डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन बायोग्राफी | Dr Sarvepalli Radhakrishnan Biography

Dr Sarvepalli Radhakrishnan Hindi Biography

डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्म 05 सितम्बर 1888 में हुआ था. डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन भारत के पहले उप-राष्ट्रपति और दूसरे राष्ट्रपति रहे जो भारतीय संस्कृति के संवाहक, महान विद्वान्, प्रख्यात दार्शनिक और बड़े हिन्दू विचारक थे. इनके इन्ही गुणों के कारण 1984 में इन्हें भारत सरकार द्वारा सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया. इनका जन्मदिन (05 सितम्बर), भारत में शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता हैं.

डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन संक्षिप्त परिचय (Dr. Sarvapalli Radhakrishnan Brief Introduction)

नाम – डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन
जन्म – 05 सितम्बर 1888
जन्म स्थान – तिरुत्तनि (दक्षिण भारत)
पिता – सर्वपल्ली वीरास्वामी
माता – सीताम्मा
मृत्यु – 17 अप्रैल 1975
प्रथम उप-राष्ट्रपति कार्यकाल – 13 मई 1952 से 12 मई 1962
द्वितीय राष्ट्रपति कार्यकाल – 13 मई 1962 से 13 मई 1967
धर्म – हिन्दू

डॉ॰ सर्वपल्ली राधाकृष्णन पूरी दुनिया को एक शिक्षालय मानते थे, वह मानते थे कि शिक्षा के द्वारा ही मानव मस्तिष्क का सदुपयोग किया जाना सम्भव है. इन्होने शिक्षक समाज को सम्मानित करने के उद्देश्य से शिक्षक दिवस के रूप में मनाने की इच्छा व्यक्त की थी, आज पूरे भारत में प्रतिवर्ष 5 सितम्बर को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता हैं.

डॉ॰ सर्वपल्ली राधाकृष्णन उपलब्धियाँ (Dr. Sarvepalli Radhakrishnan Achievements)

जब राधाकृष्णन भारत लौटे तो यहाँ के विभिन्न विश्वविद्यालयों में उच्चपदो पर रहकर अपने ज्ञान को पूरे देश में फैलाया. इनकी शिक्षा सम्बन्धी उपलब्धियों के दायरे में निम्नवत संस्थानिक सेवा कार्यों को देखा जाता है-

  1. आंध्र विश्वविद्यालय के वाईस चांसलर रहे.
  2. ऑक्सफ़ोर्ड विश्वविद्यालय में प्राध्यापक रहे.
  3. कलकत्ता विश्वविद्यालय के अंतर्गत आने वाले जार्ज पंचम कॉलेज के प्रोफ़ेसर रहे.
  4. काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के चांसलर रहे
  5. दिल्ली विश्वविद्यालय के चांसलर रहे
  6. यूनेस्को में भारतीय प्रतिनिधि के रूप में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई.

भारत रत्न

1931 में ब्रिटिश साम्राज्य के द्वारा डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को “सर” की उपाधि मिली थी लेकिन स्वतंत्रता के बाद इसका महत्व समाप्त हो चूका था. भारत के प्रथम राष्टपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद जी ने 1954 में उनकी दार्शनिक और शैक्षिक उपलब्धियों के लिए देश का सर्वोच्च सम्मान “भारत रत्न दिया गया”