Essay on Diwali in Hindi | हिंदी में दिवाली पर निबंध

 

Essay on Diwali in Hindi – दीपावली ( Deepawali ) या दिवाली ( Diwali ) पूरे भारत में बड़े ही हर्षोल्लास के साथ “शरद ऋतु” में मनाया जाता हैं. दीपावली स्वच्छता और प्रकाश का पर्व हैं. कई सप्ताह पहले ही लोग अपने घरों और दुकानों की साफ़-सफाई का कार्य शुरू कर देते हैं. घरों और दुकानों की सफेदी या पेंट करवाते हैं, सुनहरी लाइट की लड़ियों से सजाते हैं. घर, दूकान, चौराहे और गलियाँ साफ़-सुथरी और सजी-धजी नजर आती हैं. बच्चे पटाखे कई दिनों पहले से ही फोड़ने लगते हैं. इस त्यौहार में बच्चे काफी ख़ुश और उत्सुक नजर आते हैं.

दिवाली में लोगो का विश्वास होता हैं कि सत्य की सदा जीत होती हैं और झूठ का नाश होता हैं. दिवाली या दीपावली अन्धकार पर प्रकाश के विजय को दर्शाता हैं. दिवाली हमें यह सन्देश देता हैं कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने मन-मस्तिष्क के अंदर ज्ञान का दीप जलाना चाहिए ताकि दुःख रुपी अन्धकार का हमेशा के लिए नाश हो जाएँ. अपने मन-मस्तिष्क की साफ़-सफाई रखनी चाहिए ताकि मन के अंदर अच्छे विचार आयें.

दिवाली में भारत, नेपाल, मारीशस, गुयाना, श्रीलंका, म्यांमार, त्रिनिदाद, टोबैगो, सूरीनाम, मलेशिया, सिंगापुर और फिजी में सरकारी अवकाश होता हैं. इन जगहों पर दिवाली को बड़े ही धूम-धाम से मनाया जाता हैं.

दीपावली ( Deepawali ) या दिवाली ( Diwali ) के बारे में संक्षिप्त जानकारी

नाम – दिवाली, दीपावली, प्रकाश पर्व आदि
मनाने वाले धर्म – हिन्दू, सिख, जैन और बौद्ध
उद्देश्य – धार्मिक निष्ठा, उत्सव, सास्कृतिक
पर्व का आरम्भ – धनतेरस (दिवाली से दो दिन पहले)
पर्व का अंत – भैया दूज ( दिवाली के दो दिन बाद )
उत्सव – दिया जलाना, घर की सजावट, पटाखे फोड़ना, पूजा, खरीददारी, उपहार, दावत और मिठाइयाँ
समान पर्व – काली पूजा, बंदी छोड़ दिवस

दीपावली शब्द की उत्पत्ति

दीपावली शब्द की उत्पत्ति संस्कृत के दो शब्दों “दीप” और “आवली” से हुआ हैं. ‘दीप’ का अर्थ हैं ‘दिया’ और ‘आवली’ का अर्थ हैं ‘लाइन’ या ‘श्रृंखला’. दीपावली के उत्सव में घरों के द्वारों व मंदिरों पर हजारों दिये रखकर प्रज्वलित किया जाता हैं. दीपवाली को दिवाली भी कहते हैं.

पर्वों का समूह दिवाली

दिवाली के दिन भारत में विभिन्न जगहों पर मेले लगते हैं और कुछ जगहों पर दिवाली के बाद मेले लगते हैं. दिवाली के आसपास और भी बहुत सारे त्यौहार मनाये जाते हैं इसलिए इसे पर्वों का समूह भी कहते हैं. दिवाली से दो दिन पहले धनतेरस ( Dhanteras ) का त्यौहार होता हैं इस दिन प्रत्येक घर में व्यक्ति कुछ न कुछ नया जरूर खरीदतें हैं. इस दिन बाजार में चारों तरफ जनसमूह उमड़ पड़ता हैं. धनतेरस के दिन बर्तनों की दुकानों पर विशेष भीड़ दिखाई देता हैं. धनतेरस में स्टील के बर्तन, सोने की सिक्के, चांदी के सिक्को की ख़रीदारी को शुभ माना जाता हैं. इससे अगले दिन नरक चतुर्दशी ( Narak Chaturdashi ) या छोटी दीपावली ( Chhoti Diwali ) होती हैं. इस दिन यम पूजा हेतु दीपक जलाएं जाते हैं. इस दिन तुलसी के पास या घर के द्वार पर एक दीपक जलाया जाता हैं.

