Tides in Hindi | ज्वार-भाटा की पूरी जानकारी

What is Tides – चंद्रमा और सूर्य की आकर्षण शक्तियों के कारण सागरीय जल के ऊपर उठने और नीचे गिरने को ज्वार-भाटा कहते हैं. सागरीय जल के ऊपर उठकर आगे बढ़ने को ज्वार ( Tide ) तथा सागरीय जल को नीचे गिरकर पीछे लौटने को भाटा ( Ebb ) कहते हैं.

पृथ्वी, चन्द्रमा और सूर्य की पारस्परिक गुरुत्वाकर्षण शक्ति की क्रियाशीलता ही ज्वार-भाटा की उत्पत्ति का प्रमुख कारण हैं

Types of Tide | ज्वार-भाटा के प्रकार

High Tide | उच्च ज्वार

उच्च ज्वार की घटना तब होती हैं, जब सूर्य, पृथ्वी तथा चन्द्रमा एक सीध में होते हैं.

Low Tide | निम्न ज्वार

निम्न ज्वार की घटना तब होती हैं जब सूर्य, पृथ्वी तथा चन्द्रमा समकोणिक अवस्था में होते हैं.

Interesting Facts about Tide | ज्वार-भाटा के बारें में रोचक तथ्य

  1. चंद्रमा का ज्वार उत्पादक बल सूर्य की अपेक्षा दुगुना होता हैं, क्योकि यह सूर्य की तुलना में पृथ्वी के अधिक निकट हैं.
  2. अमावस्या और पूर्णिमा के दिन चंद्रमा, सूर्य, और पृथ्वी एक सीध में होते है, अतः इस दिन उच्च ज्वार ( High Tide ) उत्पन्न होता हैं.
  3. दोनों पक्षों की सप्तमी या अष्टमी को सूर्य और चंद्रमा, पृथ्वी के केंद्र पर समकोण बनाते हैं, इस स्थित में सूर्य और चंद्रमा के आकर्षण बल एक दुसरे को संतुलित करने के प्रयास में प्रभावहीन हो जाते हैं. अतः इस दिन निम्न ज्वार ( Low Tide ) उत्पन्न होता हैं.
  4. पृथ्वी के प्रत्येक स्थान पर प्रतिदिन 12 घंटे 26 मिनट के बाद ज्वार, और ज्वार के 6 घंटा 13 मिनट बाद भाटा आता हैं.
  5. ज्वार प्रतिदिन दो बार आते हैं – एक बार चंद्रमा के आकर्षण से और दूसरी बार पृथ्वी के अपकेन्द्रीय बल के कारण.
  6. सामान्यता ज्वार प्रतिदिन दो बार आता हैं किन्तु इंगलैंड के दक्षिणी तट पर स्थित साउथैम्पटन में ज्वार प्रतिदिन चार बार आते हैं. यहाँ दो बार ज्वार इंग्लिश चैनल से होकर और दो बार उत्तरी सागर से होकर विभिन्न अंतरालों पर आते हैं.
  7. समुद्र में आने वाले ज्वार-भाटा की उर्जा को उपयुक्त टर्बाइन लगाकर विद्युत शक्ति में बदल दिया जाता है. इसमें दोनो अवस्थाओं में विद्युत शक्ति पैदा होती है – जब पानी ऊपर चढ़ता है तब भी और जब पानी नीचे उतरने लगता है. इसे ही ज्वारीय शक्ति (tidal power) कहते हैं. यह एक अक्षय उर्जा का स्रोत है.