शैलेश लोढ़ा शायरी | Shailesh Lodha Shayari Status Quotes in Hindi

Shailesh Lodha Shayari Status Quotes Image in Hindi – इस आर्टिकल में शैलेश लोढ़ा शायरी स्टेटस कोट्स इमेज आदि दिए हुए है. इनके यूट्यूब के विडियो भी दिए है. जरूर देखे।

शैलेश लोढ़ा का जन्म 8 नवम्बर, 1969 में राजस्थान के जोधपुर जिले में एक मारवाड़ी परिवार में हुआ. आप पेशे से एक भारतीय अभिनेता, कवि, लेखक, हास्यकार, व्यंगकार है. भारत के टेलीविज़न इतिहास में “तारक मेहता का उल्टा चश्मा” एक ऐसा सीरियल है जिसे हर उम्र के लोग अपने परिवार के साथ देखते है और टेलीविजन पर सबसे ज्यादा दिनों तक चलने वाला सीरियल है. इसमें शैलेश लोढ़ा जी ने “तारक मेहता” का किरदार निभाया है.

शैलेश लोढ़ा जी का हास्य व्यंग मुझे बड़ा ही पसंद आता है. इनके विडियो यूट्यूब पर मैं अक्सर देखा करता हूँ. आज तक मैंने यही सुना था कि “सच कड़वा होता है” लेकिन जब शैलेश जी को सुना तो लगा कि “सच हास्य भी हो सकता है“. इनकी बातों को अगर आप गहराई से सोचेंगे तो हर बात में एक सच्चाई और समाज के लिए एक संदेश मिलेगा.

Shailesh Lodha Shayari in Hindi

आदमी बन जो धरा का भार कंधो पर उठाये
बाँट दे जग को ना अमृत बूँद अधरों पर लगाये
है जरूरत आज ऐसे आदमी की विश्व को फिर
विश्व का विष सिंधु पी जाए मगर हिचकी ना आये.
शैलेश लोढ़ा


जिस दिन तू शहीद हुआ ना जाने
किस तरह तेरी माँ सोई होगी
मैं तो बस इतना जानू कि वो गोली भी
तेरे सीने में उतरने से पहले रोई होगी.
शैलेश लोढ़ा


सच है इरादे हमारे विध्वंसक नहीं है,
अकारण युद्ध के हम भी प्रशंसक नहीं है,
अहिंसा के पुजारी है हम लेकिन
सुन ले दुनिया अहिंसक है हम नपुंसक नहीं है.
शैलेश लोढ़ा


Shailesh Lodha Status in Hindi

हम जुल्फ की तारीफ़ में सारी रात गीत गा देते है,
सुबह दाल में एक बाल आ जाएँ मुंह पर खींच कर मार देते है.
शैलेश लोढ़ा


छत नहीं रहती, दहलीज नहीं रहती दीवारों दर नहीं रहता
घर में बुजुर्ग ना हो तो घर, घर नहीं रहता।
शैलेश लोढ़ा


ताले है चाबियाँ है पर उनका आभास खत्म हो गया है,
पड़ोसी है लेकिन उनका विश्वास खत्म हो गया है.
शैलेश लोढ़ा


Shailesh Lodha Quotes in Hindi

बच्चों के हाथ में मोबाइल देखता हूँ
तो बड़ा ही कष्ट होता है. इनके माता
पिता से एक ही निवेदन है इनसे
मोबाइल छीन लो और हाथ में किताब दे दो.
शैलेश लोढ़ा


21वीं सदी का बस इतना सा प्रभाव है,
पहले अभाव में खुशियां थीं,
अब खुशियों का अभाव है.
शैलेश लोढ़ा


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