Saflta Ka Mantra कुछ ही व्यक्ति सफल क्यों होते हैं

अपने जीवन काल में तो सभी सफल होना चाहते है लेकिन सफलता का घूँट कुछ ही लोग पी पाते है ऐसा क्या होता है कि सफलता कुछेक के हाथ लगती है जबकि परिश्रम तो सभी करते है अगर कुछ बिंदुओं पर विचार करें तो शायद असफल होने का कारण जान सकते हैं.

खुद को पहचाने (Know Yourself)

सफलता के शिखर पर पहुँचने के लिए सर्वप्रथम खुद हो पहचानना ज़रूरी होता है, व्यक्ति यही नहीं जान पाता है कि वह किस कार्य के लिए बना है और बिना सोचे समझे भिन्न-भिन्न क्षेत्रों में खुद को आजमाने लगता है और हर समय निराशा ही हाथ लगती है, कारण यही की व्यक्ति उस कार्य के लिए बना ही नहीं होता है,इसलिए किसी भी कार्य को करने से पहले खुद को पहचानना उतना ही ज़रूरी होता है जितना तीखा लगने के बाद पानी का.

आत्मचिंतन

आत्मचिंतन का ही अभाव  होता है कि व्यक्ति खुद का आकलन नहीं कर पाता और अनेक लक्ष्यों का निर्धारण कर लेता है और धीरे-धीरे लक्ष्य से दूर होता चला जाता हैं.

रूचि (Interest)

बिना रूचि के ही किसी भी कार्य को करने पर कुछ दिनों बाद वह कार्य अरुचिकर लगने लगता है जिससे हम अपना 100 प्रतिशत नहीं दे पाते और कुछ समय बाद असफलता को गले लगा लेते हैं.

जानकारी का अभाव (Lack of Knowledge)

किसी भी कार्य के शुरूआती दौर में हम अपना 100 फीसदी देते हैं लेकिन धीरे- धीरे जानकारी के अभाव में हम ऊर्जाहीन का अनुभव करने लगते हैं और कुछ दिनों पर लक्ष्य से विचलित हो जाते हैं.

पढ़ने में अरुचि (Un-interested In Study)

जानकारी के अभाव का सबसे बड़ा कारण पढ़ने में रुचि का न होना होता है इसलिए पढ़ने की आदत डाले और जहाँ से हो सके सबंधित विषय के बारे में जानकारी अर्जित करें.

असफलता से सीखने का हुनर (Learn from Your Mistake)

सफलता का राज असफलता में छुपा होता है यह तब पता चलता है जब असफलता से सीखने की ललक हो, कई बार ऐसा होता है कि हम सफलता के करीब होते है और परिणाम गलत आ जाता है जिसके फलस्वरूप हम असफलता से सीखने के बजाय पश्चाताप करना शुरू कर देते हैं जो प्रत्येक मायने में हानिकारक होना है इसलिए असफलता को स्वीकार करते हुए उससे सीखने गुण अपने अंदर विकसित करें.

लक्ष्य का निर्धारण (Decide Aim)

लक्ष्य के निर्धारण के बिना सफलता के बारे में सोचना प्रत्येक स्तर पर हानिकारक होता है जब मंजिल का ठिकाना नहीं तो रास्ते भी आप को सुगम मिलने की सम्भवना नहीं और आगे चलकर हो सके इतने रास्ते मिलेंगें कि विचलित होने की पूर्ण सम्भवना बनी रहती हैं.