महाराणा प्रताप शायरी | Maharana Pratap Shayari

Maharana Pratap Shayari

Maharana Pratap Shayari in Hindi (Maharana Pratap Jayanti Shayari) – महाराणा प्रताप के शौर्य और वीरता की गाथा बहुत ही रोचक और अद्भुत हैं जिसे सुनकर रोम-रोम ऊर्जावान हो जाता हैं.

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महाराणा प्रताप पर शायरी | Shayari on Maharana Pratap

जो मातृभूमि की स्वतन्त्रता के लिए हर कष्ट सहन करते हैं,
रण में जो कभी हार नहीं माने उसको महाराणा प्रताप कहते हैं,


प्रताप का सिर कभी नहीं झुका,
इस बात से अकबर भी शर्मिंदा था,
मुगल कभी चैन से सो न सके
जब तक मेवाड़ी राणा जिन्दा था.


महाराणा प्रताप जैसे वीर हर हिन्दुस्तानी को प्यारा हैं,
मेवाड़ी सरदार के चरणों में शत-शत नमन हमारा हैं.


अकबर भी प्रताप के वीरता से घबराया था,
तभी तो हल्दीघाटी के युद्ध में वह स्वयं नही आया था,


राजपुताने की आन है राणा,
राजपुताने की शान है राणा,
वीरों के लिए एक पैगाम है राणा,
भारत के वीर पुत्र का नाम है राणा.


प्रताप के शौर्य की गाथा हर कोई सुनाएगा गाकर.
मातृभूमि भी धन्य हो गई प्रताप जैसा पुत्र पाकर,


महाराणा प्रताप से अकबर भी डरता था,
फिर स्वयं को वह वीर कैसे कहता था.


शत-शत नमन उस मेवाड़ी प्रताप को
जो अपने भाले से दुश्मनों को मारे थे,
मातृभूमि की स्वतन्त्रता के खातिर
कई वर्ष जंगल में गुजारे थे.


वीरों के साथ ही वीर रहते हैं,
राणा के घोड़े को चेतक कहते हैं.


साहस का प्रतीक नीले घोड़े पर सवार,
वीरता का प्रतीक मेरा मेवाड़ी सरदार.


मातृभूमि के लिए सर्वस्व निछावर कर जाऊँगा,
वक्त आने पर मैं भी मेवाड़ी राणा बन जाऊँगा.


Maharana Pratap Shayari Images
Maharana Pratap Shayari Image

महाराणा प्रताप के शौर्य को शत-शत वंदन हैं,
धन्य है राजस्थान जिसका माटी भी चंदन हैं.


हर हिन्दुस्तानी को महाराणा प्रताप जैसा बनना चाहिए,
मातृभूमि की सेवा के लिए तन-मन-धन से तैयार रहना चाहिए.


हल्दीघाटी के युद्ध में मेवाड़ी वीरों ने कोहराम मचाया था,
महाराणा प्रताप की वीरता देख अकबर भी घबराया था.


सबसे बड़ा पाप है अन्याय को सह जाना,
वीरों को शोभा नहीं देता चुप रह जाना.


हल्दीघाटी के युद्ध में
प्रताप के तलवार को देखकर शत्रु भाग रहा था,
राणा की एक हुंकार से पूरा अरि दल काँप रहा था.


आगे नदिया पड़ी अपार
घोड़ा कैसे उतरे उस पार,
राणा ने सोचा इस पार
तब तक चेतक था उस पार.


सूरज का तेज भी फीका पड़ता था,
जब राणा अपना मस्तक ऊँचा करता था,
थी उसमें कोई बात निराली
इसलिए अकबर भी राणा से डरता था.


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