सुंदरता का अहंकार क्यों नही करना चाहिए?

Sundarta Ka Ahankaar Kyon Nahi Karna Chahiye? – जो नश्वर है उसका अहंकार कैसा? अज्ञानता वश मनुष्य को अक्सर सुंदरता का अहंकार हो जाता है। लेकिन जो यह समझता है कि सुंदरता नश्वर है और वक़्त के साथ खत्म हो जाता है। वह अपनी सुंदरता का अहंकार नही करता है। एक छोटा-सा रोग शरीर को दुर्बल बना देता है। शरीर की सारी सुंदरता को नष्ट कर देता है।

हकीकत में मनुष्य का अपना क्या है? मनुष्य को सब कुछ ईश्वर के द्वारा प्रदान किया गया है। इस दुनिया में हर कोई खाली हाथ आता है और खाली हाथ जाता है। ये सुंदरता भी ईश्वर की ही देन है। लेकिन बहुत से लोग सुंदरता के अहंकार वश दूसरों का उपहास करते है और अपमान करते है। वे यह भूल जाते है कि जिसका उपहास कर रहे है, उसे भी ईश्वर ने बनाया है। सुंदरता के अहंकार में किसी की आत्मा को कष्ट दे रहे है।

मेरा ऐसा मानना है कि सुंदरता का सबसे ज्यादा अहंकार औरतों में होता है। ईश्वर ने पुरुषों की अपेक्षा औरत को ज्यादा सुंदर बनाया है। औरत अपनी सुंदरता के प्रति ज्यादा सम्मोहित होती है। खुद को सुंदर बनाने के लिए सोलह श्रृंगार भी करती है। एक औरत पूरी उम्र खुद को सुंदर मानती है और श्रृंगार करती है। ईश्वर ने स्त्री को सुंदर बनाने के साथ-साथ बड़ी जिम्मेदारी भी सौपी है। जब एक स्त्री बच्चे को जन्म देती है तो वह अपनी सुंदरता खो देती है। लेकिन स्त्री को अपनी सुंदरता खोने का जरा सा भी दुख नही होता है।

सच्ची सुंदरता अच्छे कर्म में है। ज्ञान और शिक्षा ग्रहण करने में है। सच्ची सुंदरता मानव सेवा करने में है। सच्ची सुंदरता परिवार और समाज को सुख देने में है। सुंदरता कर्तव्यों का निर्वहन करने में है। सच्ची सुंदरता ईश्वर की भक्ति में है। सच्ची सुंदरता मन के शुद्ध विचारों में होती है। सच्ची सुंदरता आंतरिक होती है।

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बहुत से युवाओं और युवतियों को अपने रूप और रंग को देखकर मन में हीन भावना आती है। इस हीन भावना को ज्ञान और शिक्षा की सुंदरता से निकालना चाहिए। इस दुनिया में इंसान का कर्म अमर होता है। मनुष्य के आंखों के सामने यौवन और सुंदरता आती है और नष्ट हो जाती है।

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