मेरे अपने शायरी | Mere Apne Shayari By Saurabh Mishra Hind

Mere Apne Shayari By Saurabh Mishra Hind – यह आर्टिकल सब रस युवा कवि सौरभ मिश्रा हिन्द द्वारा लिखा गया है, जिसमें उन्होंने माँ, पिता, भाई, बहन, पत्नी व मित्र के बारे में अपने सुंदर भावनाओं को व्यक्त किया है. आशा करता हूँ आपको इनकी ये रचनाएँ पसंद आएँगी।

मेरे अपने शायरी – माँ

Mere Apne Shayari Maa
Mere Apne Shayari Maa | मेरे अपने शायरी – माँ

क्या होती है ममता, वो माँ का अर्थ बताने आई है ।
माँ सिर्फ शब्द नही सम्बन्ध नही, वो ईश्वर की एक परछाई है ।।
अपनी संतान में ही संसार को देखे ।
माँ स्वार्थ नही बस प्यार को देखे ।।
सबसे बड़ी योद्धा होती है, वो हारने वाली नही होती ।
माँ की झोली अपने बच्चों के लिए, कभी खाली नही होती ।।
सौरभ मिश्रा हिंद


मेरे अपने शायरी – पिता

Mere Apne Shayari Pita
Mere Apne Shayari Pita | मेरे अपने शायरी – पिता

भरी नजरें थका चेहरा ,
कोई है भाव छिपा गहरा ।
खुद के रहते दुख क्या, कोई भार नही सहने देते ,
दर्द दबा कर रखते हैं, कभी अश्क़ नही बहने देते ।।
उन बिन जीवन मे जीवन का, कोई मान नही होता ।
पिता बनना भी जीवन मे, आसान नहीं होता ।।
सौरभ मिश्रा हिन्द


मेरे अपने शायरी – भाई

Mere Apne Shayari Bhai
Mere Apne Shayari Bhai

मेरे हर ग़मो के दरिया को, वो पार करता है ,
परेशानी जब भी पुछु, तो इनकार करता है ।
हर मुश्किल आसा कर जाता, कैसे कह दूं खोटा है ,
कर्तव्यों में बड़ा है मुझसे, कहने को वो छोटा है ।।
– सौरभ मिश्रा हिन्द


मेरे अपने शायरी – बहन

Mere Apne Shayari Bahan
Mere Apne Shayari Bahan | मेरे अपने शायरी – बहन
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लब्ज नहीं खोलती अपने, भाई के हर मुश्किल को वो सहन करती है ।
कहने को भाई रक्षक है बहना का, पर सच मे तो रक्षा बहन करती है ।।
भाई के जीवन का, वो जरूरी गहना होती है ।
जब दुनिया मुह मोड़ लेती है, तब साथ बहना होती है ।।
– सौरभ मिश्रा हिन्द


मेरे अपने शायरी – पत्नी

Mere Apne Shayari Patni

चाह नही धन यश की, वो पति का साथ चाहती है ।
प्रेम मय जीवन, सौभाग्य मय दिन रात चाहती है ।।
ईश्वर को भी लाल बनादे, असम्भव को सम्भव कर जाती है ।
अगर पत्नी अपने पर आ जाए, तो वो यमराज से लड़ जाती है ।।
– सौरभ मिश्रा हिन्द


मेरे अपने शायरी – मित्र

Mere Apne Shayari Mitra

जब बुरा वक़्त आया मेरा, उस पल भी वो मेरे साथ रहा ।
अपनों से था दूर बहुत, पर दिल के सबसे पास रहा ।।
आशाएं थी अपनों से जितनी, सारी ही चकनाचूर हुईं ।
लेकिन एक वही उम्मीद, वही मेरी हर आश रहा ।।
– सौरभ मिश्रा हिन्द


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