जापानी इन्सेफ़ेलाइटिस लक्ष्ण और बचाव

Japanese Encephalitis JE

Japani or Japanese Encephalitis (जापानी या जैपनीज इन्सेफ़ेलाइटिस) – को मुख्यतः मस्तिष्क ज्वर या दिमागी बुखार के नाम से भी जाना जाता हैं. भारत के बहुत सारे राज्य इस बीमारी की चपेट में हैं. इस बीमारी का प्रकोप खासकर भारत के उत्तर प्रदेश राज्य में हैं यहाँ पर इसका प्रकोप हर साल जुलाई से लेकर नवम्बर तक रहता हैं.

जापानी या जैपनीज इन्सेफ़ेलाइटिस क्या हैं? (What is Japani or Japanese Encephalitis)

जे. ई. या जापानी मस्तिष्क ज्वर एक घातक संक्रमण बीमारी हैं, जो फ्लेवि वायरस के संक्रमण से होता हैं, यह बीमारी 1871 में, जापान में पता की गई इसलिए इसका नाम जापानी या जैपनीज इन्सेफ़ेलाइटिस पड़ा. सूअर और जंगली पंक्षी के शरीर में जे. ई. के वायरस होते हैं जिसकी वजह से यह मुख्यतः फैलता हैं.

जापानी इन्सेफ़ेलाइटिस के लक्ष्ण (Symptoms of Japani Encephalitis)

  1. बुखार, सिरदर्द, कपकपी, उलटी और संक्रमण जापानी इन्सेफ़ेलाइटिस बीमारी का लक्ष्ण हैं.
  2. तेज बुखार, सिरदर्द और गले में अकड़न जैसे लक्ष्ण इस बीमारी में मुख्यतः मालूम पड़ते हैं.
  3. जे. ई. पीड़ित व्यक्ति को झटके आते हैं और बीमारी बढ़ने की अवस्था में लकवे और कोमा में जाने की संभावना बढ़ जाती हैं.
  4. जे. ई. से पीड़ित बच्चो की दिमागी हालत असामान्य रहती हैं.

जापानी इन्सेफ़ेलाइटिस से बचाव के उपाय (Japanese Encephalitis Tips to Prevention)

  1. घर में या घर के आस-पास गन्दा पानी जमा न होने दे.
  2. कूलर का पानी और गमले का पानी समय-समय पर बदलते रहे, अन्यथा कूलर या गमले के गंदे पानी में ख़तरनाक मच्छर पैदा हो सकते हैं.
  3. गेंदे के फूल में मच्छररोधी गुण पाएँ जाते हैं इसलिए घर के आसपास या गमले में गेंदे का फूल जरूर लगाएँ
  4. सूअर के शरीर में जापानी इन्सेफ़ेलाइटिस के वायरस पाए जाते हैं इसलिए इनका पालन गाँव के बाहर या कस्बों से दूर होना चाहिए.
  5. घर की और घर के आसपास साफ़-सफ़ाई रखे.
  6. मच्छरों से बचाव के लिए मच्छरदानी का प्रयोग जरूर करे.
  7. बच्चे जहाँ खेलते हैं वहाँ की भी सफ़ाई का ध्यान रखे.
  8. बचाव ही जानकारी हैं इसलिए इस बीमारी के बारे में खुद को जागरूक बनाये और दूसरो की भी जागरूक करे.

नोट – जापानी इन्सेफ़ेलाइटिस संक्रमण की संभावना होने पर फौरन डॉक्टर की सलाह ले क्योकि आपकी लापरवाही जानलेवा हो सकती हैं, इस बीमारी में जितनी जल्दी डॉक्टर के सम्पर्क में आकर दवा शुरू कर देंगे उतना ही अच्छा होगा.