Barish Shayari | बारिश शायरी

बारिश में हम पानी बनकर बरस जायेंगे,
पतझड़ में फूल बनके बिखर जायेंगे,
क्या हुआ जो हम आपको तंग करते हैं,
कभी आप इन लम्हों के लिए भी तरस जायेंगे.

कहीं फिसल ही न जाऊं तेरी याद में चलते-चलते..
रोक अपनी यादों को मेरे शहर में बारिश का समाँ हैं…!!!

जमीन जल चुकी हैं, आसमान बाकी हैं,
सूखे कुएँ तुम्हारा इम्तिहान बाकी हैं,
बादलों बरस जाना समय पर इस बार,
किसी का मकान गिरवी तो किसी का लगान बाकी हैं.

जब-जब बादल बरसता है,
सनम से मिलने को दिल तरसता हैं.

सुना है बहुत बारिश है तुम्हारे शहर में,
ज्यादा भीगना मत,
अगर धुल गयी सारी गलतफहमियाँ,
तो बहुत याद आयेंगें हम.

बूँदे बारिश की यूँ जमीन पर आने लगी,
सोंदी से महक माटी की जगाने लगी,
हवाओं में भी जैसे मस्ती छाने लगी
वैसे ही हमें भी आपकी याद आने लगी…!!!


आज बारिश में तुम्हारे संग नहाना हैं,
सपना ये मेरा कितना सुहाना हैं,
बारिश के कतरे जो तेरे होंठों पे गिरे,
उन कतरों को अपने होंटों से उठाना हैं.


बरसात की भीगी रातों में फिर कोई सुहानी याद आई,
कुछ अपना जमाना याद आया कुछ उनकी जवानी याद आई.


बारिश का ये मौसम कुछ याद दिलाता हैं,
किसी के साथ होने का एहसास दिलाता हैं,
फ़िज़ा भी सर्द हैं यादें भी ताज़ा हैं
ये मौसम किसी का प्यार दिल में जगाता हैं.

मौसम है बारिश का और याद तुम्हारी आती है,
बारिश के हर कतरे से आवाज़ तुम्हारी आती है,
बादल जब गरजते हैं, दिल की धड़कन बढ़ जाती है,
दिल की हर इक धड़कन से आवाज़ तुम्हारी आती है,
जब तेज हवायें चलती हैं तो जान हमारी जाती है,
मौसम है कातिल बारिश का और याद तुम्हारी आती है.