कृष्ण जन्माष्टमी पर श्रीकृष्ण से ये पांच गुण जरूर सीखे

These five qualities must be learned from Shri Krishna on Krishna Janmashtami – कृष्ण जन्माष्टमी को पूरे भारतवर्ष में बड़े ही धूम-धाम से मनाया जाता है. वर्तमान समय में कृष्ण के बहुत सारे विदेशी भक्त भी इसे अपने देश में मनाते है. इस दिन लोग कृष्ण के बाल रूप की पूजा-अर्चना करते है. बहुत से लोग व्रत भी रहते है. मंदिरों में शाम से अर्धरात्रि तक भजन एवं कीर्तिन होता है. घरों में और मंदिरों में कृष्ण की झांकी तैयार की जाती है.

कृष्ण जन्माष्टमी के शुभ अवसर पर स्कूलों और विद्यालय में बच्चे कृष्णा का वेश रखकर अभिनय करते है. घर के बच्चों को कृष्णा की तरह वस्त्र पहनाया जाता है. बांसुरी दी जाती है. सिर पर मोर मुकुट लगाया जाता है और गाल पर थोड़ा सा माखन भी लगा देते है. बच्चे बड़े ही प्यारे बिलकुल कृष्ण के जैसे लगते है. अर्धरात्रि 12 बजे कृष्णा जन्मोत्सव मनाया जाता है. ईश्वर की स्तुति या आराधना करने का यह भी एक तरीका है.

कृष्ण जन्माष्टमी पर कृष्ण से ये पांच गुण जरूर सीखे

कृष्ण जन्माष्टमी का त्यौहार मनाने मात्र से लोगो को असीम प्रसन्नता और आध्यत्मिकता का अनुभव होता है. लेकिन आज के युग में भगवान कृष्णा के गुण और उनके आदर्शों को धारण करने की जरूरत है. आज का समाज और आज के लोग अपनी बुरी आदतों की वजह से खुद को ही नुकसान पहुंचाते है. आइये जाने कृष्णा की किन पांच आदतों को दुनिया के हर समाज को अपनाना चाहिए।

धर्म और न्याय की रक्षा करना

भगवान श्रीकृष्णा ने हमेशा धर्म और न्याय की रक्षा की है. उन्होंने हमेशा अर्धम को मिटाने का प्रयास किया है. कंस का वध करके अपने माता-पिता को मुक्त करना हो या पांडव के साथ हो रहे अन्याय के खिलाफ उन्हें युद्ध के लिए तैयार करना हो. अधर्म या अधर्मी जब बढ़ते है तो समाज में सज्जन व्यक्तियों को सबसे ज्यादा तकलीफ या नुकसान होता है. हर व्यक्ति खुद को इतना सक्षम जरूर बनाये ताकि वो धर्म और न्याय की रक्षा कर सके. अगर आप धर्म और न्याय की रक्षा नहीं कर सकते है तो आपका जीवन और आपका पुरषार्थ व्यर्थ है.

स्त्री का सम्मान करना

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राधा-कृष्णा के प्रेम को पूरी दुनिया जानती है. कृष्णा के प्रति मीरा का प्रेम भी बड़ा अद्भुत है. स्त्री उसी व्यक्ति से प्रेम करती है जो स्त्री का सम्मान करता है. महाभारत में जब पांडव अपनी पत्नी द्रोपती को जुए में हार जाते है और भरी सभा में द्रोपती का चीर हरण होता है तब कृष्णा ही अपने माया से उनके सम्मान की रक्षा करते है. हर कृष्णा भक्त को स्त्री के प्रति सम्मान और आदर की भावना रखनी चाहिए। श्री कृष्णा की पूजा करना अच्छी बात है लेकिन उनके आचरण को धारण करने से जीवन बड़ा ही सुखमय बन जाएगा।

मित्रता निभाना

कृष्णा के परम मित्र सुदामा थे. सुदामा बड़े ही निर्धन ब्राह्मण थे और कृष्णा तीनो लोको के स्वामी थे. परन्तु जब सुदामा उनके द्वार पर आते है और द्वारपाल यह खबर कृष्णा को देते है तब कृष्णा प्रेम के वशीभूत होकर दौड़ते हुए उनके स्वागत के लिए स्वयं पहुँच जाते है. फिर कृष्णा बड़े ही सम्मान पूर्वक सुदामा को अपने महल में लाते है. जीवन में हर व्यक्ति को मित्रता सच्चे हृदय से करनी चाहिए। जब मिले तो सिर्फ प्रेम दिखे। किसी मित्र को अपने धन-वैभव का अहंकार नहीं होना चाहिए और ना ही किसी गरीब मित्र को अपनी निर्धनता पर शर्मिंदा होना पड़े.

शिक्षा ग्रहण करना

कृष्णा ईश्वर के अवतार थे और उन्हें बहुत सारी दिव्य शक्तियां भी प्राप्त थी. उसके बावजूद वो जंगल में जाकर शिक्षा ग्रहण करते है. जीवन के मूल को समझने के लिए शिक्षा और गुरू दोनों की आवश्यकता है. आपकी शिक्षा आपके जीवन दिशा और उद्देश्य को तय करता है. ईश्वर होकर भी वो शिक्षा ग्रहण करने गुरू के पास जाते है. हमे भी शिक्षा ग्रहण करने के लिए विद्यालय और महाविद्यालय में जरूर जाना चाहिए। अपनी पूरी क्षमता और सामर्थ्य का उपयोग शिक्षा ग्रहण में करना चाहिए। इससे आपको और आपसे जुड़े लोग सुख-शांति-प्रेम का अनुभव होगा।

क्षमा करना

क्षमा वीरो की वीरता को बढ़ा देता है. कृष्णा के बुआ के लड़के का नाम शिशुपाल था. जन्म के समय शिशुपाल की चार भुजाएं और तीन आँखे थी. उसके माता-पिता उसे त्यागने वाले थे कि आकाशवाणी हुई कि यह बड़ा ही वीर होगा और जिसके गोद में जाने से इसके दो अतरिक्त भुजाएं और एक अतरिक्त आँख गायब हो जायेगी। वही इसका वध करेगा।

कृष्णा के गोद में जाते ही शिशुपाल के अतरिक्त भुजाएं और आँख गायब हो गए. फिर कृष्णा के बुआ ने उनसे शिशुपाल का वध न करने का वचन माँगा। तब कृष्णा ने कहा कि मैं इसके 100 अपराध क्षमा कर दूंगा। आज के परिवेश में इंसान किसी की एक गलती या अपराध को भी माफ़ करने को तैयार नहीं होता है. क्षमा करना हर व्यक्ति को सीखना चाहिए इससे जीवन सुखमय और ओजस्वी होता है.

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