वीटो पॉवर की पूरी जानकारी | What is Veto Power in Hindi

Veto Power in Hindi

Veto Power Explanation in Hindi – वीटो पावर क्या हैं? (What is VETO Power?), किन-किन देशों को वीटो पावर प्राप्त हैं (Which countries have the power of veto?), Veto Power कैसे मिलता हैं?, वीटो पॉवर से सम्बन्धित अन्य रोचक तथ्य ( Other Interesting Facts about Veto Power) आदि के बारें में जानने के लिए इस पोस्ट को जरूर पढ़े.

What is VETO Power? | वीटो पावर क्या हैं? | Veto Power Full Meaning in Hindi

VETO (वीटो) एक लैटिन शब्द हैं जिसका अर्थ हैं – “मैं निषेध करता हूँ”. संयुक्त राष्ट्र संघ ( United Nations Organization – UNO ) की संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के स्थाई सदस्य देशो को मिला हुआ विशेषाधिकार ही “VETO Power (वीटो पॉवर)” कहलाता हैं. जिन देशों के पास यह विशेषाधिकार होता हैं वो परिषद् में प्रस्तावित किसी भी प्रस्ताव को रोक सकते हैं या उसे नकार सकते हैं. भले ही उसके पक्ष में कितने भी वोट पड़े हों. किसी प्रस्ताव को पारित करने के लिए परिषद् के सारे स्थायी सदस्यों का वोट और 4 अस्थाई सदस्यों का वोट मिलना जरूरी होता हैं. सुरक्षा परिषद् के पाँच स्थायी सदस्य जिन्हें “Veto Power” प्राप्त हैं वे देश इस प्रकार हैं –

Veto Power Countries – अमेरिका ( America ), रूस ( Russia ), ब्रिटेन ( United Kingdom – UK ), फ्रांस ( France ) और चीन ( China ).

वीटो पॉवर कैसे मिलता हैं? | Veto Power Kaise Milta Hai

वीटो पॉवर उन देशों को नही मिलता हैं जो माँगते हैं, यह उन देशों को मिलता हैं जो इसके क़ाबिल हैं. भारत या कोई अन्य देश तभी वीटो पॉवर पा सकता हैं जब सुरक्षा परिषद् के सारे स्थाई सदस्यों का सकारात्मक मतदान प्राप्त हो और अस्थाई सदस्यों का दो-तिहाई (2/3) सकारात्मक मतदान प्राप्त हो.

दुसरे विश्व युद्ध के बाद जब भारत स्वतंत्र हुआ तब भारत की औद्योगिक, राजनितिक, आर्थिक और सैन्य वृद्धि को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सीट यानि वीटो पॉवर देने की पेशकश की गई लेकिन नेहरू जी ने चीन के लोगों के गणतंत्र का हवाला देते हुए वीटो पॉवर लेंते से इनकार कर दिया.

वीटो पॉवर से सम्बन्धित अन्य तथ्य | Other Interesting Facts about Veto Power

  1. संयुक्त राष्ट्र घोषणा पत्र के अनुसार अन्तराष्ट्रीय शान्ति और सुरक्षा को बनाये रखना सुरक्षा परिषद् की मुख्य ज़िम्मेदारी हैं. इस कारणवश एक मुहावरे के रूप में इस “दुनिया का पुलिसमैन” भी कहा गया हैं.
  2. यह संयुक्त राष्ट्र संघ का मुख्य अंग हैं और एक प्रकार से कार्यपालिका हैं.
  3. सुरक्षा परिषद् में कुछ 15 सदस्य होते हैं जिनमे 5 स्थाई सदस्य और 10 अस्थाई सदस्य होते हैं.
  4. सुरक्षा परिषद के प्रत्येक सदस्य का एक वोट होता हैं. प्रक्रिया सम्बन्धी मामलो में निर्णय के लिए 15 में से 9 सदस्यों द्वारा सकारात्मक मतदान आवश्यक होता हैं, जिनमें पाँचों स्थायी सदस्य देशों का सकारात्मक मतदान आवश्यक होता हैं.
  5. पाँचों स्थायी सदस्य देशों की सहमति महान शक्तियों की आम सहमति और वीटो (निषेधाधिकार) शक्ति के रूप में जाना जाता हैं. यदि कोई स्थायी सदी किसी निर्णय से सहमत नही हैं, तो वह नकारात्मक मतदान करके अपने वीटो के अधिकार का उपयोग कर सकता हैं. इस दशा में 15 में 14 सदस्य देशों के समर्थन के बावजूद प्रस्ताव स्वीकृत नहीं होते हैं.
  6. यदि कोई स्थायी सदस्य किसी निर्णय का समर्थन नही करता और उस निर्णय को रोकना भी नहीं चाहता हैं तो वह मतदान की प्रक्रिया के दौरान अनुपस्थित रह सकता हैं.
  7. अमेरिका ने वीटो का उपयोग सर्वप्रथम मार्च 1971 ई. में रोडेशिया के प्रश्न पर किया था.
  8. चीन ने सर्वप्रथम वीटो का प्रयोग अगस्त 1972 ई. में बांग्लादेश के विश्व संस्था में प्रवेश के प्रश्न पर किया था.
  9. चीन ने वीटो पॉवर का उपयोग लगभग 12 बार किया हैं जिसमें 4-5 बार भारत के विरोध में किया हैं.

भारत को अब तक वीटो पॉवर क्यों नही मिला?

भारत पिछले कई सालो से सुरक्षा परिषद् में स्थायी सदस्यता यानि वीटो पॉवर के लिए प्रयास कर रहा हैं लेकिन अब तक सफ़लता नही मिली हैं. इसके ये कुछ मुख्य कारण हैं.

  1. सुरक्षा परिषद् के पांच स्थायी सदस्य (जिनके पास वीटो पॉवर हैं) अपनी शक्ति को किसी अन्य देश के साथ साझा नही करना चाहते हैं इसलिए भारत को वीटो पॉवर मिलने में दिक्कत हैं.
  2. चीन नही चाहता कि भारत को वीटो पॉवर मिले.
  3. भारत सुरक्षा परिषद् में एक नही चार सीटों की मांग करता हैं, भारत यह मांग जी-4 सदस्य देशों ( जापान, जर्मनी, भारत और ब्राजील ) के लिए करता हैं. इसकी वजह से भी भारत को वीटो मिलने में देरी हो रही हैं.

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