“तरबतर” अनुपमा श्रीवास्तव ‘अनुश्री’ की बेहतरीन कविता

लबालब भरे ये श्याम घन
चले आये हैं डग बढ़ाये
धरा लहलहाती , खिलखिलाती
है उनके आतिथ्य में सर झुकाये

काले -काले मेघों के ये घेरे हैं ख़ूब घेरे
ज़रा सा हाथ बढ़ाया और बरस पड़े
पावन सी प्रकृति खिल -खिल गयी
रेशमी बूंदों से पहन ताज़गी का पैरहन

ठहर -ठहर गुज़रती हवा आईने से जल पर
करती चली बेतकल्लुफ़ चित्रकारियां
बारिशों ने भिगोई है जो शाम ओ सहर
तरबतर हो गया है दिल का शहर ।

लेखिका – अनुपमा श्रीवास्तव ‘अनुश्री

इसे भी पढ़े –

Latest Articles

संविधान दिवस पर कविता | Constitution Day Poem in Hindi

संविधान दिवस पर कविता | Constitution Day Poem in Hindi - संविधान दिवस प्रति वर्ष 26 नवम्बर को मनाया जाता है. इसे क़ानून दिवस...

अनपढ़ पर शायरी स्टेटस | Illiterate Shayari Status Quotes in Hindi

Illiterate Anpadh Shayari Status Quotes Image in Hindi - इस आर्टिकल में अनपढ़ पर शायरी स्टेटस कोट्स इमेज आदि दिए हुए है. इन्हें जरूर...

शादी कार्ड शायरी | Wedding Card Shayari in Hindi

Wedding Card Shayari in Hindi ( Shadi Marriage Card Shayari ) - इस आर्टिकल में शादी कार्ड पर लिखे जाने वाले बेहतरीन शायरी दिए...

International Mens Day Shayari Status Quotes in Hindi | अन्तराष्ट्रीय पुरूष दिवस शायरी स्टेटस कोट्स

Happy International Mens Day Shayari Status Quotes Wishes Message Image in Hindi - इस आर्टिकल में अन्तराष्ट्रीय पुरूष दिवस पर शायरी स्टेटस कोट्स इमेज...