, मन और आत्मा के बीच सम्बन्ध बनाता हैं. – Sadhvi Ritambhara