Firaq Gorakhpuri Biography | मशहूर उर्दू शायर फ़िराक गोरखपुरी की जीवनी

Firaq Gorakhpuri

Firaq Gorakhpuri Biography in Hindi – फ़िराक गोरखपुरी की पूरी जीवनी, उनकी बेहतरीन रचनाएँ, सम्मान-पुरस्कार और उनकी बेहतरीन शायरी के लिए इस पोस्ट को जरूर पढ़े.

फ़िराक गोरखपुरी उर्दू भाषा के प्रसिद्ध रचनाकार हैं. इनका मूल नाम रघुपति सहाय था. फ़िराक का पूरा नाम ‘रघुपति सहाय फ़िराक’ था. शायरी में अपना उपनाम ‘फ़िराक’ लिखते थे.

Firaq Gorakhpuri Biography in Hindi | फ़िराक गोरखपुरी की जीवनी

नाम – रघुपति सहाय ( Raghupati Sahay )
पूरा नाम – रघुपति सहाय फ़िराक
मशहूर नाम – फ़िराक गोरखपुरी ( Firaq Gorakhpuri )
जन्म – 28 अगस्त, 1896
जन्म स्थान – गोरखपुर, उत्तरप्रदेश, भारत
राष्ट्रीयता – भारतीय
शिक्षा – एम. ए. (अंग्रेजी में)
कार्यक्षेत्र – इलाहाबाद विश्वविद्यालय
भाषा – उर्दू, हिंदी और अंग्रेजी
उल्लेखनीय काम – गुल-ए-नगमा ( Gul-e-Naghma )
अवार्ड – पद्मभूषण, ज्ञानपीठ अवार्ड, साहित्य अकादमी फ़ेलोशिप
मृत्यु – 3 मार्च, 1982 ( उम्र 85 )
मृत्यु स्थान – नई दिल्ली, भारत

इनका जन्म 28 अगस्त, 1896 गोरखपुर, उत्तरप्रदेश के कायस्थ परिवार में हुआ. इन्हें प्रातीय सिविल सेवा (पी.सी.एस.) और भारतीय सिविल सेवा (आई.सी.एस.) के लिए चुना गया था, लेकिन उन्होंने महात्मा गांधी के असहयोग आन्दोलन के दौरान नौकरी से इस्तीफ़ा दे दिया और आन्दोलन में पूर्ण सहयोग किये, जिसके लिए वह जेल गये. बाद में, उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय में अग्रेजी साहित्य के लेक्चरर के रूप में कार्य किये.

फ़िराक गोरखपुरी से सम्बन्धित अन्य तथ्य | Other Points related to Firaq Gorakhpuri

  1. 21 जून, 1914 को उनका विवाह किशोरी देवी से हुआ.
  2. फ़िराक जी ने अपने साहित्यिक जीवन का श्रीगणेश गजल से किया था.
  3. 1920 में नौकरी छोड़ दी तथा स्वराज्य आन्दोलन में कूद पड़े और डेढ़ वर्ष जेल की सजा भी काटी.
  4. इलाहाबाद विश्वविद्यालय में 1930 से लेकर 1949 तक अंग्रेजी के अध्यापक रहे.
  5. 1970 में उनकी उर्दू काव्यकृति ‘गुल-ए-नग्मा’ के लिए ज्ञानपीठ पुरस्कार मिला.
  6. फिराक गोरखपुरी को साहित्य एवं शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान के लिए 1968 में भारत सरकार ने पद्म भूषण से सम्मानित किया था.
  7. 1970 में इन्हें साहित्य अकादमी का सदस्य भी मनोनीत कर लिया गया था.

प्रमुख रचनाएँ

  • गुल-ए-नग्मा ( Gul-e-Naghma )
  • मश्अल ( Mash’aal )
  • रूह-ए-कायनात ( Rooh-e-Kaayenaat )
  • शबनमिस्तान ( Shabnamistaan )
  • बज़्म-ए शायरी रंग-ए-शायरी (Bazm-e-Zindagi Rang-e-Shayri )

अन्य रचनाएँ

हिंडोला, जुगनू, नकूश, आधीरात, परछाइयाँ और तरान-ए-इश्क, रूप, धरती की करवट, गुलबाग, रम्ज व कायनात, चिरागां, शोअला व साज, हजार दास्तान और अन्य कई रचनाएँ भी फ़िराक जी ने की हैं.

पुरस्कार | Awards

1960 – साहित्य अकादेमी अवार्ड उर्दू में ( Sahitya Akademi Award in Urdu )
1968 – पद्मभूषण ( Padma Bhushan )
1968 – सोवियत लैंड नेहरु अवार्ड ( Soviet Land Nehru Award )
1969 – ज्ञानपीठ अवार्ड | Jnanpith Award (First Jnanpith Award for Urdu literature)
1970 – साहित्य अकादेमी फ़ेलोशिप ( Sahitya Akademi Fellowship )
1981 – ग़ालिब अकैडमी अवार्ड ( Ghalib Academy Award )

फ़िराक गोरखपुरी के बेहतरीन शायरी | Firaq Gorakhpuri Shayari in Hindi

आए थे हँसते खेलते मय-ख़ाने में ‘फ़िराक़’
जब पी चुके शराब तो संजीदा हो गए.


आने वाली नस्लें तुम पर फ़ख़्र करेंगी हम-असरो
जब भी उन को ध्यान आएगा तुम ने ‘फ़िराक़’ को देखा है.


आँखों में जो बात हो गई है
इक शरह-ए-हयात हो गई है


अब तो उन की याद भी आती नहीं
कितनी तन्हा हो गईं तन्हाइयाँ


एक मुद्दत से तिरी याद भी आई न हमें
और हम भूल गए हों तुझे ऐसा भी नहीं


इक उम्र कट गई है तिरे इंतिज़ार में
ऐसे भी हैं कि कट न सकी जिन से एक रात


कह दिया तू ने जो मा’सूम तो हम हैं मा’सूम
कह दिया तू ने गुनहगार गुनहगार हैं हम


इसी खंडर में कहीं कुछ दिए हैं टूटे हुए
इन्हीं से काम चलाओ बड़ी उदास है रात


कमी न की तिरे वहशी ने ख़ाक उड़ाने में
जुनूँ का नाम उछलता रहा ज़माने में


तुम इसे शिकवा समझ कर किस लिए शरमा गए
मुद्दतों के बा’द देखा था तो आँसू आ गए


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