Bidhan Chandra Roy Biography | बिधान चन्द्र रॉय की जीवनी

Bidhan Chandra Roy

Bidhan Chandra Roy Biography in Hindi ( National Doctors’ Day: Celebrated on 1 July, it marks the birth anniversary [and death anniversary] of Dr Bidhan Chandra Roy. ) – डॉ. बिधान चन्द्र रॉय का जन्मदिन 1 जुलाई को भारत में “चिकित्सक दिवस” के रूप में मनाया जाता हैं. इन्हें 1961 में भारत रत्न से सम्मानित किया गया. बिधान चन्द्र रॉय एक चिकित्सक होने के साथ-साथ स्वतंत्रता सेनानी भी थे और वे पश्चिम बंगाल के द्वितीय मुख्यमंत्री भी रहें. बिधान चन्द्र के पूर्वज बंगाल के राजघराने से सम्बंधित थे.

बिधान चन्द्र रॉय की जीवनी | Bidhan Chandra Roy Biography

नाम – बिधान चन्द्र रॉय ( Bidhan Chandra Roy )
जन्म – 1 जुलाई,1882
जन्म स्थान – बन्कीपुर, पटना, बिहार, भारत
मृत्यु – 1 जुलाई 1962 (उम्र 80)
मृत्यु स्थान – कोलकाता, पश्चिम बंगाल, भारत
माता – अघोर्कामिनी देवी ( Aghorkamini Devi )
पिता – प्रकाश चन्द्र रॉय ( Prakash Chandra Roy )
राष्ट्रीयता – भारतीय
राजनीतिक दल – भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ( Indian National Congress )
व्यवसाय – चिकित्सक, राजनेता
पुरस्कार एवं सम्मान – भारत रत्न

बिधान चन्द्र रॉय का जन्म 1 जुलाई,1882 को पटना, बिहार में हुआ. बिधान चन्द्र रॉय ने 1897 में कॉलेजिएट स्कूल ( Collegiate School ) से मैट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण की. पटना कॉलेज से गणित ऑनर्स से बी. ए. की परीक्षा पास की, फिर वे बंगाल इंजीनियरिंग कॉलेज ( Bengal Engineering College ) और कलकत्ता मेडिकल कॉलेज ( Calcutta Medical College ) में एडमिशन पाने के लिए अप्लाई किया. बिधान चन्द्र जी का सिलेक्शन दोनों ही कॉलेज में हो गया, परन्तु इन्होने कलकत्ता मेडिकल कॉलेज में दाखिला लिया. भारत में शिक्षा ग्रहण करने के बाद, उच्च शिक्षा के लिए इंग्लैंड चले गये. विद्रोही बंगाल का निवासी होने के कारण प्रवेश के लिए उनका आवेदन पत्र अनेक बार अस्वीकृत हुआ. बड़ी कठिनाई से प्रवेश पा सके. कष्टमय और साधनामय विद्यार्थी जीवन की नीव पर ही उनके महान व्यक्तित्व का निर्माण हुआ.

बिधान चन्द्र रॉय के बारें में रोचक और महत्वपूर्ण तथ्य | Interesting and Important Facts about Bidhan Chandra Roy

  1. विश्व के डॉक्टरों में डॉक्टर बिधान चन्द्र रॉय का प्रमुख स्थान था. इन्हें प्रारम्भिक प्रसिद्धि एक चिकित्सक के रूप में ही मिला. वे रोगी का चेहरा देखकर ही रोग का निदान और उपचार बता देते थे.
  2. कारमाइकेल मेडिकल कालेज को वर्तमान विकसित स्वरूप प्रदान करने का श्रेय डा. रॉय को ही है. वे इस कालेज के अध्यक्ष एवं जीवन पर्यंत ‘प्रोफेसर ऑव मेडिसिन’ रहे.
  3. वे ‘कलकत्ता मेडिकल क्लब’, ‘इंडियन मेडिकल एसोसिएशन,’ ‘जादवपुर टेक्निकल कालेज’, ‘राष्ट्रीय शिक्षा परिषद्’, भारत सरकार के ‘हायर इंस्टीट्यूट ऑव टेक्नालाजी’, ‘ऑल इंडिया बोर्ड ऑव वायोफिज़िक्स’, तथा यादवपुर विश्वविद्यालय के अध्यक्ष एवं अन्यान्य राष्ट्रीय स्तर की संस्थाओं के सदस्य रहे.
  4. 15 अगस्त, 1947 को उन्हें उत्तरप्रदेश का राज्यपाल नियुक्त किया गया पर वे स्वीकार नहीं किये. प्रदेश की राजनीति में ही रहना अधिक उपयुक्त समझा और वे बंगाल के स्वास्थ मंत्री बने.
  5. 1948 में, जब डॉ. प्रफुल्लचंद्र घोष ने त्याग पत्र देने पर – बिधान चन्द्र रॉय पश्चिम बंगाल के दुसरे ‘मुख्यमंत्री’ बने. विभाजन से त्रस्त तथा शरणार्थी समस्या से ग्रस्त समस्याप्रधान प्रदेश के सफल संचालन में उन्होंने अपूर्व राजनीतिक कुशलता एवं दूरदर्शिता का परिचय दिया.
  6. डॉ रॉय विचारधारा से आजीवन कांग्रेसी और गांधीवादी रहे. 1924 में दार्जिलिंग में गाँधी जी डॉ. रॉय की भेंट हुई तो दोनों में तुरंत दोस्ती हो गई.
  7. इन्हें वर्ष 1961 में “भारत रत्न” से सम्मानित किया गया.