घर पर कविता| Sweet Home Poem in Hindi

Ghar Par Kavita Hindi Me

Sweet Home Poem in Hindi ( Ghar Par Kavita ) – घर की अहमियत तब समझ में आती है जब हम शहर में जाते है और एक छोटे से कमरे में कई लोगो को रहना पड़ता है. ज्यादा किराया देना पड़ता है. मकान मालिक के तमाम बातों को मानना पड़ता है. खुद के घर से ज्यादा उस एक कमरे का ख्याल रखना पड़ता है. जिस घर में बचपन बीता होता है वहाँ की बहुत सी यादें हमसे जुड़ जाती है. कभी तबियत खराब हो तो घर की बहुत याद आती है. कई बार शहर का वो एक कमरा इतनी तकलीफ दे देता है कि गाँव आने पर अपना घर किसी जन्नत से कम नजर नही आता है.

कुछ लोग जीवन में तरक्की कर लेते है और शहर में जाकर बस जाते है. और अपने पुराने या पुस्तैनी घर को भूल जाते है. धीरे-धीरे समय बीतता है और घर खंडहर में तब्दील हो जाता है. उस खंडहर के घर में ही यादों का अनमोल पिटारा होता है. जो सुकून उस खंडहर के घर में छोड़ कर चले जाते है, उस सुकून को पूरी दुनिया में नहीं पाते है. हर चीज की अहमियत होती है.

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Ghar Par Kavita

घर में जो बड़ा होता है,
वो सबके साथ खड़ा होता है,
जो आलसी होता है
वो बिस्तर पर पड़ा होता है.

तनाव लेने वाले का
बाल झड़ा होता है,
इसके हर काम में
कोई बवाल खड़ा होता है.

जो लोग बड़े होते है,
वो दूसरो के मदत के लिए
हमेशा खड़े होते है.
छोटे लोग अपने
स्वार्थ की गहराईयों
में गड़े होते है.

बुरी आदत हो तो
आखों के नीचे
काला घेरा पड़ जाता है,
पका आम ज्यादा दिन
रख दो तो सड़ जाता है.

पैसा ज्यादा हो
तो इंसान अकड़ जाता है,
चोर कितना भी सयाना हो
एक दिन जरूर पकड़ में आता है.

गुस्से वाला इंसान
अक्सर लड़ जाता है,
लड़ाई ज्याद बढ़ गई
तो गड़बड़ हो जाता है.

घर में कुछ लोग
पढ़ना नहीं चाहते है,
शायद वो अपने जीवन में
आगे बढ़ना नहीं चाहते है.

कुछ लोग खुद को ज्यादा
बुद्धिमान समझते है,
सबकी सुनते है
पर हमेशा अपनी करते है.

दूसरों की तरक्की से जलन है
यह तो हर एक घर का चलन है.
घर, अपना घर, घर होता है जैसा भी हो
हम यहीं पर प्यार पाते है,
बचपन की यादों का भरमार पाते है,
सुरक्षा का एहसास होता है,
जब घर का कोई सदस्य पास होता है.


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