विवेक क्या है? | Vivek Kya Hai?

विवेक क्या होता है? | Vivek Kya Hota Hai? – विवेक हमारे मनःस्थिति का एक अभिन्न हिस्सा होता है. बहुत कम लोग विवेक के बारें में जानते और उससे भी कम लोग इसका प्रयोग करते है. अक्सर हम कभी अपनी मानसिक क्रियाओ पर ध्यान ही नहीं देते है. आज के दौर में धनोपार्जन ही जीवन का एक मात्र उद्देश्य बन चुका है. अगर आपके मन में भी ऐसे प्रश्न आते है तो आप इस पोस्ट को पूरा जरूर पढ़े –

  • विवेक क्या है?
  • विवेक किसे कहते है?
  • विवेक क्या कार्य करता है?

विवेक क्या है? | Vivek Kya Hai?

अच्छाई-बुराई, सत्य-असत्य और लाभ-हानि, नैतिकता की समझ को ही विवेक कहते है. शिक्षा, बुद्धिमत्ता और अनुभव के आधार पर ही विवेक कार्य करता है और इसी आधार पर हर व्यक्ति अपने जीवन में निर्णय लेता है. इंसान की सफलता और असफलता में हमारे विवेक और निर्णय की महत्वपूर्ण भूमिका होती है. जो लोग विवेक का इस्तेमाल करते है वो सुख और सफलता की ओर अग्रसर होते है. जब विचार सकारात्मक होते है तो अंतरात्मा अच्छे कार्य करने के लिए प्रेरित करती है. अगर विचार नकारात्मक होते है तो अंतरात्मा गलत कार्य को करने से रोकता है.

प्रत्येक व्यक्ति में सकारात्मक और नकारात्मक दोनों प्रकार के विचार या ऊर्जा होते है. जब हमारे मन में परिश्रम, प्रेम, उत्साह, ख़ुशी, सफलता के भाव होते है तब सकारात्मक विचार या ऊर्जा सक्रिय हो जाते है. वो सही दिशा में कार्य करें यह विवेक का ही निर्णय होता है. इसे करने के लिए अंतरात्मा व्यक्ति को उत्साहित करता है. जब दुःख, ईर्ष्या, क्रोध, घृणा, लालच के भाव होते है तब नकारात्मक विचार या ऊर्जा सक्रिय हो जाते है. तब गलत विचार मन में आते है. अंतरात्मा रोकता है. बार-बार रोकता है. यदि आपका विवेक कमजोर पड़ता है तो आप गलत कार्य करने के लिए कोई ना कोई तर्क ढूंढ लेते है. अगर आपका विवेक शक्तिशाली है तो आप गलत कार्य करने का निर्णय नहीं लेंगे। यदि गलत कार्य कर देते है तो उसका पछतावा आपको जीवन भर होगा।

क्या बच्चों में विवेक होता है?

मेरा उत्तर है – “नहीं“. माँ बच्चे को नौ महीने अपने गर्भ में धारण करके रखती है. फिर माँ-बाप मिलकर उसका लालन-पालन करते है. जब बच्चा एक वर्ष का हो जाता है और उसके हाथ पाँव चलने लगते है तो वह अपने माता-पिता को भी मारता है क्योंकि उसमें विवेक की कमी होती है. वह खेलते-खेलते खुद को चोट पहुँचा लेते है. आग को छूने का प्रयास करते है. यह सब विवेक की कमी के कारण होता है. बच्चे की शिक्षा और अनुभव जैसे-जैसे बढ़ता है. वैसे-वैसे विवेक का भी विकास होता है.

क्या जानवर में विवेक होता है?

हाँ, जानवर में विवेक होता है. लेकिन वह बहुत ज्यादा विकसित नही होता है. जानवर हिंसक अपने स्वभाव, भूख और असुरक्षा के कारण होता है. शेर का स्वभाव होता है. जानवरों को मारकर खाना लेकिन वह अपने बच्चों को नहीं मारता है. क्योंकि उसके अंदर विवेक होता है. आप एक कुत्ते का उदाहरण ले सकते है. अगर कुत्ते में विवेक नहीं होता तो वह अपने मालिक और मालिक के परिवार के सदस्यों को देखकर भी भोंकता लेकिन वह केवल अजनबी लोगो को ही देखकर भोंकता है.

विवेक से काम लें

इंसान क्या चाहता है? ऐसा आनंद जहाँ दुःख-दर्द का का पता ना चले. ऐसी शांति जहाँ किसी प्रकार की बेचैनी या अशांति ना हो. लेकिन मनुष्य अपने लालच और स्वार्थ के कारण अपने जीवन आनंद और शन्ति नहीं पाता है. जब आप किसी की मदत करते है तब आप को आंतरिक आनंद का अनुभव होता है. कुछ दिन तक आपको बड़ा सुकून मिलता है. ऐसे ही जीवन में बहुत से कार्य है जिन्हें करने से आनंद और सुख प्राप्त होता है. ईश्वर की भक्ति और ईश्वर की प्राप्ति में असीम आनंद और सुकून का अनुभव होता है. हर व्यक्ति को आध्यात्मिक होना चाहिए।

यह मेरा स्वयं का अनुभव है. जब आप का नियंत्रण आपके मन पर होगा तब आप अपने विवेक से बहुत अच्छा निर्णय लेंगे। यह निर्णय आपके जीवन में उत्साह, ख़ुशी, सफलता और समृद्धि लाएगा। अगर आप चाहते है कि आपके जीवन में कभी दुःख ना आएं तो आप किसी को अपने वाणी और कर्म के द्वारा दुखी ना करें।

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