Gopaldas Neeraj Shayari Status Quotes Poem in Hindi | गोपालदास नीरज शायरी

Gopaldas Neeraj Shayari Status Quotes Poem Images in Hindi – पद्म श्री और पद्म भूषण से सम्मानित गोपालदास नीरज एक हिंदी साहित्यकार, शिक्षक, कवि सम्मेलनों के मंचों पर काव्य वाचक एवं फिल्मों के गीत लेखक थे. इनकी रचनाएँ जीवन के सत्य को बड़े आसानी से कहती है. जिसे पढ़ने के बाद जीवन को एक नये तरीके से सोचने का मौका मिलता है. इनकी रचनाओं में अध्यात्म की झलक दिखती है.

गोपालदास सक्सेना ‘नीरज’ का जन्म 04 जनवरी, 1925 ई. में हुआ. इनका जन्मस्थान उत्तरप्रदेश है. इनके पिता का नाम ब्रजकिशोर सक्सेना था. मात्र 6 वर्ष की आयु में इनके पिता का स्वर्गवास हो गया. 1942 में हाईस्कूल की परीक्षा फर्स्ट डिवीज़न पास की. इसके बाद वे पढ़ाई के साथ-साथ नौकरी भी करने लगे. 1949 में बारहवीं की परीक्षा पास की. 1951 में बी. ए. की परिक्षा पास की. 1953 में हिंदी साहित्य से ऍम. ए. किया.

इस पोस्ट में दिये शायरी स्टेटस कोट्स गोपाल दास नीरज की रचनाओं से लिए हुए है. इनकी रचनाओं को कोई एक बार पढ़ ले तो वो इनका दीवाना हो जाएगा. इन्होंने अपनी रचनाओं में शब्दों का बड़ा ही बेहतरीन प्रयोग किया है. कम शब्दों में बड़ी बात कैसे कही जाती है. यह हुनर इनकी रचनाओं को पढकर युवा कवि और कलमकार सीख सकते है.

Gopaldas Neeraj Shayari in Hindi

इतने बदनाम हुए हम तो इस ज़माने में,
लगेंगी आपको सदियाँ हमें भुलाने में,
न पीने का सलीका न पिलाने का शऊर,
ऐसे भी लोग चले आये हैं मयखाने में.


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अब तो मज़हब कोई ऐसा भी चलाया जाए,
जिस में इंसान को इंसान बनाया जाए.


हाथ मिले और दिल न मिलें
ऐसे में नुकसान रहेगा
जब तक मन्दिर और मस्जिद हैं
मुश्किल में इन्सान रहेगा.


बदन पे जिस के शराफ़त का पैरहन देखा
वो आदमी भी यहाँ हम ने बद-चलन देखा


Gopaldas Neeraj Shayari

तमाम उम्र मैं इक अजनबी के घर में रहा
सफ़र न करते हुए भी किसी सफ़र में रहा


हम तिरी चाह में ऐ यार वहाँ तक पहुँचे
होश ये भी न जहाँ हैं कि कहाँ तक पहुँचे


है बहुत अँधियार अब सूरज निकलना चाहिए
जिस तरह से भी हो ये मौसम बदलना चाहिए


गोपालदास नीरज शायरी

बड़ा न छोटा कोई फ़र्क़ बस नज़र का है
सभी पे चलते समय एक सा कफ़न देखा


ख़ुशबू सी आ रही है इधर ज़ाफ़रान की
खिड़की खुली है फिर कोई उन के मकान की


ख़ुशी जिसने खोजी वो धन लेके लौटा,
हँसी जिसने खोजी वो चमन लेके लौटा,
मगर प्यार को खोजने जो चला वो
न तन लेके लौटा, न मन लेके लौटा.


Gopaldas Neeraj Status in Hindi

सपनों के मर जाने से
जीवन नही मर करते है.


जितना कम सामान रहेगा
उतना सफ़र आसान रहेगा


मुझको जीवन आधार नही मिलता
आशाओं का संसार नहीं मिलता


Gopaldas Neeraj Quotes in Hindi

तब मानव कवि बन जाता है,
जब उसको संसार रुलाता,
वो अपनों के समीप जाता,
पर जब वे भी ठुकरा देते
वह निज मन के सम्मुख आता,
पर उसकी दुर्बलता पर जब मन भी उसका मुस्काता है.
तब मानव कवि बन जाता है.


हार न अपनी मानूँगा मैं!
चाहे पथ में शूल बिछाओ
चाहे ज्वालामुखी बसाओ,
किन्तु मुझे जब जाना ही है
तलवारों की धारों पर भी,
हँस कर पैर बढ़ा लूँगा मैं.


जीवन जहाँ खत्म हो जाता !
उठते-गिरते,
जीवन-पथ पर
चलते-चलते,
पथिक पहुँच कर,
इस जीवन के चौराहे पर,
क्षणभर रुक कर,
सूनी दृष्टि डाल सम्मुख जब पीछे अपने नयन घुमाता !
जीवन वहाँ ख़त्म हो जाता !


Gopal Das Neeraj Famous Poems in Hindi

स्वप्न झरे फूल से
मीत चुभे शूल से
लुट गए सिंगार सभी बाग़ के बबूल से
और हम खड़े-खड़े बहार देखते रहे
कारवां गुज़र गया गुबार देखते रहे!

