Ignorance Quotes in Hindi | Agyan Quotes | अज्ञान पर अनमोल विचार

Ignorance Agyan Quotes in Hindi

Ignorance Quotes in Hindi ( Agyan Quotes in Hindi ) – इस पोस्ट में अज्ञानता पर बेहतरीन विचार और कोट्स दिए गये हैं. इन कोट्स को जरूर पढ़े.

Ignorance Quotes in Hindi | New Agyan Quotes | इग्नोरेंस कोट्स | अज्ञान पर अनमोल विचार

जहाँ अज्ञान है, वहां दुःख आकर ही रहेगा. – अरविंद

जहां अज्ञानता का बखान हो रहा हो, वहां बुद्धिमानी दिखाना भी मूर्खता हैं. – बाल गंगाधर तिलक

जितना हम अध्ययन करते हैं, उतना ही हमको अपने अज्ञान का आभास होता है. – स्वामी विवेकानन्द

अज्ञान ही पाप है, शेष तो उसकी छाया मात्र हैं. – ओशो

अज्ञान के समान दूसरा कोई बैरी नहीं. – चाणक्य

अज्ञान प्रकाश को जाग्रत नहीं कर सकता, लेकिन घृणा तो ज्ञान के प्रकाश को भी बुझा देती हैं. – रवीन्द्रनाथ ठाकुर

अज्ञान की दासता से मृत्यु श्रेयस्कर है. संतोष से बढ़कर कोई सुख नहीं और धैर्य से बड़ी शक्ति नहीं. – सत्य साईं बाबा

अज्ञान अन्धकार स्वरूप हैं. दीया बुझाकर भागने वाला यही समझता है कि दुसरे उसे देख नहीं सकते, तो उसे यह भी समझ रखनी चाहिए कि वह ठोकर खाकर गिर भी सकता हैं. – रामचंद्र शुक्ल

अज्ञानी के लिए मौन से श्रेष्ठ कुछ नहीं और यदि यह युक्ति वह समझ ले तो अज्ञानी न रहे. – शेख सादी

अज्ञान प्रभु का श्राप है. ज्ञान वह पंख है, जिससे हम स्वर्ग में उड़ते हैं. – शेक्सपीयर

अज्ञान से मुक्त होकर भी हम पाप से मुक्त हो सकते हैं. अज्ञान दुःख का कारण है, जिसका फल पाप हैं. – स्वामी विवेकानन्द

अपनी अज्ञानता का अहसास होना बुद्धिमता का पहला लक्षण हैं. – इमर्सन

अज्ञान से बड़ा शत्रु कोई नहीं. – शंकराचार्य

अज्ञानता ऐसी अँधेरी रात है जिसमें न चाँद आता हैं न सितारे. – महात्मा विदुर

मूर्ख का मन ज्ञान में नहीं अज्ञान में लगता हैं. – लेनिन

अज्ञान किसी भी जनतांत्रिक सरकार को, पशुओं द्वारा चुनी हुई, पशुओं की लिए, पशुओं की सरकार बना देती हैं. – आचार्य कृपलानी

अज्ञान एक ऐसा काँटा है, जो चुभने के बाद किसी दुसरे को नहीं दिखता, लेकिन जिसको चुभता है, उसे हमेशा परेशान करता रहता हैं. – आद्य शंकराचार्य

लक्ष्यहीन चिन्तन, श्रद्धा रहित नमन एवं विश्वासहीन बंदना मात्र आडम्बर ही है. – महात्मा गांधी

मनुष्य की अज्ञानी ग्रंथी का नष्ट होना ही मोक्ष कहा जाता हैं. – वेदव्यास

वह सर्वश्रेष्ठ मूर्ख है जो संसार को सुखसागर मानता हैं. – समर्थ रामदास

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