इसके अगले दिन ही दिवाली होती हैं. घरों में सुबह से ही तरह-तरह के पकवान बनाये जाते हैं. बाजारों में लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति, पटाखे, पूजा सामाग्री, मिठाई, खांड के खिलौने आदि बिकने लगते हैं जिसे लोग अपने घर खरीद कर लाते हैं. सुबह से ही लोग अपने मित्रो, रिश्तेदारों, सगे-सम्बन्धियों के घर मिठाइयाँ व उपहार बाटने लगते हैं. दिवाली की शाम को लोगो अपने घरों में गणेश और लक्ष्मी जी की पूजा करते हैं. पूजा करने के बार लोग दिए, दीपक, मोमबती या लाइट की लड़ी से घर के अंदर और बाहर प्रकाश करके सजाते हैं. बहुत से लोगो अपने घरों के अंदर या घर के सामने सुंदर रंगोली बनाकर उसे दीप से सजाते हैं. रात में प्रकाश का सुंदर दृश्य होते ही पटाखों की आवाज गूजने लगती हैं और लोग रात में काफी देर तक तरह-तरह के पटाखे फोड़ते हैं.

दिवाली के अगले दिन लोग गोवर्धन पूजा ( Govardhan Pooja ) या अन्नकूट पूजा ( Annakoot or Annakut Pooja )  करते हैं जिसमें अपने गाय-बैलों को सजाते हैं और गोबर का पर्वत बनाकर पूजा करते हैं. इसके अगले दिन भाई दूज ( Bhai Dooj ) का पर्व होता हैं. भाई दूज या भैया द्वीज को यम द्वितीय भी कहते हैं. इस दिन भाई और बहिन गाँठ जोड़कर यमुना नदी में स्नान की परम्परा हैं. इस दिन बहन अपने भाई के मस्तिष्क पर तिलक लगाकर भाई के मंगल जीवन की कामना करती हैं.

वायु प्रदूषण

पटाखे फोड़ने के दौरान उतना वायु प्रदूषण नही होता हैं जितना पटाखे फोड़ने के बाद होता हैं. दिवाली के एक दिन बाद वायु प्रदूषण काफी हो जाता हैं. बड़े शहरो में दिवाली के बाद प्रदूषण इतना अधिक हो जाता हैं कि आकाश में काले बादल का कुहरा छा जाता हैं. विशेष विभागों के रिपोर्ट से पता हालत हैं की आतिशबाजी के बाद हवा में धूल के महीन कण सामिल हो जाते हैं. यह प्रदूषण अगले दो से तीन दिनों तक रहता हैं.

जलने की घटनाएं

दिवाली में जलते दिए और पटाखों से जलने वालो की संख्या काफी होती हैं. बच्चे और व्यस्क अधिक्तर आतिशबाजी के शिकार होते हैं. अधिकाँश चोटें छोटी होती हैं जो प्राथमिक उपचार के बाद भर जाती हैं.

सावधानियाँ

दिवाली में दिए जलाने से लेकर पटाखे फोड़ने तक लोगो को सावधान रहना चाहिए ताकि किसी अप्रिय घटना न हो.

  1. पटाखे घर के अंदर या बंद जगह पर ना फोड़े. इसके लिए हमेशा खुली जगह का ही चयन करें.
  2. आग लगाने के बाद भी अगर पटाखे न फूटे तो तुरंत उसके पास न जाएँ. फटाखे अचानक से फूट सकते हैं.
  3. पटाखों को हाथ में लेकर ना फोड़े.
  4. जब पटाखे फोड़े तो कॉटन का ही कपड़ा पहने. सिंथेटिक कपड़ो को पहनने से बचें.
  5. बच्चों को दिए और पटाखों से दूर रखे.
  6. जहाँ पर आतिशबाजी हो रही हो, वहाँ से बच्चों को दूर रखें.
  7. बच्चो पर ध्यान दे और उन्हें अकेला न छोड़े. शाम के समय बच्चो के ही साथ रहे.
  8. दियें को ऐसे ही जगह पर रखे जिससे कोई अन्य सामान न जले.
  9. जल जाने की हालत में तुरंत नजदीकी डॉक्टर से संपर्क करें.
  10. दीपावली में पटाखे फोड़ना खतरनाक होता हैं, इसलिए खुद को और बच्चों को पटाखों से दूर रखे.

खुद को और अपने परिवार को सुरक्षित रखकर ही दिवाली मनाना समझदारी हैं.