नींद भी खुली न थी कि हाय धूप ढल गयी
पाँव जब तलक उठें कि ज़िन्दगी फिसल गयी
पात-पात झर गए कि शाख-शाख जल गयी
चाह तो सकी निकल न पर उमर निकल गयी
गीत अश्क़ बन गए
छंद हो हवन गए
साथ के सभी दिए, धुआँ पहन-पहन चले
और हम झुके-झुके
मोड़ पर रुके-रुके
उम्र के चढ़ाव का उतार देखते रहे
कारवाँ गुज़र गया गुबार देखते रहे!

क्या शबाब था कि फूल-फूल प्यार कर उठा
क्या सरूप था कि देख आइना सिहर उठा
इस तरफ़ ज़मीन और आसमां उधर उठा
थाम कर जिगर उठा कि जो मिला नज़र उठा
एक दिन मगर यहाँ
ऐसी कुछ हवा चली
लुट गयी कली-कली कि घुट गयी गली-गली
और हम दबी नज़र
देह की दुकान पर,
साँस की शराब का खुमार देखते रहे
कारवाँ गुज़र गया गुबार देखते रहे!

आँख थी मिली मुझे कि अश्रु-अश्रु बीन लूं
होंठ थे खुले कि चूम हर नज़र हसीन लूं
दर्द था दिया गया कि प्यार से यकीन लूँ
और गीत यूँ कि रात से चिराग छीन लूं
हो सका न कुछ मगर
शाम बन गई सहर,
वह उठी लहर कि ढह गए किले बिखर-बिखर
और हम लुटे-पिटे,
वक्त से पिटे-पिटे,
दाम गाँठ के गँवा, बाज़ार देखते रहे!
कारवां गुज़र गया गुबार देखते रहे

माँग भर चली कि एक जब नयी-नयी किरण
ढोलकें धुनुक उठीं ठुमुक उठे चरण-चरण
शोर मच गया कि लो चली दुल्हन, चली दुल्हन
गाँव सब उमड़ पडा बहक उठे नयन-नयन
पर तभी ज़हर भारी
गाज एक वह गिरी
पुंछ गया सिन्दूर तार-तार हुई चूनरी
और हम अजान से
दूर के मकान से
पालकी लिए हुए कहार देखते रहे
कारवां गुज़र गया गुबार देखते रहे

एक रोज़ एक गेह चांद जब नया उगा
नौबतें बजीं, हुई छटी, डठौन, रतजगा
कुण्डली बनी कि जब मुहूर्त पुण्यमय लगा
इसलिए कि दे सके न मृत्यु जन्म को दग़ा
एक दिन न पर हुआ
उड़ गया पला सुआ
कुछ न कर सके शकुन, न काम आ सकी दुआ
और हम डरे-डरे
नीर नैन में भरे
ओढ़कर कफ़न पड़े मज़ार देखते रहे
चाह थी न किन्तु बार-बार देखते रहे
कारवां गुज़र गया गुबार देखते रहे


Gopal Das Neeraj Poem in Hindi

मैं तूफ़ानों मे चलने का आदी हूं..
तुम मत मेरी मंजिल आसान करो..

हैं फ़ूल रोकते, काटें मुझे चलाते..
मरुस्थल, पहाड चलने की चाह बढाते..
सच कहता हूं जब मुश्किलें ना होती हैं..
मेरे पग तब चलने मे भी शर्माते..
मेरे संग चलने लगें हवायें जिससे..
तुम पथ के कण-कण को तूफ़ान करो..

मैं तूफ़ानों मे चलने का आदी हूं..
तुम मत मेरी मंजिल आसान करो..

अंगार अधर पे धर मैं मुस्काया हूं..
मैं मर्घट से ज़िन्दगी बुला के लाया हूं..
हूं आंख-मिचौनी खेल चला किस्मत से..
सौ बार म्रत्यु के गले चूम आया हूं..
है नहीं स्वीकार दया अपनी भी..
तुम मत मुझपर कोई एह्सान करो..

मैं तूफ़ानों मे चलने का आदी हूं..
तुम मत मेरी मंजिल आसान करो..

शर्म के जल से राह सदा सिंचती है..
गती की मशाल आंधी मैं ही हंसती है..
शोलो से ही श्रिंगार पथिक का होता है..
मंजिल की मांग लहू से ही सजती है..
पग में गती आती है, छाले छिलने से..
तुम पग-पग पर जलती चट्टान धरो..

मैं तूफ़ानों मे चलने का आदी हूं..
तुम मत मेरी मंजिल आसान करो..

फूलों से जग आसान नहीं होता है..
रुकने से पग गतीवान नहीं होता है..
अवरोध नहीं तो संभव नहीं प्रगती भी..
है नाश जहां निर्मम वहीं होता है..
मैं बसा सुकून नव-स्वर्ग “धरा” पर जिससे..
तुम मेरी हर बस्ती वीरान करो..

मैं तूफ़ानों मे चलने का आदी हूं..
तुम मत मेरी मंजिल आसान करो..

मैं पन्थी तूफ़ानों मे राह बनाता..
मेरा दुनिया से केवल इतना नाता..
वेह मुझे रोकती है अवरोध बिछाकर..
मैं ठोकर उसे लगाकर बढ्ता जाता..
मैं ठुकरा सकूं तुम्हें भी हंसकर जिससे..
तुम मेरा मन-मानस पाशाण करो..

मैं तूफ़ानों मे चलने का आदी हूं..
तुम मत मेरी मंजिल आसान करो..


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