उधम सिंह पर बेहतरीन कविता | Udham Singh Poem

Udham Singh Poem in Hindi – सरदार उधम सिंह का नाम भारत की आज़ादी की लड़ाई में पंजाब के क्रांतिकारी के रूप में दर्ज हैं. इस पोस्ट में उधम सिंह पर बेहतरीन कविता दी गयी हैं इसे जरूर पढ़े.

उधम सिंह पर कविता 1 | Poem on Udham Singh in Hindi 1 | Udham Singh Kavita 1

उधम सिंह सरदार…
देश की शान बचाने वाला,
देश का मान बढ़ाने वाला !!

उधम सिंह सरदार…
पंजाब की मिटटी मे पैदा होकर,
तुमने गुरुओं का मान बढ़ाया !!
अपने आप को सींच कर,
तुमने गोरों को सबक सिखाया !!

भारत माँ की कसम खा कर,
तुमने डायर को लंदन में जा दफनाया !!
अपनी क़ुरबानी तुमने देकर,
भारत की मिटटी का कर्ज चुकाया !!

गुरसेवक ने भी तेरी देश भक्ति को,
हाथ जोड, शीश झुकाया !!
अरे! देश की शान बचाने वाला,
देश का मान बढ़ाने वाला !!
उधम सिंह सरदार !!

~गुरसेवक सिंह पवार जाखल


उधम सिंह कविता 2 | Udham SIngh Kavita 2

ऊधमसिंह हो जाना है

बच्चे बच्चे को अब फिर से ,
ऊधमसिंह हो जाना है ।
रंग दे बसंती चोला फिर से ,
वन्दे मातरम् गाना है ।।

भारत माँ की जय बोलने ,
से जो भी कतराते है ।
इस मिट्टी के अन्न धन्न को फिर ,
वो कैसे खा जाते है ।।

राष्ट्रगान और वन्देमातरम ,
से दूरी कर लेते है ।
भारत माँ के सीने पर चढ़,
खुद को सोहणा कहते है ।।

गद्दारों के मर्दन वाला ,
मांदल आज बजाना है ।
बच्चे बच्चे को अब फिर से ,
ऊधमसिंह हो जाना है ।।

इस होली तो पिचकारी में ,
देशप्रेम की गोली हो ।
गली गली और शहर शहर में,
वीरों की ही टोली हो ।।

दुश्मन के सीने पर दागी ,
सारी मेरी गोली हो ।
इस माटी के जनगणमन में,
भारत माँ की बोली हो ।।

नापाक इरादों, गतिविधियों को,
सबक बड़ा सिखलाना है ।
बच्चे बच्चे को अब फिर से ,
ऊधमसिंह हो जाना है ।।

मेरे बाजू भड़क उठे है ,
सीना जोर धधकता है ।
मेरा दिल तो , गद्दारों का ,
मस्तक दलना चाहता है ।।

भारत माँ के जयकारों से,
सारा भारत गूंज उठे ।
इस माटी के गद्दारों पर,
अबके बस शमशीर उठे ।।

दुश्मन के ना पांव पड़े यहाँ,
दुश्मन को दल जाना है ।
बच्चे बच्चे को अब फिर से ,
ऊधमसिंह हो जाना है ।।

सीमाओँ पर शहीदों के संग ,
आज हिमालय रोता है ।
जब दिल्ली में देशद्रोह का,
बड़ा वाकया होता है ।।

इस होली तो केवल गोली,
गद्दारों पर चल जाये ।
भीतर का खतरा इस होली ,
सदा सदा को टल जाये ।।

जिस गोदी में जन्मे खेले ,
उस गोदी फिर सो जाना है ।
बच्चे बच्चे को अब फिर से ,
ऊधमसिंह हो जाना है ।।

भारत माँ की चुनर को कहीं ,
आंच कोई ना आ पाये ।
आस्तीन के साँपों के फन ,
कभी कहीं ना उठ पाये ।।

