Amrita Pritam Shayari | अमृता प्रीतम शायरी

Amrita Pritam Shayari

Amrita Pritam Shayari in Hindi – अमृता प्रीतम एक लोकप्रिय और मशहूर पंजाबी लेखिका थी. इन्हें पंजाबी भाषा की पहली कवियत्री माना जाता हैं. इस पोस्ट में इनकी कविताओं से कुछ बेहतरीन लाइन्स दिए हुए हैं. इन्हें आप अमृता प्रीतम की शायरी ( Amrita Pritam Ki Shayari ) भी कह सकते हैं. इन बेहतरीन शरों को जरूर पढ़े.

बेस्ट अमृता प्रीतम शायरी | Best Amrita Pritam Shayari

चिंगारी तूने दी थी
यह दिल सदा जलता रहा
वक़्त कलम पकड़ कर
कोई हिसाब लिखता रहा


जो भी बच्चा इस शहर में जनमता
पूछता कि किस बात पर यह बहस हो रही?
फिर उसका प्रश्न ही एक बहस बनता
बहस से निकलता, बहस में मिलता.
अमृता प्रीतम शायरी


इससे पहले कि मेरी सोच घबराये
और गलत मोड़ पर मुड़ जाये
इससे पहले कि बादल को उतारते
यह सूरज टूट जाये.


मेरी माँ की कोख मज़बूर थी
मैं भी तो एक इन्सान हूँ
आज़ादियों की टक्कर में
उस चोट का निशान हूँ
Amrita Pritam Shayari


आंखों में ककड़ छितरा गये
और नजर जख्मी हो गयी
कुछ दिखायी नहीं देता
दुनिया शायद अब भी बसती है.


अब सूरज रोज वक़्त पर डूब जाता है
और अँधेरा रोज़ मेरी छाती में उतर आता है.


धरती का दिल धड़क रहा है
सुना है आज टहनियों के घर
फूल मेहमान हुए हैं


उम्र के काग़ज़ पर —
तेरे इश्क़ ने अँगूठा लगाया,
हिसाब कौन चुकायेगा !
क़िस्मत ने एक नग़मा लिखा है
कहते हैं कोई आज रात
वही नग़मा गायेगा


जिसने अँधेरे के अलावा कभी कुछ नहीं बुना
वह मुहब्बत आज किरणें बुनकर दे गयी


यह फिल्म मैंने देखी नहीं
सिर्फ़ सुनी है
क्योंकि सैन्सर का कहना है —
‘नॉट फॉर अडल्स।’


मुँह में निवालों की जगह
निवाले की बाते रह गयीं
और आसमान में काली रातें
चीलों की तरह उड़ने लगीं.


तुम मिले तो कई जन्म
मेरी नब्ज़ में धड़के
तो मेरी साँसों ने तुम्हारी
साँसों का घूँट पिया.


यह एक शाप है, यह एक वर है
और जहाँ भी
आज़ाद रूह की झलक पड़े
— समझना वह मेरा घर है.


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