गुल्लक पर कविता | Piggy Bank Poem in Hindi

Piggy Bank ( Gullak ) Poem Kavita Poetry in Hindi – इस आर्टिकल में गुल्ल्क पर कविता दी गई है. बच्चों में बचत की आदत डालने के लिए माँ-बाप अक्सर बचपन में गुल्लक खरीद कर देते है. जब माँ-बाप से पैसे पाते है, रिश्तेदारों से पैसे पाते है, नाना-नानी से पैसे पाते है तो उसे गुल्ल्क में डाल देते है.

गुल्लक पर कविता

गुल्लक इंसान को
कितना सिखाती है,
पैसे बचत करने की
अच्छी आदत लगाती है.

बचपन में जब मेले
के लिए पैसा पाते थे,
उसमें से कुछ खाते थे
और कुछ बचाते थे
जो पैसा बच जाता था
वो सीधे गुल्लक में जाता था.

बचपन में जब रिश्तेदारों
के घर जाते थे,
तब वहाँ भी पैसा पाते थे,
कुछ पैसे से चॉकलेट और
टॉफ़ी खाते थे और
कुछ पैसा बचाते थे
जो पैसा बच जाता था,
वो सीधे गुल्लक में जाता था.

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गुल्लक में कितना डाला
इसका रोज हिसाब लगाते थे,
मेरे पास इतना पैसा है
यह सोचकर खुश हो जाते थे,
ख़ुशी भी ना कितनी छोटी-छोटी
बातों से आती है,
गुल्लक का एहसान मानो
जो जीवन का मूल सिखाती है.

ये बचत करने की आदत
जिंदगी में खुशहाली लाती है,
यह बात वही अच्छी तरह समझता है
जिसके सिर पर जिम्मेदारी आती है
पास पैसे ना हो तभी सारी
दुनियादारी समझ में आती है,
घर के बड़े-बुजर्गों से पूछना
बचत की आदत समझदारी कहलाती है.

गुल्लक इंसान को
कितना सिखाती है,
पैसे बचत करने की
अच्छी आदत लगाती है.


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