अब ना जागे, गर ना चेते ,
तो यह अक्षम्य नादानी है ।
कश्मीर की केसर भी क्या,
फिर दिल्ली भी जानी है ।।

भारत माँ के वीर सपूतों ,
केसरिया हो जाना है ।
कश्मीर तो अपना ही है,
लाहौर को भी पाना है ।।

राष्ट्रप्रेम की ज्वाला को ले,
इंकलाब को गाना है ।
बच्चे बच्चे को अब फिर से ,
ऊधमसिंह हो जाना है ।।

आज भगत सिंह, राजगुरु का,
खून हमें ललकार रहा है ।
सुखदेव सरीखे दीवानो का,
त्याग हमें धिक्कार रहा है ।।

जलियावाला वीर भूमि
वीरो की गौरव गाथा है ।
देशप्रेम की सही परिभाषा,
हमको वो बतलाता है ।।

माँ की अस्मत की रक्षा को ,
जीना या मर जाना है ।
बच्चे बच्चे को अब फिर से ,
ऊधमसिंह हो जाना है ।।

दुश्मनों के पर पखेरू ,
टिक नहीं अब पायेंगे ।
वन्दे मातरम् , वन्दे मातरम् ,
इंकलाब गायेंगे ।।

भारत माँ का आँचल शोणित,
कितनी कितनी बार करेंगे ।
भारत माँ के गद्दारों पर
अबके सीधा वार करेंगे ।।

माँ पर उठी आँख को साथी,
जिन्दा ही दफ़नाना है ।
बच्चे बच्चे को अब फिर से ,
ऊधमसिंह हो जाना है ।।

नोट – ‘ऊधमसिंह हो जाना है’ शीर्षक कविता को ‘PoemOcean Dot Com’ से लिया गया हैं.


उधम सिंह कविता 3 | Udham SIngh Kavita 3

याद करो ओ काण्ड भयावह ,जलियाँवाला बाग़ को
बूढ़ों-बच्चों की सिसकी,उस चीख-पुकार की राग को

सिक्खों का त्यौहार बैसाखी, चुपके रोया करता है
जलियाँ वाला बाग़ घाव को,अब भी धोया करता है

चिपके सीने से माँओ के ,शिशुओं को मरवाया था
ओडायर के आदेशों को, डायर खूब निभाया था

उस भगदड़ में जान बचाने,लोग कुँआ में कूद पड़े
फिर भी जान बचा न पाए, गिरकर उस में मरे पड़े

सुनकर ऐसी जघन्य कृत्य ,खड़े रोंगटे हो जाते हैं
तभी तो भारत माँ के बेटे, ऊधम सिंह हो जाते हैं

ऊधम सिंह यह दृश्य देख ,खून के आंसू रोया था
माटी लेकर हाथों में,विस्फोटित बीज को बोया था

दर-दर की वह ठोकर खाया,किन्तु तनिक न हारा था
अपनी जान से ज्यादा उसको,मातृभूमि यह प्यारा था

आखिर मौक़ा हाथ लगा, उसको इक्कीस सालों में
रखकर पिस्टल पुस्तक में, घुसा काकस्टन हालों में

ऊधम सिंह भारत का योद्धा, लन्दन तक घबराया था
ओडायर को मार के गोली,अपना कसम निभाया था

पेंटेंनविले में हुयी थी फांसी, वीर सावरकर रोया था
शेरे-हिन्द का वीर लड़ाका,जिसको भारत खोया था

यह पंजाब का वीर सिख था,और जिला संगरूर है
गांव सुनाम बदहाल आज भी, जीने को मजबूर है

आज शहीदे-आजम का,शहीद दिवस फिर आया है
आओ मिलकर पुष्प चढ़ाए, ऐसा इतिहास बनाया है

रचनाकार
योगेन्द्र प्रताप मौर्य
ग्राम व पोस्ट-बरसठी
जिला- जौनपुर