दुनिया गोल है | Duniya Gol Hai

Duniya Gol Hai

Duniya Gol Hai ( क्या दुनिया गोल है ) – हम बचपन से ही सुनते आ रहे हैं कि धरती गोल हैं. यह दुनिया गोल हैं. विज्ञान भी सिद्ध कर चुका है कि धरती गोल हैं जो सूर्य के चारों ओर प्रक्रिमा करने के साथ-साथ अपने अक्ष (धुरी) पर भी घूम रही हैं. परन्तु आपको यह बात जानकार आश्चर्य होगा कि कुछ लोग और संस्था ऐसे भी है जो मानते हैं कि दुनिया (धरती) गोल नहीं हैं उनका मानना है कि दुनिया फ्लैट हैं. आइयें जानते हैं ये कौन लोग हैं.

फ्लैट अर्थ सोसाइटी | Flat Earth Society in Hindi

फ्लैट अर्थ सोसाइटी ( International Flat Earth Research Society ) इस संस्था के लोग मानते हैं कि धरती फ्लैट हैं. आश्चर्य की बात यह हैं कि इस संस्था से जुड़ने वालों की संख्या दिनों-दिन बढ़ती जा रही हैं. फ्लैट अर्थ थ्योरी ( Flat Earth Theory in Hindi ) को जानने से पहले फ्लैट अर्थ सोसाइटी का इतिहास जान लेते हैं.

फ्लैट अर्थ थ्योरी का इतिहास | Flat Earth Theory History in Hindi

350 BC यानि अभी से 3250 वर्ष पहले लोग समुन्द्र में ज्यादा दूर तक जाने से डरते थे क्योंकि उन्हें लगता था कि धरती फ्लैट है. यदि हम गलती से धरती के किनारे पहुँच गये तो धरती से नीचे गिर जायेंगे और कभी वापस नहीं आ पायेंगे. लेकिन ग्रीक फिलोसफर अरस्तू इस बात से सहमत नहीं थे कि धरती फ़्लैट हैं उनका मानना था कि यदि धरती का अंत हैं तो समुद्र का सारा पानी गिर क्यों नहीं जाता हैं. उनका यह भी मानना था कि यदि धरती फ़्लैट हैं हैं तो दूर आती जहाज पूरी क्यों नहीं दिखाई देती हैं. यदि आप परीक्षण करे तो पाएंगे कि दूर आती जहाज के ऊपर वाला ही भाग दीखता हैं. जैसे-जैसे जहाज नजदीक आता हैं वैसे दिखने लगता हैं.

इन दोनों कारणों से अरस्तू यह मानने को तैयार नहीं थे कि धरती फ्लैट हैं. अरस्तू ने कुछ और भी तर्क दिए. उनहोंने देखा कि चंद्रग्रहण के समय चंद्रमा पर जो छाया पड़ती हैं वो गोलाकार होता हैं और भी कुछ तर्क दिए जो बताते थे कि पृथ्वी गोल हैं. अरस्तू के इस तर्क से लोग दो गुटों में बंट गये. एक जो अरस्तू के मत से सहमत थे और मानते थे कि पृथ्वी गोल है और दुसरे जो अरस्तू के मत से सहमत नहीं थे वो मानते थे कि पृथ्वी फ्लैट हैं.

इन दोनों अवधारणाओ के साथ समय गुजरता गया और 18वीं सदी आ गई. सन् 1881 ई. में सैमुएल रूबोथैम की “Zetetic Astronomy: Earth not a Globe” नामक 430 पेज की पुस्तक आई. इस पुस्तक में रूबोथैम ने ऐसे तथ्य सामने रखे जो बताते हैं कि धरती गोल नहीं फ्लैट हैं. पृथ्वी एक डिस्क की तरह फ़्लैट हैं जिसके चारों ओर अन्टार्कटिका की बर्फ हैं जो धरती के पानी को धरती से बाहर गिरने से रोकती हैं. रूबोथैम के अनुसार सूर्य और चन्द्रमा महज 4800 किलोमीटर की ऊचाई पर ही मौजूद हैं. सूर्य टोर्च लाइट की तरह पृथ्वी पर रौशनी देते हैं जिसके कारण दिन और रात होता हैं. सूर्य 1 दिन में पृथ्वी का एक चक्कर लगाता हैं. सैमुएल रूबोथैम ने और भी कई थ्योरी दिए.

सैमुएल रूबोथैम ने फ्लैट अर्थ सोसाइटी “Flat Earth Society” की स्थापना की. समय के साथ इसके फॉलोवर बढ़ते गये. लोग 21वीं सदी में भी सैमुअल की इस थ्योरी को सपोर्ट करते हैं. इस सोसाइटी के सदस्य दिनों-दिन बढ़ते ही जा रहे हैं. इनका मानना हैं कि नासा हमसे सच छिपाती हैं. नासा कभी अन्तरिक्ष में गई ही नहीं. यदि विज्ञान के नजरिये से सैमुएल की किताब में दिए तथ्यों को देखे तो सारे तथ्य मिथ्या लगते हैं.

आज विज्ञान ने यह सिद्ध कर दिया हैं कि धरती फ्लैट नहीं गोल हैं. फिर भी “धरती गोल हैं या दुनिया गोल है” इस थ्योरी को न मानकर. Flat Earth Theory को मानते हैं.

फ्लैट एअर्थ थ्योरी का विडियो | Flat Earth Theory in Hindi Vidoe