पवन ऊर्जा की पूरी जानकारी | Wind Power in Hindi

Wind Power in Hindi

Introduction to Wind Power in Hindi – भारत में पवन ऊर्जा ( Wind Power ) के विकास की शुरूआत 1990 के दशक में हुई और कुछ ही सालों में काफी विकास हुआ है. भारत का विश्व में पवन के द्वारा ऊर्जा उत्पादन में 5वां स्थान हैं.

पवन ऊर्जा क्या हैं? | What is Wind Power in Hindi?

बहती वायु से उत्पन्न की गई ऊर्जा को पवन ऊर्जा या Wind Power कहते हैं. वायु एक हरित ऊर्जा ( Green Energy ) और अक्षय ऊर्जा ( Renewable Energy ) का स्त्रोत हैं. वायु को ऊर्जा में परिवर्तित करने के लिए हवादार जगहों पर पवन चक्की लगाये जाते हैं, जिसके द्वारा पवन की गतिज ऊर्जा, यन्त्रिक ऊर्जा में परिवर्तित हो जाती हैं. इस यांत्रिक ऊर्जा को जनित्र की मदद से विद्युत् ऊर्जा में बदला जाता हैं.

पवन ऊर्जा का इतिहास | History of Wind Power

सदियों से मनुष्य अपने रोजमर्रा के कई कामों में हवा का इस्तेमाल करता आ रहा हैं. 2 हजार वर्ष पहले चीनी और फारसी इंजिनियरों ने पहली पवन चक्की यानि की Wind Mill तैयार की थी ताकि सिचाईं के लिए पानी पंप किया जा सके. 18वीं सदी के अंत में यूरोप में पहली बार देखा गया कि पवन ऊर्जा का इस्तेमाल कृषि और औद्योगिक उद्देश्यों के लिए किया जाने लगा. शुरूआती Wind Mill की क्षमता आज के विंड मिला के बराबर नहीं थी, लेकिन उस समय जिस प्रकार उत्पादन बढ़ाने में मदत की जिसकी वजह से उन्हें उपयोगी उपकरण बना दिया.

आधुनिक बिजली पैदा करने वाली विंड मिल 19वीं सदी के अंत में आई. 1970 के दशक के ऊर्जा संकट के दौरान, वह एक ऐसा दौर था जब Wind Power को बड़े पैमाने पर उपयोग में लाने के बारें में सोचा जाने लगा. 1990 के दशक में बड़े-बड़े पवन चक्की संयंत्र ( Wind Farm ) दिखाई देने लगे और हवा से उत्पन्न बिजली व्यवसायिक रूप से उपलब्ध होने लगी.

पवन ऊर्जा से सम्बन्धित अन्य तथ्य | Other Facts related Wind Power

  • आपको पवन चक्की संयंत्र मुख्य रूप से भारत में इन स्थानों पर देखने को मिलेंगें – तमिलनाडु, महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक, राजस्थान, मध्यप्रदेश, आंध्रप्रदेश, केरल, पश्चिम बंगाल और अन्य कुछ राज्यों में.
  • भारत में स्थापित कुल ऊर्जा क्षमता का लगभग 8%+ पवन ऊर्जा से प्राप्त होता है.
  • एक रिपोर्ट के अनुसार, 2030 तक पवन ऊर्जा के द्वारा दुनिया में प्रयोग की जा रही बिजली का 20% उत्पादन सम्भव हैं.
  • पवन चालित संयंत्र महंगे है और केवल वहीं लगाए जा सकते है जहां आवश्यकतानुरूप वायु उपलब्ध हो.

पवन ऊर्जा से लाभ | Profit from Wind Energy

  • पवन से ऊर्जा उत्पादन प्रदूषण मुक्त हैं. कार्बन-डाईआक्साइड के उत्सर्जन को कम करने के लिए उपलब्ध कुछ तकनीकी विकल्पों में पवन ऊर्जा भी एक हैं.
  • वायु अथवा हवा हर जगह उपलब्ध हैं तथा कभी न समाप्त होने वाली हैं.
  • पवन निःशुल्क और प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं. वायु पर किसी देश या वाणिज्यिक प्रतिष्ठान का एकाधिकार नहीं हैं जैसा कि जीवाश्मीय ईंधनों, यथा- तेल, गैस, या नाभिक ईंधनों- जैसे यूरेनियम आदि के साथ है.
  • पवन ऊर्जा संयंत्र पूर्ण रूप से स्वचालित हो गए हैं तथा संयंत्र को चलाने के लिए अधिक श्रमिकों क़ी आवश्यकता भी नहीं रह गई है. निर्माण तथा रखरखाव की दृष्टि से भी पूरी तरह सुरक्षित हैं.
  • पवन ऊर्जा संयंत्र अधिक स्थान नहीं लेते हैं और इन्हें समतल सपाट भू-प्रदेश, पहाड़ी के सिखर, वनों तथा मरूस्थलों में भी लगाया जा सकता हैं.
  • इन संयत्रों को आसानी से चलाया जा सकता हैं और ये सुरक्षित होते है अतः रखरखाव की जरूरत बहुत कम होती हैं.
  • पवन ऊर्जा उत्पादन में खर्चा कम आता हैं. पवन ऊर्जा संयंत्र को लगाने में एक बार ही खर्च आता हैं. इसे चलाने के लिए किसी प्रकार के ईधन का प्रयोग नहीं होता हैं.

पवन ऊर्जा से होने वाले पर्यावरणीय समस्याएं | Environmental problems caused by Wind Energy

  • शोर – पवन ऊर्जा से ‘शोर’ होता हैं यह इसकी एक समस्या है. यह शोर दो प्रकार से होता हैं. एक यांत्रिक शोर और दूसरा हवा से जो पत्तिया चलती हैं उनके शोर.
  • जीव-जन्तु पर प्रभाव  – पवन ऊर्जा संयंत्र पशु पक्षी को भयभीत करती हैं और संयंत्र से पक्षियों के टकराने से उनकी जान जाती हैं. संयंत्र से टकराने के कारण होने वाली पक्षियों की मौतों की संख्या कम हैं.
  • सौन्दर्य बोध की कमी  – आस-पास बड़ी-बड़ी ऊँची मीनारे खड़ी की जाती है तो वे निश्चित रूप से प्राकृतिक दृश्यावली की सुंदरता को प्रभावित करते हैं.