गोपाल कृष्ण गोखले की जीवनी | Biography of Gopal Krishna Gokhale

Gopal Krishna Gokhale

Gopal Krishna Gokhale Biography in Hindi – गोपाल कृष्णा गोखले, महादेव गोविन्द रानाडे के अनुयायी थे. महादेव गोविन्द रानाडे को महाराष्ट्र का सुकरात कहा जाता हैं. अपने गुरू रानाडे की तरह गोखले समभाव और मृदु न्यायप्रियता की नीति में विश्वास करते थे. महात्मा गांधी, गोखले जी को अपना राजनीतिक गुरू मानते थे.

गोखले जी एक स्वतन्त्रता सेनानी, समाजसेवी, विचारक एवं सुधारक थे. इन्हें वित्तीय मामलों की बहुत अच्छी जानकारी थे जिसके कारण इने भारत का ‘ग्लेडस्टोन‘ कहा जाता हैं. इनका मानना था कि वैज्ञानिक और तकनीकी शिक्षा भारत की महत्वपूर्ण आवश्यकता हैं.

गोपालकृष्ण गोखले का जीवन परिचय | Gopal Krishna Gokhale Biography in Hindi

नाम – गोपाल कृष्ण गोखले ( Gopal Krishna Gokhale )
जन्म – 9 मई, 1866
जन्म स्थान – कोथलुक (Kothluk), रत्नागिरी, बॉम्बे प्रेसीडेंसी (अब महाराष्ट्र)
पिता – कृष्णा राव गोखले
माता – वालुबाई गोखले
विवाह – दो विवाह, पहला 1870 में और दूसरा 1877 में
संतान (दो बेटियाँ) – काशीबाई (Kashibai) और गोदुबाई (Godubai)
शिक्षा – एलफिस्टन कॉलेज ( Elphinstone College ), 1884 में बी. ए. पास
व्यवसाय – प्रोफेसर और राजनीतिज्ञ
राष्ट्रीयता – भारतीय
संस्थापक – भारत सेवक मंडल (Servants of India Society) (1905 में)
आंदोलन – भारतीय स्वतंत्रता संघर्ष
राजनीतिक विचारधारा – उदारवाद, समाजवाद
धार्मिक दृष्टिकोण – हिन्दू धर्म
मृत्यु – 19 फरवरी, 1915

सामाजिक और राजनैतिक नेता गोपाल कृष्ण गोखले भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलन के मार्गदर्शको में से एक थे. वह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के वरिष्ठ नेता थे. देश की आजादी और राष्ट्र निर्माण में गोपाल कृष्ण गोखले का योगदान अमूल्य हैं.

गोखले जी का जन्म एक ब्राह्मण वंश में हुआ. ग्रेजुएशन की परीक्षा पास करने के बाद वह रानाडे द्वारा स्थापित दक्कन शिक्षा सभा ‘Daccan Education Society’ में सम्मिलित हो गये. उन्होंने 20 वर्ष तक इस सभा की सेवा भिन्न-भिन्न रूपों में की.

गोखले जी ने पहली बार 1889 के इलाहाबाद कांग्रेस अधिवेशन के मंच से राजनीति में भाग लिया. 1902 में वह बम्बई संविधान परिषद के लिए और कालान्तर में Imperial Legislative Council के लिए चुने गये. परिषद में शीघ्र ही उनका एक प्रभावशाली वक्ता के रूप में नाम हो गया. उनका विशेष चातुर्य यह था कि वह कड़वी बात मीठे से मीठे शब्दों में कह सकते थे. विधान परिषद में उनका बजट पर भाषण सुनने वाले स्तब्ध रह जाते थे. वह एक सूक्ष्म दृष्टि से व्ययों की आलोचना करते थे. उन्होंने नमक के कर ( Salt Tax ) पर प्रहार किया और बताया कि कैसे एक पैसे की नमक की टोकरी पांच आने में ( 20 गुणा मूल्य पर ) बिकती हैं.

उन्होंने अंग्रेजो द्वारा ऊँचे पदों पर भारतीयों की नियुक्तियों की विषय में उनके कथनों की पोल खोल दी. उन्होंने बतलाया कि एक ओर तो अंग्रेज हमें बराबरी का अधिकार देने का दावा करते हैं और दूसरी ओर 1994 में स्पष्ट रूप से यह कहा गया कि ऊँचे-ऊँचे पद सदैव के लिए अग्रेजों के पास रहने चाहिए. पहले वह राष्ट्रीय कांग्रेस के संयुक्त सचिव के रूप में कार्य करते रहे और फिर 1905 में उन्होंने बनारस के अधिवेशन की अध्यक्षता की. 1906 में वह इंग्लैण्ड गये और 1909 के मिन्टो-मारले सुधारों के बनाने में विशेष भूमिका निभाई. 1910 में वह पुनः साम्राज्यीय विधान परिषद के लिए चुने गये. उन्होंने 1912-1915 तक भारतीय लोक सेवा आयोग ( Indian Public Service Commission ) के सदस्य के रूप में काम किया. 1913 में उन्होंने समस्त भारत में निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा लागू करने का भरसक प्रयत्न किया.

अन्य महत्वपूर्ण और रोचक जानकारी | Other Important and Interesting Facts

  1. गोपाल कृष्ण गोखले अपने राजनैतिक दर्शन में वह सच्चे और उदारवादी थे. वह समभाव और मृदु न्यायप्रियता में विश्वास करते थे. इन्ही कारणों से महात्मा गांधी और जिन्ना उनसे प्रभावित हुए और उनके राजनैतिक शिष्य बन गये.
  2. गोखले एजुकेशनल सोसाइटी 50 से ज्यादा शिक्षण संस्थान चला रही हैं, जो मुंबई, नासिक, कोंकण आदि स्थानों पर हैं.
  3. भारत सेवक मण्डल ( Servants of India Society ) जिसका उद्देश्य भारत की सेवा के लिए राष्ट्रीय प्रचारक तैयार करना था और संवैधानिक ढंगों से भारतीय जनता के सच्चे हितों को प्रोत्साहन देना था.