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धर्म और कर्म

मनुष्य के कर्म और धर्म का बहुत ही घनिष्ठ सम्बन्ध होता हैं, अच्छा कर्म सदा से ही धर्म का संवाहक रहा हैं. धर्म से ही मनुष्य उन्नति करता हैं. धर्म मनुष्य के विचारों और कर्मो में सकारात्मकता लाती हैं जिससे जीवन सुखमय और आसान बन जाता हैं. कर्म (कार्य) करने से धन की प्राप्ति होती हैं, धन से धर्म होता हैं और धर्म होने से कार्य में वृद्धि होती हैं.

धर्म पालन करने के मार्ग में सबसे अधिक बाधा चित्त की चंचलता, उद्देश्य की अस्थिरता और मन की निर्बलता से पड़ती हैं. मनुष्य के कर्तव्य मार्ग में एक ओर तो आत्मा के बुरे-भले कर्मो का ज्ञान दूसरी ओर आलस्य और स्वार्थपरता रहती हैं. बस मनुष्य इन्ही दोनों के बीच पड़ा रहता हैं. अंत में यदि उसका मन पक्का हुआ तो वह आत्मा की आज्ञा मानकर अपना धर्म पालन करता हैं, यदि उसका मन दुविधा में हैं तो स्वार्थपरता उसे निश्चित ही घेरेगी और उसका चरित्र घृणा के योग्य हो जाएगा. इसलिए यह बहुत आवश्यक हैं कि आत्मा जिस बात को करने के लिए प्रवृति दे, उसे बिना स्वार्थ सोचे, झटपट कर डालना चाहिए.

इस संसार में जितने भी बड़े-बड़े लोग हुए है, सभी ने अपने कर्तव्य को श्रेष्ठ माना हैं, क्योकि जितने कर्म उन्होंने किये उन सबने अपने कर्तव्य पर ध्यान देकर न्याय का बर्ताव किया. जिन जातियों में यह गुण पाया जाता हैं, वे ही संसार में उन्नित करती हैं और संसार में उनका नाम बड़े ही आदर से लिया जाता हैं. जो लोग स्वार्थी होकर अपने कर्तव्य पर ध्यान नही देते, वे संसार में लज्जित होते हैं और सब लोग उनसे घृणा करते हैं. कर्तव्य पालन और सत्यता में बड़ा घनिष्ठ सम्बन्ध हैं. जो व्यक्ति अपने कर्तव्य का पालन करता हैं वो अपने कर्मो और वचनों में सत्यता का बर्ताव रखता हैं. सत्यता ही एक ऐसी वस्तु हैं जिससे इस संसार में मनुष्य अपने कार्यों में सफलता पा सकता हैं, क्योकि इस संसार में झूठ की उम्र बहुत छोटी होती हैं.

झूठ की उत्पत्ति पाप, कुटिलता और कायरता से होती हैं, झूठ बोलना कई रूपों में दिखाई देता हैं जैसे कि चुप रहना, किसी बात को बढ़ा कर कहना, किसी बात को छिपाना, झूठ में ही दूसरों की हाँ में हाँ मिलाना आदि. कुछ ऐसे लोग भी होते हैं जो मुहँ देखी बात बनाया करते हैं, पर करते वही हैं जो उन्हें रुचता हैं. ऐसे लोग मन में समझते हैं कैसे सबको मूर्ख बनाकर हमने अपना काम कर लिया, पर वास्तव में वो अपने को ही मूर्ख बनाते हैं और अंत में उनकी पोल खुल जाने पर समाज के लोग उनसे घृणा करते हैं.

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