किसी की तरक्की देखकर ईर्ष्या क्यों होती है?

Kisi Ki Tarkki Dekhkar Irshya Kyo Hoti Hai – मनुष्य का स्वभाव बड़ा ही विचित्र होता है क्योंकि हर व्यक्ति का अलग-अलग होता है। कई बार ऐसा होता है कि दोस्त, भाई, किसी परिचय या रिश्तेदार की तरक्की की खबर सुनकर ऊपर से प्रसन्नता प्रकट करते है लेकिन मन के अंदर ही अंदर ईर्ष्या रखते है। सोचते है कि किसी तरह से उसका यह कार्य खराब हो जाएं। आजकल यह विचार ज्यादातर लोगो के मन में आ जाता है।

3 इडियट फ़िल्म का डायलॉग 100% सही और तजुर्बे पर आधारित है – “अगर दोस्त फेल हो जाये तो बुरा लगता है लेकिन टॉप कर जायें तो और ज्यादा बुरा लगता है।

दूसरों की तरक्की देखकर इसलिए भी ईर्ष्या होती है क्योंकि इंसान यह नही चाहता है कि उससे कोई आगे निकले। जब कोई किसी से आगे निकलता है तो मन में ईर्ष्या आ ही जाती है। मन में ईर्ष्या का भाव आने के कई कारण है जोकि नीचे दिए हुए है।

किसी की तरक्की देखकर ईर्ष्या क्यों होती है?

  • जो लोग काम कम और बातें बड़ी-बड़ी करते है। अक्सर वो दूसरों की तरक्की देखकर खुश नही होते है। उनके मन में ईर्ष्या का भाव आ जाता है। ऐसे लोग उस तरक्की या सफलता को छोटा दिखाने का प्रयास करते है और अपनी ईर्ष्या को प्रकट करते है।
  • जब मनुष्य अपनी तुलना किसी अन्य व्यक्ति से करता है और अपनी नजरों में खुद को उससे अच्छा मान लेता है। किसी कारणवश उस अन्य व्यक्ति को सफलता मिल जाती है तब इंसान के मन में उस तरक्की को देखकर ईर्ष्या होने लगती है।
  • किसी की तरक्की और सफलता को देखकर अशिक्षा और अज्ञानता के कारण भी ईर्ष्या होती है। इंसान का स्वभाव बड़ा ही मासूम होता है। हृदय में कब और कौन-सा विचार आएगा इसकी कल्पना नहीं की जा सकती है।
  • कई बार दूसरों की तरक्की देखकर स्वाभाविक रूप से मन में ईर्ष्या का भाव आ जाता है। आज के दौर में इंसान अनेको बुराइयों से घिरा हुआ है। जिसके कारण अजीबों गरीब विचार मन में आते है।

कम या ज्यादा ईर्ष्या का भाव सबके मन में होता है। इसे एक अवगुण के रूप में नही देखना चाहिए। बहुत लोगो को दूसरों की बुराई करके ही आनन्द आता है। ऐसे लोगो का स्वभाव ईर्ष्यालु प्रतीत होता है। मेरा यह स्वयं का मत है कि इंसान कितना भी विद्वान हो जाये या सकारात्मक विचार रखे लेकिन उसके हृदय के एक कोने में ईर्ष्या जरूर विराजमान रहेगी।

ईर्ष्या के दोहे

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कितना भी अच्छा कर्म करो तन से,
ईर्ष्या नहीं जाती मनुष्य के मन से.


अगर मनुष्य हृदय से ईर्ष्या मिट जायेगी,
आत्मा को सच्ची प्रसन्नता मिल जायेगी।


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