बाल मजदूरी पर निबन्ध और पूरी जानकारी | Child Labour in Hindi

Essay on Child Labour in Hindi

Essay on Child Labour in Hindi – बाल मजदूरी समाज और देश के लिए एक अभिशाप हैं. बचपन की उम्र में पढ़ने, खेलने-कूदने और संस्कार ग्रहण करने का समय होता हैं. परन्तु कुछ बच्चों के नसीब में यह सब नहीं होता हैं. जिन नाजुक हाथों में किताबें और खिलौने होने चाहिए और चेहरे पर हंसी होनी चाहिए, उन नाजुक हाथों को कूड़ा उठाते देखकर बड़ा अफ़सोस होता है. बाल मजदूरी में उनके साथ जो बर्ताव होता हैं और उनकी उदासी देखकर दिल रो देता हैं. हमारे देश भारत में बाल मजदूरी एक विकट समस्या हैं जो दिनों दिन बढ़ती जा रही हैं.

What is Child Labour in Hindi – “बाल-श्रम का मतलब ऐसे कार्य से है जिसमे की कार्य करने वाला व्यक्ति कानून द्वारा निर्धारित आयु सीमा से छोटा होता है.”

बाल मजदूरी पर निबन्ध | Essay on Child Labour in Hindi

देश के बच्चे देश के बहुमूल्य रत्न होते हैं क्योंकि आगे चलकर यहीं बच्चे देश को चलाते हैं और देश का भविष्य बनाते हैं. यदि देश का हर बच्चा देश के विकास में योगदान देगा तभी देश का समुचित विकास होगा, परन्तु बाल मजदूरी जैसी समस्या भारत जैसे देशों के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती हैं. बाल मजदूरी ( Child Labor ) के कारणों और प्रकारों को उचित रूप से समझना होगा. इसे खत्म करने के लिए समाज और सरकारों को जागना होगा. हर समस्या का समाधान होता हैं, पर समस्या का समाधान आत्मविश्वास के साथ ढूढ़ना जरूरी हैं.

कोई बालक स्वेच्छा से मजदूर नहीं बनता. उसकी मजबूरी ही उससे मजदूरी करवाती हैं. जिन बच्चों के माँ-बाप गरीब होते हैं; बीमार, असमर्थ या असहाय होते हैं; या जो बच्चे अनाथ होते हैं, वे ही पेट पालने के लिए स्वयं को तैयार करते हैं. क़ानून के अनुसार, बच्चों से मजदूरी कराना अपराध हैं. उन्हें पालने और शिक्षा देने का दायित्व सरकार का हैं, परन्तु भारत सरकार के पास इतने साधन नहीं हैं कि वह अपने हर नागरिक को अन्न, वस्त्र और शिक्षा दे सके. परिणामस्वरूप भारत की अधिकतर आबादी राम-भरोसे हैं. उसे स्वयं जैसे तैसे मजदूरी करके पेट भरना पड़ता हैं. करोड़ो-करोड़ तब भी भूखे पेट सो जाते हैं. जो बच्चे भूखे पेट सोने का दर्द जानते हैं, वे ही मजबूरी से मजदूर बनना स्वीकार करते हैं. प्रश्न उठता है कि क्या भारत में कभी बाल मजदूरी का अभिशाप समाप्त होगा? आखिर इस समस्या का समाधान क्या हैं? इसका उत्तर एक ठोस और सशक्त सरकार दे सकती हैं. यदि कभी भारत में संवेदनशील और सख्त सरकार आई तभी हर बच्चे के हथौड़े की जगह किताब पकड़ाई जायेगी. उनके पालन-पोषण का जिम्मा सरकार का होगा. तब तक सामजिक संगठनो, विचारकों, साहित्यकारों को बातचीत के जरिये यह सपना जिन्दा रखना चाहिए कि एक दिन भारत बाल-मजदूरी के अभिशाप से मुक्त होकर रहेगा.

