हड़प्पा या सिन्धु सभ्यता का कालनिर्धारण

Harappan Sabhyata Ka Kaal Nirdharan

Reconciliation of Harappa or Indus Civilization in Hindi – हड़प्पा सभ्यता या सिन्धु सभ्यता का कालक्रम निर्धारण करना एक जटिल कार्य हैं. इसकी लिपि का उद्वाचन न हो पाना इसे जटिलतर बना देता हैं. प्रारम्भ में इसका काल निर्धारण प्रमुख रूप से मेसोपोटामिया ( Mesopotamia ) में ‘उर‘ और ‘किश‘ स्थलों पर प्राप्त हड़प्पाई मुद्राओं के आधार पर किया गया. अनेक विद्वानों ने इस सभ्यता के निम्न कालक्रम सुझाए हैं.

हड़प्पा सभ्यता या सिन्धु सभ्यता का कालनिर्धारण | Harappan Sabhyata Ya Sindhu Sabhyata Ka Kaal Nirdharan

अनेक विद्वानों ने अपने मतानुसार इस सभ्यता को विभिन्न कालों में बताया गया हैं.

1- 3500 ई. पू. से 1300 ई. पू.

यह काल-क्रम रेडियो कार्बन विधि के आधर पर निर्धारित किया गया है. इसके तीन चरण निम्नलिखित हैं.

  • पूर्व हड़प्पाई चरण              – लगभग 3500 ई. पू. से 2600 ई. पू.
  • परिपक्क हड़प्पाई चरण        – लगभग 2600 ई. पू. से 1900 ई. पू.
  • उत्तर हड़प्पाई चरण            – लगभग 1900 ई. पू. से 1300 ई. पू.

लगभग 1900 ई. पू. के बाद हड़प्पाई सभ्यता की एकरूपता कमजोर हो गई और प्रादेशिक रूपांतरण उत्पन्न होने लगा. सिन्धु सभ्यता का यह काल क्रम सार्वधिक मान्य है.

कार्बन डेटिंग से 50 हजार वर्ष तक के जीवाश्मों की आयु आसानी से ज्ञात की जा सकती है. इससे पुरानी वस्तुओ की आयु ज्ञात करने के लिए (यथा पृथ्वी की) यूरेनियम डेटिंग का प्रयोग होता हैं.

2 – 2500 ई. पू. से 1500 ई. पू.

यह काल-क्रम सर मार्टीमर व्हीलर द्वारा निर्धारित किया गया हैं. चूँकि मेसोपोटामिया के शासक सारगोन के काल ( 2350 ई. पू. ) में सिन्धु सभ्यता का व्यापार चरम अवस्था में था, अतः इसकी निम्न सीमा 2500 ई. पू. निर्धारित की गई. 1500 ई. पू. से ऋग्वेद का काल प्रारम्भ होता है. अतः यह इसकी उच्च सीमा है.

3 – 2350 ई. पू. से 1750 ई. पू.

यह काल क्रम श्री डी. पी. अग्रवाल द्वारा निर्धारित किया गया है. उनके मतानुसार 1750 ई. पू. से इस सभ्यता का पतन प्रारम्भ हो गया और 1500 ई. पू. तक आते-आते यह सभ्यता विनष्ट हो गई.

4- 3250 ई. पू. से 2750 ई. पू.

सर जॉन मार्शल, जिन्होंने मोहनजोदड़ो में व्यापक उत्खनन कार्य किये थे, ने यह कालक्रम निर्धारित किया है, उन्होंने यह विचार भी व्यक्त किया कि इस अवधि को सिन्धु सभ्यता के पूरे उत्थान और पतन के साथ नहीं जोड़ा जाना चाहिए.

5 – 2800 ई. पू. से 2500 ई. पू.

यह काल मैके द्वारा निर्धारित किया गया है. इन्होंने मोहनजोदड़ो का उत्खनन कार्य कराया था.

6 – 3500 ई. पू. से 2500 ई. पू.

यह कालक्रम एम. एस. वत्स द्वारा निर्धारित किया गया है. इन्होंने हड़प्पा का उत्खनन कार्य करवाया था.

7- 2900 ई. पू. से 1900 ई. पू.

यह डेल्स द्वारा निर्धारित कालक्रम है. उन्होंने कोटिदीजी, आमरी, मोहनजोदड़ो, हड़प्पा, कालीबंगा, लोथल और रोजदी सहित दक्षिण एशिया के अनेक समकालीन स्थलों का तुलनात्मक अध्ययन करके यह निष्कर्ष निकाला.

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