बाबू बनारसी दास की जीवनी | Babu Banarasi Das

Babu Banarasi Das in Hindi

Babu Banarasi Das Biography in Hindi – बाबू बनारसी दास स्वतन्त्रता सेनानी थे. सन् 1930 में असहयोग आन्‍दोलन, वर्ष 1941 में व्‍यक्तिगत सत्‍याग्रह, वर्ष 1942 के भारत छोड़ो आन्‍दोलन में भाग लिया व जेल गये. उत्तर प्रदेश की राजनीति में विधायक, विधानसभा अध्यक्ष और मुख्यमंत्री भी रहें. बाबू बनारसी दास जी ने मुख्यमंत्री हुए सरकारी भवन नहीं लिया था.

Babu Banarasi Das Biography | बाबू बनारसी दास की जीवनी

नाम – बाबू बनारसी दास ( Babu Banarsi Das )
जन्मतिथि – 8 जुलाई, 1912
जन्‍मस्‍थान – अतरौली, बुलन्‍दशहर (उत्तर प्रदेश )
शिक्षा – हाईस्कूल (गवर्नमेंट हाईस्कूल, बुलन्दशहर)
विवाहतिथि – 15 फरवरी, 1936
पत्‍नी का नाम – श्रीमती विद्यावती देवी
सन्‍तान – 5 पुत्र, 5 पुत्री
पिता का नाम – श्री राम जी लाल
मृत्यु तिथि – 03 अगस्त, 1985
विशेष अभिरूचि – सामाजिक विषमताओं को दूर करना, शिक्षा का प्रसार

बाबू बनारसी दास का जन्म 8 जुलाई, 1912 में, उत्तर प्रदेश के बुलन्दशहर जिले के अतरौली गाँव में हुआ था. इन्होने हाईस्कूल तक की शिक्षा वहीं से प्राप्त की. 15 साल के अल्पायु में ही वो स्वंत्रता आन्दोलन से जुड़ गये और 16 वर्ष की उम्र में ही बनारसी दास ने अपने गाँव में कन्या पाठशाला लगाई थी जिसमें वो ख़ुद पढ़ाते थे. उसी वक्त महात्मा गांधी जी की बातों से प्रभावित होकर उन्होंने छुआछूत मिटाने के लिए अछूत समाज के व्यक्तियों के साथ भोजन करते थे. इसके चलते गाँव और इनके परिवार ने इनका बहिष्कार कर दिया था.

बाबू बनारसी दास का व्यक्तिगत जीवन | Babu Banarasi Das Personal Life

बनारसी दास का विवाह 15 फरवरी, 1936 में श्रीमती विद्यावती देवी के साथ हुआ. इनके 5 पुत्र और 5 पुत्रियाँ हुई. इसके दो पुत्र इनके ही चरण चिन्हों पर चले और वो राजनीति में सक्रिय रहें. इनके एक बड़े बेटे श्री हरेंद्र अग्रवाल विधायी परिषद के पूर्व सदस्य थे और भारतीय राजनीति में सक्रिय हैं. और सबसे छोटे बटे स्वर्गीय अखिलेश दास गुप्ता राज्यसभा सांसद, बहुजन समाज पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और मनमोहन सिंह सरकार में राज्य मंत्री थे.

बाबू बनारसी दास के पद | Babu Banarasi Das Post

1946 : विधान सभा के निर्विरोध सदस्‍य निर्वाचित
मार्च 1952 : प्रथम विधान सभा के सदस्‍य पहली बार निर्वाचित
10 जुलाई, 1952 – 10 अप्रैल, 1957 : सभा सचिव उत्तर प्रदेश
मार्च, 1962 : तीसरी विधान सभा के सदस्‍य दूसरी बार निर्वाचित
14 मार्च, 1962 – 18 जून, 1963 : राज्‍यमंत्री, सूचना एवं संसदीय कार्य (श्री चन्‍द्र भानु गुप्‍त मंत्रिमण्‍डल)
14 अक्टूबर, 1963 – 13 मार्च, 1967 : मंत्री, सहकारिता, श्रम एवं संसदीय कार्य (श्रीमती सुचेता कृपलानी मंत्रिमण्‍डल)
मार्च 1967 : चौथी विधान सभा के सदस्‍य तीसरी बार निर्वाचित
1967 : मंत्री, सिंचाई, विद्युत, श्रम एवं संसदीय कार्य
3 अप्रैल, 1972 – 28 जून, 1977 : सदस्‍य, राज्‍य सभा
24 मार्च, 1977 – 30 मार्च, 1977 : अस्‍थायी सभापति, राज्‍य सभापति
जून, 1977 : सातवी विधान सभा के सदस्‍य चौथी बार निर्वाचित
12 जुलाई, 1977 – 26 फरवरी, 1979 : अध्‍यक्ष, उत्‍तर प्रदेश विधान सभा
28 फरवरी, 1979 – 17 फरवरी, 1980 : मुख्य मंत्री उत्तर प्रदेश
1983 : सदस्‍य, सातवीं लोक सभा (उप चुनाव)

बाबू बनारसी दास के बारें में अन्य रोचक बातें | Other Interesting Facts About Babu Banarsi Das

  • एक रोचक बात ये है कि इनको बाबू कहा जाता है. जो कि राजेंद्र प्रसाद और जगजीवन राम जैसे नेताओं के लिए इस्तेमाल किया गया था.
  • बाबू बनारसी दास “हमारा संघर्ष” नामक सप्ताहिक पत्र के संस्थापक थे.
  • Babu Banarasi Das अमेरिका, इंग्लैंड, जमैका, इटली, कैरो, रोम जैसी जगह घूम चुके थे और वहाँ के प्रशासन के तरीके को अपने यहां अपनाने का सुझाव देते थे.
  • सन् 1930 ई. में असहयोग आन्‍दोलन, सन् 1941 ई. में व्‍यक्तिगत सत्‍याग्रह, सन् 1942 ई. के भारत छोड़ो आन्‍दोलन में भाग लिया व जेल गये.
  • सन् 1972 ई. में, दण्‍ड प्रकिया संहिता की धारा- 144 का निषेध करने के कारण 10 दिन जेल में रहे.
  • संस्‍थापक व अध्‍यक्ष (आजीवन), खादी ग्रामोद्योग चिकन संस्‍थान.
  • अध्‍यक्ष, उत्‍तर प्रदेश ‘हरिजन सेवक संघ’ (1979- 1983)
  • 1984 में बनारसी दास ने राजनीति से संन्यास ले लिया.
  • गांधी से प्रभावित नेताओं की तरह बनारसी दास भी गांवों को लेकर गंभीर थे. इन लोगों का मानना था कि भारत की प्रगति गांवों से ही होकर गुजरती है.
  • बाबू बनारसी दास सारे अखबार भोर में ही पढ़ लेते थे.