राष्ट्रीय किसान दिवस की पूरी जानकारी | National Farmers Day | Kisan Diwas

National Farmers Day or Kisan Diwas in Hindi – प्रत्येक वर्ष 23 दिसम्बर को भारत के 5वें प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के जन्म दिन को “राष्ट्रीय किसान दिवस” के रूप में मनाया जाता हैं. इन्हें किसानो का मसीहा भी कहा जाता हैं.

चौधरी चरण सिंह | Chaudhary Charan Singh जी को किसानों का नेता कहा जाता हैं क्योकि उनके द्वारा तैयार किया गया ‘जमींदारी उन्मूलन विधेयक’ राज्य के कल्याणकारी सिद्धांत पर आधारित था. 1जुलाई, 1952 को उत्तर प्रदेश में उनके बदौलत जमींदारी प्रथा का उन्मूलन हुआ और गरीबों को अधिकार मिला. इसमें बहुत सारे भूमिहीन किसानो को जमीने मिली. किसानो के हित में उन्होंने 1954 में उत्तर प्रदेश में ‘भूमि संरक्षण’ क़ानून को पारित कराया.

Chaudhary Charan Singh Biography in Hindi | चौधरी चरण सिंह का जीवन परिचय

पूरा नाम – चौधरी चरण सिंह
जन्म – 23 दिसम्बर, 1902
जन्म भूमि – नूरपुर ग्राम, मेरठ, उत्तर प्रदेश,
मृत्यु – 29 मई, 1987
अभिभावक – चौधरी मीर सिंह
पत्नी – गायत्री देवी
नागरिकता – भारतीय
प्रसिद्धि – किसान नेता
पार्टी – काँग्रेस और लोक दल
कार्य काल – 28 जुलाई, 1979-14 जनवरी, 1980
शिक्षा – विज्ञान स्नातक, कला स्नातकोत्तर और विधि
विद्यालय – सरकारी उच्च विद्यालय, मेरठ
भाषा – हिन्दी, अंग्रेज़ी और उर्दू
विशेष योगदान – लेखन, स्वाधीनता संग्राम, भारत के पाँचवें प्रधानमंत्री

किसान दिवस या राष्टीय किसान दिवस | Kisan Diwas | National Farmers Day

भारत की एक बहुत बड़ी आबादी आज भी कृषि से अपना जीवकोपार्जन करती हैं. अगर किसनों के आत्महत्या के आकड़ो को देखा जाय तो देश की राजनीतिक पार्टियों की उदासीनता का पता चलता हैं. आज के राजनीति में एक बार फिर से ‘चौधरी चरण सिंह’ जैसे किसान प्रिय नेता की जरूरत हैं जो किसानो के हित में कड़े फैसले ले सके. एक किसान जितनी मेहनत कर सकता हैं शायद कोई न कर सके इसके बावजूद भी वो भर पेट भोजन के लिए तरस जाते हैं.

किसानों की बदहाली के लिए कौन जिम्मेदार हैं?

किसानो की बदहाली का सबसे बड़ा कारण अशिक्षा हैं. आज के टेक्नोलॉजी युग में एक शिक्षित किसान खेत से अच्छी कमाई कर रहा हैं और खाली समय में अन्य माध्यम से पैसा कमाने के लिए सोच रहा हैं लेकिन यह कुछ ही किसानो तक सीमित हैं. इसके लिय सरकार को जागरूक होना चाहिए और किसानों की शिक्षा बहुत ही जरूरी हैं. किसानो से सम्बन्धित सरकारी कार्य सरल और भ्रष्टाचार मुक्त होना चाहिए. बड़े सेठो से ऊँचे ब्याज दर पर पैसे लेना भी इनकी आत्महत्या का एक कारण हैं इस पर सरकार को कोई कड़ा नियम बनाना चाहिए जिससे किसान बच सके. बहुत सारे ऐसे तथ्य हैं अगर सरकारों के द्वारा उनमे सुधार कर दिया जाय तो किसानो की हालत में सुधार आ सकता हैं. उन्हें अपने गाँव को छोड़कर शहरो की तरफ पलायन नही करना पड़ेगा.