भाईदूज पूजा विधि, कथा और शायरी

भाई दूज ( Bhai Dooj ) या भातृद्वितीया एक हिन्दू पर्व हैं. इसे कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया को मनाया जाता हैं. इसे यम द्वितीया भी कहते हैं. इस त्यौहार में बहन रोली एवं अक्षत से अपने भाई को तिलक करके उज्ज्वल भविष्य की कामना करती हैं. भाई भी अपने बहन को उपहार में कुछ जरूर देता हैं. दिवाली के दो दिन बाद भाईदूज का त्यौहार आता हैं जिसमें भाई-बहन के प्रेम की झलक देखने को मिलती हैं.

भाईदूज पूजा विधि | Bhai Dooj Pooja Vidhi

पूजा विधि में बहने, भाई के हथेली में चावल का घोल लगाती हैं उसके ऊपर सिन्दूर लगाकर कद्दू के फूल, पान, सुपारी और मुद्रा आदि हाथों पर रखकर धीरे-धीरे पानी हाथों पर छोड़ते हुए कुछ इस तरह का मन्त्र बोला जाता हैं –
गंगा पूजे यमुना को,
यमी पूजे यमराज को,
सुभद्रा पूजे कृष्ण को,
गंगा यमुना नीर बहे और
मेरे भाई की आयु बढ़े.

अन्य मान्यताओं और अलग-अलग स्थानों पर इसे अलग-अलग तरीके से मनाते हैं. कई जगहों पर बहनें भाई के सिर पर तिलक लगाकर उनकी आरती उतारती हैं और फिर हाथ में कलावा बाधती हैं. भाई को माखन-मिश्री भी खिलाती हैं.

इस समय ऊपर आसमान में चील उड़ता हुआ दिखाई दे तो उसे बहुत शुभ मानते हैं क्योकि यह मान्यता हैं कि बहनें जो भाई की आय के लिए दुआ मांग रही हैं उसे यमराज ने कबूल कर लिया हैं. या चील जाकर यमराज को उनकी प्रार्थना सुनाएगा.

भाईदूज कथा | Bhai Dooj Katha

भारत के ज्यादा हिन्दू पर्व किसी न किसी धार्मिक विचार या कथा से जुड़े हुए हैं. भाई दूज की भी एक पौराणिक कथा हैं. कथा के अनुसार, यमराज अपनी बहन यमी से बहुत प्रेम और स्नेह करते थे. एक बार जब यमराज अपनी बहन यमी के यहाँ पहुँचे तो उनकी बहन ने उनका काफी सेवा-सत्कार किया जिससे यमराज काफी प्रसन्न हुए. यह दिन कार्तिक शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि थी और यमराज ने प्रसन्न होंकर कहा बोलो बहन तुम्हें क्या वरदान चाहिए. मैं तुम्हारी सेवा-सत्कार से काफी प्रसन्न हूँ. तब यमी बोली कि जो प्राणी यमुना नदी के जल में स्नान करे, तो उसे सारे पापों से मुक्ति मिले और उसे यमपुरी न जाना पड़े. अपनी बहन यमी के मुख से ऐसा वरदान सुनकर यमराज चिंतित हो गये. यमी भाई के मनोदशा को देखकर समझ गयी कि इस वरदान को देने में उनका भाई सक्षम नही हैं. तब यमी ने कहा कि आज के दिन जो भाई अपने बहन के घर भोजन करे और यमुना में स्नान करे तो उस व्यकित के पापों का नाश हो जाए और उसे यमलोक न जाना पड़े.

इस कथा के अनुसार जो भाई अपने बहन के घर जाकर, बहन के हाथों के द्वारा बना भोजन ग्रहण करेगा तो उसकी आयु बढ़ेगी. भाई भी अपने प्रेम को प्रकट करते हुए बहन को आशीर्वाद और उपहार देकर प्रसन्न करते हैं.

भाई दूज शायरी | Bhai Dooj Shayari

बहन मांगे भाई का प्यार, नही मांगे कोई उपहार,
रिश्ता अटूट रहे हमेशा, मिले मेरे भाई को खुशियाँ अपार.

हैप्पी भाई दूज
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बहन लगाती तिलक, फिर मिठाई हैं खिलाती,
भाई देता पैसे और बहन हैं मुस्कुराती,
भाई-बहन का ये रिश्ता न पड़े कभी लूज,
मेरे प्यारे भैया मुबारक हो आपको भाई दूज.

हैप्पी भाईदूज
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लाल गुलाबी रंग हैं, झूम रहा संसार,
सुख की किरने, खुशियों की बहार,
चाँद की चाँदनी, अपनों का प्यार,
बधाई हो आपको, भैया दूज का त्यौहार.

हैप्पी भाईदूज
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दिल की यह कामना हैं कि आपकी जिन्दगी खुशियों से भरा हो,
आपके कदम चूमे चाँद-सितारे, हमारा बंधन स्नेह से भरा हो.

हैप्पी भाईदूज
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