ताशकंद समझौता क्या था? | What was Tashkent Samjhauta

Lal Bahadur Shastri Tashkent Samjhauta

Tashkent Samjhauta (ताशकंद समझौता) – यह समझौता 11 जनवरी 1966 में भारत और पकिस्तान के बीच में हुआ था जोकि एक शान्ति समझौता था. समझौते के अनुसार दोनों देशो ने यह तय किया था कि वह अपनी शक्ति का प्रयोग नही करेंगे और आपसी झगड़ो को शांतिपूर्ण तरीके से उसका हल निकालेंगे. यह समझौता भारत के प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री और पकिस्तान के प्रधानमंत्री अयूब खाँ के बीच में एक लम्बी वार्ता के बाद हुआ. यह ताशकंद, रूस में हुआ.

ताशकंद समझौते के मुख्य विन्दु (Main Points of Tashkent Agreement)

ताशकंद सम्मेलन रूस के प्रधानमंत्री के द्वारा आयोजित किया गया था जिसमे कहा गया था कि –

  1. भारत और पकिस्तान अपनी शक्ति का प्रयोग न करते हुए, आपसी झगड़ो को शांतिपूर्वक वार्ता से उसका हल निकालेंगे.
  2. दोनों ही देश 25 फ़रवरी 1966 तक अपनी सेना को 5 अगस्त 1965 की सीमा रेखा पर पीछे हटा लेंगे.
  3. दोनों देशो के बीच आपसी संबंधो को बेहतर बनाने और आपसी हित बढ़ाने के लिए शिखर सम्मेलन वार्ता और अन्य वार्ता जारी रहेगी.
  4. दोनों देश एक दुसरे के आंतरिक मामलो में हस्तक्षेप नही करेंगे.
  5. आर्थिक और व्यापारिक में सुधर और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के विचार को बढ़ावा देना.
  6. एक-दुसरे के बीच में प्रचार कार्य को फिर से सुचारू करना.
  7. शरणार्थियों और अवैध प्रवासी जैसी समस्याओ पर विचार विमर्श.
  8. हाल ही के समय में एक दुसरे की सम्पत्ति लौटने के प्रश्न पर विचार-विमर्श

ताशकंद समझौते का प्रभाव (Effect of Tashkent Agreement)

समझौते के अनुसार दोनों देशो की सेनाएँ सीमा रेखा पर वापस लौट गई, जहाँ पर वो युद्ध से पहले थी. इस समझौते से दोनो देशो के रिश्तों पर बड़ा गहरा प्रभाव पड़ा. ताशकंद समझौते को लोग इसलिए भी याद रखते हैं क्योकि इस समझौते पर हस्ताक्षर करने के कुछ घंटो के बाद ही भारत के प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री की दुःखद मृत्यु हो गई थी.