Diwali Kavita | दिवाली कविता

Diwali Poem in Hindi

दिवाली पर हिंदी कविता ( Diwali Kavita or Poem 2018 in Hindi ) – दिवाली दिलों में खुशियाँ भर देती हैं. साफ-सफाई, दिए और रौशनी की इस त्यौहार पर इस पोस्ट में दी हुई बेहतरीन कवितायें जरूर पढ़े और शेयर करें.

Diwali Poem or Kavita| दिवाली कविता – अटलजी की हैं

जब मन में हो मौज बहारों की
चमकाएँ चमक सितारों की,
जब ख़ुशियों के शुभ घेरे हों
तन्हाई में भी मेले हों,
आनंद की आभा होती है
*उस रोज़ ‘दिवाली’ होती है ।

जब प्रेम के दीपक जलते हों
सपने जब सच में बदलते हों,
मन में हो मधुरता भावों की
जब लहके फ़सलें चावों की,
उत्साह की आभा होती है
*उस रोज़ दिवाली होती है ।

जब प्रेम से मीत बुलाते हों
दुश्मन भी गले लगाते हों,
जब कहींं किसी से वैर न हो
सब अपने हों, कोई ग़ैर न हो,
अपनत्व की आभा होती है
*उस रोज़ दिवाली होती है ।

जब तन-मन-जीवन सज जाएं
सद्-भाव के बाजे बज जाएं,
महकाए ख़ुशबू ख़ुशियों की
मुस्काएं चंदनिया सुधियों की,
तृप्ति की आभा होती है
*उस रोज़ ‘दिवाली’ होती है ।

दिवाली पर्व है – Diwali Kavita in Hindi

दिवाली पर्व है पुरूषार्थ का,
दीप के दिव्यार्थ का,
देहरी पर दीप एक जलता रहे,
अंधकार से युद्ध यह चलता रहे,
हारेगी हर बार अंधियारे की घोर-कालिमा,
जीतेगी जगमग उजियारे की स्वर्ण-लालिमा,
दीप ही ज्योति का प्रथम तीर्थ हैं,
कायम रहे इसका अर्थ, वरना व्यर्थ हैं,
आशीषों की मधुर छाँव इसे दे दीजीये,
प्रार्थना-शुभकामना हमारी ले लीजिए,
झिलमिल रौशनी में निवेदित अविरल शुभकामना,
आस्था के आलोक में आदरयुक्त मंगल भावना !!!

जगमग – जगमग | Diwali Poem in Hindi

जगमग – जगमग दीप जलें,
रोशन घर का हो हर कोना,
प्रकाश के जैसे उज्ज्वल तन हो,
जन – जन स्वजन और निर्मल मन हो,
रौशनी का आगाज जहाँ हो,
तुम वहाँ हो, हम वहाँ हो,
दूर तम के अन्धकार हों,
मीठे स्वर हो मीठी ताल हो,
शुभकामनाएं हैं यही हमारी,
सतरंगी हर दिवाली हों.

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