बाल श्रम पर क़ानून | Child Labour Act in Hindi

  • 14 साल के कम उम्र के बच्चे को काम देना गैर-कानूनी (Illegal) हैं, परन्तु पारिवारिक व्यवसाय ( Family Business ) में बच्चें स्कूल से वापस आकर या गर्मी की छुट्टियों के समय काम कर सकते हैं. इसी तरह फिल्मों में बाल कलाकारों को काम करने की अनुमति हैं, पर स्कूल से वापस आकर या गर्मी की छुट्टियों के समय काम कर सकते हैं.
  • यदि आपके आस-पास कोई बाल मजदूरी क़ानून का उलंघन करता हैं तो आप इसकी शिकायत पुलिस या मजिस्ट्रेट से कर सकते हैं. आप बच्चों के अधिकारों और बाल मजदूरी पर कार्य करने वाली सामजिक संस्थाओं की नजर में भी मुद्दे को ला सकते हैं. इसकी शिकायत आप बाल मजदूर इंस्पेक्टर ( Labor Inspector ) से भी कर सकते हैं.
  • परिवारिक व्यवसाय में बच्चों को लगाते समय यह ध्यान रखे कि व्यापार इस क़ानून के तहत परिभाषित खतरनाक प्रक्रिया या पदार्थ से जुड़ा न हो.
  • बच्चों के माता-पिता /अभिभावकों को अपने बच्चों को इस कानून के विरुद्ध काम करने की अनुमति देने के लिए सज़ा नहीं दी जा सकती है परन्तु यदि किसी 14 वर्ष से कम आयु के बच्चे को व्यावसायिक उद्देश्य से काम करवाया जाता है या फिर किसी 14-18 वर्ष की आयु के बच्चे को किसी खतरनाक व्यवसाय या प्रक्रिया में काम करवाया जाता है तो यह प्रतिरक्षा लागू नहीं होती और उन्हें सज़ा दी जा सकती है.
  • क़ानून उन्हें अपनी भूल सुधारने का एक अवसर देता है, यदि वह ऐसा करते हुए पहली बार पकड़े जाते हैं तो वह इसे समाधान/समझौते की प्रक्रिया से निपटा सकते हैं.

बाल मजदूरी का बदलता स्वरूप | Changing Nature of Child Labor

वर्तमान समय की बात करें तो बड़े शहरों में बाल मजदूरों को दूकान या व्यवसाय में नहीं रखते हैं, क्योंकि आज के आधुनिक युग में मीडिया, सरकार और अन्य साधन इतने जागरूक हैं कि बाल-मजदूरी क़ानून का उलंघन करने पर उन्हें आसानी से पकड़ा जा सकता हैं और जुर्माना या लाइसेंस भी रद्द हो सकता हैं. इस डर से भी बहुत लोग बाल मजदूर को अपने यहाँ काम पर नहीं रखते हैं. अब लोग शिक्षित व्यवसाय में आ रहे हैं जो बाल मजदूरी के नियम और क़ानून को अच्छी तरह से जानते हैं और वो अपने यहाँ बाल मजदूर को नहीं रखते हैं.

शहरों में अधिकत्तर बाल मजदूर निम्न कार्यों को करते हुए दिखाई देते है – पर्यटकों के गाइड के रूप में, रेड लाइट पर समान बेचते हुए, वेश्यावृत्ति, घर की सफेदी करना या घर बनाने वाले जगहों पर मजदूरों के रूप में, कारखानों में होते हैं. सरकार और समाज सेवी संस्थानों को जागरूक होकर एक साथ मिलकर कार्य करना चाहिए तभी बाल मजदूरी को पूरी तरह से खत्म किया जा सकता हैं.

ज्यादातर बाल मजदूरी ग्रामीण क्षेत्रों में देखने को मिलती हैं जो निम्न तरह के कार्यों में लगे होते हैं – कृषि, कपड़ा सिलना, बक्से बनाना, दुकाने चलाना, चाय की दुकानों पर, खाने के ढ़ाबों पर, स्टोर के उत्पादों का भंडारण करना, साफ़-सफाई के कार्य, पटाखों के कारखानों में, मिठाई की दुकानों पर दिखाई देते हैं.

बाल मजदूरी को कैसे रोकेंगे | How to stop Child Labour in Hindi

  • शिक्षा के प्रति लोगों को जागरूक करना ताकि वो अपने बच्चों को बाल मजदूरी में न लगाकर उन्हें शिक्षित बनाएं.
  • बाल मजदूरी के नियम का सख्ती से पालन करवाना.
  • समाज को भी बाल मजदूरी के प्रति जागरूक होना चाहिए, यदि उन्हें कोई बाल मजदूरी दिखे तो मजदूर इंस्पेक्टर से शिकायत करें.
  • गावों में रोजगार की व्यवस्था करना, ताकि माता-पिता/ अभिभावक अपने बच्चों को कम उम्र में बाहर न भेजकर उन्हें शिक्षित बनाएं.
  • बाल श्रम को रोकने के और भी कई अन्य उपाय हैं.

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